सवा सौ करोड़ के भारत में सबके पास मां होगी पर शायद ही कोई आदमी होगा जो मां का आशीर्वाद लेने से पहले दरवाजे पर कैमरा लगवाता होगा। पर हमारे प्रधानमंत्री का जन्मदिन हो या मां से मिलने का कोई और मौका हमेशा वे  कैमरे के सामने ही मां से मिलते हैं और मां का पैर छूते हुए तस्वीर जरूर जारी करते हैं।

मां से मिलने के बाद बाद वह बकायदा खुद ही फोटो प्रसारित करते हैं। मानो की देश के दूसरे लोगों से कुछ अलग अंदाज में वह मां का पैर छूते हों या फिर कोई दूसरा पैर छूता ही न हो और वह इतिहास में पहली बार पैर छू रहे हों। आज भी प्रधानमंत्री ने अपने जन्मदिन पर वही किया।

मां को कितनी असहजता महसूस होती होगी। मोदी जी की मां की दृष्टि से देखा जाए तो वह हर मां की तरह अपने बेटे से सहज और स्वाभाविक तरीके से मिलना चाहती होंगी। पर यहां तो मां का आशीर्वाद लेने से पहले कैमरा टीम को बकायदा इत्तला किया जाता होगा कि कैसे क्या करना है। संभव है यह भी हिदायत दी जाती हो कि इस तस्वीर को प्रधानमंत्री के अलावा कोई जारी नहीं करेगा।

तभी तो हर मौके पर खुद ही जारी करते हैं। अन्यथा जब वह मां से मिलते होंगे तो परिवार के कई सदस्य मौजूद रहते होंगे और वह भी फोटो अपनी वाल पर लगा या ट्विट कर सकता है। पर ऐसा होता कभी दिखता नहीं। हर बार मोदी जी मां से मिलने की एक्सक्लूसिव तस्वीर खुद के हाथों से ही जारी करते हैं। मानो मां से मिलना भी कोई राजनीतिक काम हो।


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