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अपने 4 साल के बेटे को छुड़वाने के लिए एक मां का जिस्म के बाजार में जिस तरह सौदा हुआ उसे सुनकर हो जाते हैं रोंगटे खड़े, भाई ने कोठे पर ग्राहक बन बचाया बहिन को

जनज्वार। एक महिला किस तरह जिस्म के दलालों के चक्रव्यूह में फंसती है, उसका ताजा उदाहरण है पश्चिम बंगाल की एक महिला, जिसके बच्चे को छीन कोठों के दलालों ने वेश्यावृत्ति के बाजार में उसकी बोली लगा दी।

ऑपरेशन रेडलाइट एरिया में अपने भाई की हिम्मत से कोठे से आजाद हुई इस महिला की कहानी किसी कहानी से कम नहीं लगती, मगर यह उसकी हकीकत है। जब महिला ने मीडिया के सामने अपना दर्द बयां किया तो उसके आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे।

पीड़ित महिला के मुताबिक अपने 4 साल के बेटे को दलालों के चंगुल से बचाने के लिए उसने वेश्या बनना भी स्वीकार किया, मगर बावजूद उसके बच्चा से नहीं मिल पा रहा था। जिस्‍म के दलालों के बीच फंसी उस महिला ने कई बार अपनी जिंदगी भी खत्‍म करने की कोशिश की, मगर हर बार अपने बच्चे को पाने की उम्‍मीद ने उसे जीने पर मजबूर किया।

मीडिया में आई खबरों के मुताबिक पश्‍चिम बंगाल के नॉर्थ 24 परगना जिले की रहने वाली पीड़ित महिला का अपने पति से कुछ महीने पहले जब​ किसी बात को लेकर झगड़ा हुआ तो वह पति का घर छोड़कर मायके ​के लिए निकल गई। मगर अभी वह मायके पहुंच भी नहीं पाई थी कि जिस्म के सौदागरों ने उसे अपने जाल में फंसा लिया। महिला से सहानुभूति जताते हुए जिस्मफराशों के गैंग ने उसकी कहानी जानकर उसे अपनी एक महिला साथी के साथ काम दिलवाने के बहाने दिल्‍ली की ट्रेन में बैठा दिया।

जिस्मफरोशों के गैंग की महिला जब उसे दिल्‍ली के रेड लाइट एरिया में पहुंची तो उसे समझ में आया कि उसे बहकाकर ये लोग धंधा करवाना चाहते हैं। जब उसने रेडलाइड एरिया से किसी तरह बाहर निकलने की कोशिश की तो उससे उसका बच्चा छीन लिया गया और कहा गया कि अगर उसने ना-नुकुर की तो उसके मासूम बच्चे को मौत के घाट उतार दिया जाएगा। महिला से बच्चा छीन जिस्म के दलाल उससे रेडलाइट एरिया में धंधा करवाने लगे।

इसके बाद हुई महिला के अंतहीन शोषण की कहानी। बेटे के नाम पर ब्लैकमेल कर दलालों ने उसे जिस्म के धंधा उतार दिया। महिला को आगरा के थाना छत्‍ता में मौजूद एक कोठे पर रखा गया। दलाल 24 घंटे में एक बार उसके बच्चे के साथ वीडियो कॉल पर उसकी बात करवाते।

दूसरी तरफ ससुराल से नाराज महिला के मायके वालों से पति ने जब संपर्क किया तो पता चला कि वह अपने पिता के घर नहीं पहुंची तो सबको चिंता हुई। पति और मायके वालों ने मिलकर पुलिस के पास रिपोर्ट दर्ज करवाई। छानबीन के दौरान उन्हें शक हुआ कि महिला को जिस्म के दलालों ने न फांस लिया हो। बहिन और भांजे को ढूंढने के ल‍िए भाई ने बंगाल, द‍िल्ली, मुंबई, चेन्नई के रेड लाइट इलाकों की गल‍ियों को छानना शुरू कर दिया।

किसी तरह 23 नवंबर, 2018 को पता चला क‍ि उसकी बहन को आगरा के बदनाम इलाके कश्मीरी बाजार में बेचा गया है, जहां उससे जिस्म का धंधा करवाया जा रहा है। उसी के बाद भाई ने अपनी बहिन को वहां से निकालने के लिए कश्मीरी बाजार की बदनाम गल‍ियों के चक्कर काटने शुरू कर दिये, हालांकि इस बीच यह शंका भी गहराई कि कहीं उसका कत्ल न कर दिया गया हो। इसी दौरान जब उसे अपनी बहिन एक झरोखे से झांकते हुए दिखी तो उसने पुलिस से संकर्प साधा और खुद ग्राहक बनकर कोठे पर पहुंचा।

ग्राहक बनकर कोठे पर पहुंचे भाई को बहन ने बताया क‍ि ज‍िस्मफरोशी कराने के ल‍िए जिस्म के दलालों ने उसके बच्चे को अपने कब्जे में रखा हुआ है और उसे जान से मारने की धमकी दी जाती है। बच्चे को द‍िल्ली के जीबी रोड पर बंधक बनाकर रखा हुआ था, जहां से महिला की उससे वॉट्सऐप कॉल के माध्यम से रोज बात कराई जाती थी। भाई ने अपनी बहन से तमाम जानकारिया जुटाकर आगरा के छत्ता थाने में संपर्क साधा और 5 द‍िन तक पुल‍िस ने रैकी करने के बाद कश्मीरी बाजार से मह‍िला को छुड़ाया।

दूसरी तरफ वॉट्सऐप वीड‍ियो कॉल करने वाले नंबर को भी पुल‍िस ने सर्विलांस पर लगा द‍िया था। शक होने पर जिस्म के दलालों के गैंग ने पकड़े जाने के डर से बच्चे को आगरा पहुंचा दिया था। कई कोठों पर छापा मारने के बाद पुल‍िस ने कश्मीरी बाजार गुदड़ी के मंसूर खान से बच्चे को बरामद किया और 2 मह‍िला कोठा संचालकों पर गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार किया और जेल भेज दिया।

आज तक पर छपी खबर के मुताबिक आगरा की छत्ता पुल‍िस ने बताया कि ’23 नवंबर 2018 को सूचना म‍िली थी क‍ि कश्मीरी बाजार में गलत काम चल रहा है। पुल‍िस ने छापामार कार्रवाई में 3 मह‍िलाओं को ह‍िरासत में ल‍िया और पूछताछ की। पूछताछ में पता चला क‍ि पकड़ी गई एक मह‍िला के बच्चे का अपहरण कर करके रखा हुआ था और उससे जबरन ज‍िस्मफरोशी का धंधा कराया जाता था। बच्चे से रोज वॉट्सऐप कॉल के माध्यम से बात कराई जाती थी। जो लोग गिरफ्तार हुए, उन्हें जेल भेज द‍िया गया।’

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