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संविदा कर्मियों के मुताबिक 3 अप्रैल 2016 को केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह हमारी मांगें पूरी किए जाने का आश्वासन दे चुके हैं, मगर कोई भी मांग अब तक पूरी नहीं की गई

उत्तर प्रदेश। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत विभिन्न योजनाओं में कार्यरत देश के 75 हजार संविदा व ठेके पर कार्यरत स्वास्थ्य कार्मिक आज 23 जनवरी से अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर उतर गए हैं। इससे पहले संविदाकर्मियों ने 15 जनवरी को अपनी मांगों को लेकर एक 4 सूत्रीय एक बार फिर से सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपा था।

उत्तर प्रदेश में NHM संविदा स्वास्थ्य कार्मिकों को अनुमन्य मानव संसाधन नीति, लोयलिटी बोनस आदि सेवालाभों को लागू नहीं किया गया है। अतः उत्तर प्रदेश सहित के संविदा स्वास्थ्य कार्मिकों ने सरकार से मांग की थी कि उनकी सेवानीति में इन समस्त सेवालाभों को लागू किया जाय। इससे पहले पिछले साल संविदा कर्मियों ने इस संदर्भ में जारी अर्धशासकीय पत्रों पर सरकार से ध्यान देने का निवेदन किया था। कहा है कि NHM स्वास्थ्य योजनओं में संविदा व ठेका प्रथा समाप्त की जाए।

संविदा कर्मियों के मुताबिक 3 अप्रैल 2016 को केंद्रीय गृहमंत्री हमारी मांगें पूरी किए जाने का आश्वासन दे चुके हैं, मगर कोई भी मांग अब तक पूरी नहीं की गई। तब राजनाथ सिंह ने आश्वासन दिया था कि राज्य में भाजपा सरकार बनने के बाद उनकी सारी मांगें मान ली जाएंगी। इस बाबत नवंबर 2018 में भी एक चारसूत्रीय मांगों का ज्ञापन शासन—प्रशासन को सौंपा गया था। तब 1 माह के अंदर मांगें पूरी करने का आश्वासन दिया गया था, मगर 2 माह बीत जाने के बावजूद किसी मांग पर विचार नहीं किया गया।

संविदा कर्मचारियों ने पिछले साल भी मांग की थी कि NHM के सभी संविदा व ठेका पर कार्यरत कार्मिकों को 15 फरवरी 2018 तक स्थायी घोषित किया जाए। समान पद समान वेतन, समान कार्य समान वेतन प्रणाली लागू की जाए, जैसा कि माननीय उच्चतम न्यायालय व उच्च न्यायालयों के द्वारा केंद्र व राज्य सरकारों को आदेश निर्गत किये गए हैं। यह मांग भी की थी कि स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ आशा कार्यकर्ताओं को न्यूनतम 10000 मासिक मानदेय प्रदान किया जाए, मगर इनमें से कोई भी मांग नहीं मानी गई, जिस कारण प्रदेश भर के 75 हजार संविदाकर्मी आज से हड़ताल पर उतर चुके हैं।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत कार्यरत सभी संविदा और ठेका स्वास्थ्य कार्मिक लंबे समय से केंद्र और राज्य सरकार से अपील करते आ रहे हैं कि उनकी मांगों पर विशेष ध्यानाकर्षण कर उन्हें जल्द से जल्द लागू किया जाए, साथ ही इसके बाबत अब तक न जाने कितने ज्ञापन सरकार को सौंपे जा चुके हैं।

ये स्वास्थ्य ठेका और संविदा कर्मचारी पहले भी सरकार को चेता चुके हैं कि उनकी मांगों की तरफ ध्यान नहीं दिया गया तो वे आंदोलन को बाध्य होंगे, जिसके लिए केंद्र और राज्य सरकार जिम्मेदार होगी।

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