कुमार के इस तरह के इंटरव्यू देखकर वालंटियर्स का गुस्सा ठंडा हो जाता है। उन्हें लगने लगता है अभी भी उनकी पार्टी में शुचिता बची है। अभी पार्टी नहीं आंदोलन है आप। अभी आप को नहीं छोड़ना चाहिए…..
 
दिल्ली से भूपेंदर चौधरी की रिपोर्ट
 
आप मुखिया अरविंद केजरीवाल द्वारा पार्टी में हाशिए पर डाले गए कवि कुमार विश्वाश आम आदमी पार्टी के भीतर कूटनीतिक राजनीति में माहिर होते जा रहे हैं। पंजाब, गोवा और दिल्ली एमसीडी चुनाव के बाद कार्यकर्ताओं का उन पर भरोसा बढ़ता जा रहा है। 
 
दिल्ली एमसीडी चुनाव में मिली आम आदमी पार्टी को मिली अकल्पनीय हार के बाद सभी मीडिया घराने इस आस में बैठे थे कि पहले से ही पार्टी में हाशिए पर पड़े कुमार विश्वास अब तो पक्के तौर पर पार्टी छोड़ देंगे। पर हार के बाद कुमार विश्वास पार्टी के भीतर बिल्कुल नए अवतार में उभरे हैं।
 
कल शाम जब वह एक सनसनीखेज छवि वाले टीवी चैनल को साक्षात्कार दे रहे थे तो सभी पत्रकारों को यही आस थी कि आप में फूट ही आज की सबसे बड़ी खबर होगी। पर कीबोर्ड पर बैठे डेस्क पत्रकारिता के माहिरों को निराशा हाथ लगी। और इसके उलट कुमार विश्वास फिर एक बार पार्टी कार्यकर्ताओं में नया विश्वास कायम करने में कामयाब हुए। हालांकि अरविंद केजरीवाल पार्टी के सबसे बड़े नेता हैं, मगर विश्वास कार्यकर्ताओं की पहली पसंद बन गए हैं।
 
गौरतलब है कि लगातार तीसरी हार पंजाब, गोवा और अब दिल्ली एमसीडी में मिली करारी शिकस्त के बाद कार्यकर्ता बेहद निराश, हताश और राजनीतिक संबल खो देने की स्थिति में पड़े हुए थे। ऐसे में कुमार कार्यकर्ताओं में एकता के प्रतीक बनकर उभरे हैं। कार्यकर्ता स्वीकार कर रहे हैं कि जब भी पार्टी पर संकट आता है, जब भी पार्टी हारती है तो कुमार पार्टी से अलग लाइन लेकर कार्यकर्ताओं के साथ खड़े दिखाई देते हैं। 
 
दरअसल कुमार की सारी कवायद पार्टी के वालंटियर्स को जोड़े रखने की है। पार्टी से जुड़े वालंटियर्स अक्सर अपने बड़े नेताओं के फैसले से नाराज़ लगते हैं और मानते हैं कि अरविंद केजरीवाल उनको शह देने का काम करते हैं। ऐसे में कुमार पार्टी के पालनहार—खेवनहार बनकर प्रकट हो जाते हैं। 
 
कुमार का एमसीडी से पहले आया वीडियो हो या कल उनका टीवी पर चल रहे इंटरव्यू को देखकर विपक्षी दल ये सोचकर खुश हुए जा रहे थे कि पार्टी में फूट पड़ रही है, पर उन्हें ये समझ नहीं आ रहा कि कुमार की इस पार्टी विरोधी दिखती लाइन से पार्टी का वालंटियर्स अपने को कुमार से कनेक्ट देखता है। कुमार की बात को अपनी बात समझता है, क्योंकि कुमार पार्टी के वालंटियर्स की नब्ज पकड़ते हैं। 
 
कुमार की खरी—खरी बातें सुनकर पार्टी के वालंटियर्स राहत महसूस करते हैं कि कोई तो है जो उनकी बोली बोलता है। जो वो बोलना चाहते हैं वो कुमार विश्वास बोल रहे हैं। कुमार को पार्टी के अधिकतर वालंटियर्स भैया ही कहकर संबोधित करते हैं। 
 
कुमार के इस तरह के इंटरव्यू देखकर वालंटियर्स का गुस्सा ठंडा हो जाता है। उन्हें लगने लगता है अभी भी उनकी पार्टी में शुचिता बची है। अभी पार्टी नही आंदोलन है आप। अभी आप को नहीं छोड़ना चाहिए। 
 
इस तरह पार्टी के खिलाफ बोलकर कुमार पार्टी को कमजोर नहीं करते, बल्कि उसकी नींव को मजबूत ही करते हैं क्योंकि पार्टी की नींव उसके वालंटियर्स ही हैं। इस बात को पार्टी के सूत्र भी बताते हैं कि एक तरफ कुमार वीडियो निकाल कर पार्टी और पार्टी के बड़े नेता अरविंद पर हमला करते हैं, वहीं दूसरी तरफ कुमार अरविंद के घर में बैठ कर चाय पीते हैं। 
 
जो चैनल चला रहे हैं कि कुमार आप मुखिया केजरीवाल का संयोजक पद छीनने का सपना देख रहे हैं, वो शायद ये भूल गए कि कुमार अपनी कविता का बिज़नेस छोड़कर  इस तरह पार्टी मे नहीं आ रहे। 
 
कुमार खुलेआम बोलते भी आये हैं कि वो बिज़नेस क्लास से चलते हैं। ऐशो आराम से रहते है  और ऐशो आराम नहीं छोड़ना चाहते। ऐसे में उनके पार्टी संयोजक बनने की खबर निराधार है।
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