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दिल्ली—एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण का बहुत बड़ा कारण लगातार बढ़ रहे वाहन और पेड़ों का अंधाधुंध कटान है…

जनज्वार। दिल्ली—एनसीआर में लगातार बढ़ते जा रहे प्रदूषण की खबरें सुर्खियों में हैं। अब खबर है कि दिल्ली—एनसीआर में खराब हवा के चलते 89 फीसदी लोग बेचैन और बीमार महसूस कर रहे हैं।

यह खुलासा एक स्टडी में किया गया है। मीडिया में आई खबरों के मुताबिक प्रदूषित हवा ने अब लोगों को बुरी तरह अपनी जद में लेना शुरू कर दिया है। गौरतलब है कि यह हाल तब है जबकि इस बार दीवाली पर सुप्रीम कोर्ट ने पटाखे फोड़ने पर सख्ती से मनाही का आदेश जारी किया था, इतना ही नहीं जिसने इस आदेश को तोड़ा उनमें से कई पर कार्रवाई भी की गई थी।

प्रदूषित हवा के चलते लोगों पर पड़ने वाले प्रभाव के मद्देनजर की गई स्टडी के अनुसार अधिकतर लोगों का मानना है कि दिल्ली—एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण का बहुत बड़ा कारण लगातार बढ़ रहे वाहन और पेड़ों का अंधाधुंध कटान है।

एनबीटी में प्रकाशित एक खबर के मुताबिक सामाजिक एवं पर्यावरण के मुद्दों पर काम करने वाले एएसएआर सोशल इम्पैक्ट एडवाइजर्स द्वारा ‘परसेप्शन स्टडी ऑन एयर क्वालिटी’ विषय पर किए गए अध्ययन में कहा गया कि मेट्रो शहरों की तुलना में दिल्ली और एनसीआर में लोगों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) सूक्ष्म कण (पीएम) 2.5 और पीएम 10 के बारे में जागरुकता अधिक है।

स्टडी के लिए 17 शहरों में कुल 5,000 लोगों से बातचीत की गई थी। इस अध्ययन के मुताबिक ही दिल्ली में 89 प्रतिशत लोगों का मानना है कि खराब वायु गुणवत्ता के कारण उन्होंने बीमार या बेचैनी महसूस हो रही है। अधिकतर का मानना है कि वाहनों और पेड़ों का गिरना प्रदूषण का प्रमुख कारण है। वायु गुणवत्ता में कमी आने के पीछे चार प्रमुख कारणों में मोटर वाहन (74 पर्सेंट), औद्योगिक ईकाइया (58 पर्सेंट), पेड़ों का कटान (56.9 पर्सेंट) और निर्माण गतिविधियां (48.2 पर्सेंट) शामिल हैं।

अध्ययन के मुताबिक, एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) की जानकारी के लिए लोग ज्यादातर अखबार की खबरों और मोबाइल ऐप का सहारा लेते हैं। 18 से 25 की उम्र के युवाओं में एक्यूआई को लेकर सबसे ज्यादा उत्सुकता दिखाई देती है।

‘परसेप्शन स्टडी ऑन एयर क्वालिटी’ के मुताबिक बहुत ज्यादा प्रदूषित हो चुके शहरों में जहां दिल्ली-एनसीआर, कोलकाता, पटना, लखनऊ, वाराणसी, अमृतसर, सिंगरौली, धनबाद, रायपुर, कोरबा, चंद्रपुर, अंगुल, नागपुर को शामिल किया गया है, वहीं बेंगलुरु, पुणे, मुंबई और चेन्नई जैसे शहर तेजी से प्रदूषित हो रहे हैं।

अगर अभी भी शासन—प्रशासन और आमजन बढ़ते प्रदूषण के प्रति जागरुक नहीं हुए तो बीमार होने वालों का आंकड़ा 100 फीसदी पहुंचने में देरी नहीं लगेगी।


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