कश्मीरियों पर हुए हमले के खिलाफ हुआ राजधानी में धरना, वक्ताओं ने कहा मनुवादी योगी सरकार के संरक्षण में वंचितों पर हमले हैं जारी

लखनऊ, जनज्वार। लखनऊ में नागरिक समाज ने कश्मीरियों पर हुए हमले के खिलाफ अंबेडकर प्रतिमा हजरतगंज पर विरोध पप्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने डालीगंज जाकर कश्मीरी दुकानदारों से मुलाकात भी की। प्रदर्शन के दौरान कश्मीरियों पर हमले बंद करो, कश्मीरियों पर हमला कर देश तोड़ने की साजिश बंद करो, मेहमाननवाजी की लखनवी रवायत को शर्मसार करना बंद करो, महिलाओं का उत्पीड़न बंद करो, दलितों-मुसलमानों पर हमले बंद करो के नारे लगाए गये।

जफर रिजवी, जिन्होंने कश्मीरियों को मार रहे गुण्डों से भिड़कर लखनवी तहजीब को बचाया, को धन्यवाद देते हुए धरने में आए लोगों ने कहा कि इस साझे संघर्ष में हम सब साथ हैं।

प्रदर्शन में आए वक्ताओं ने कहा कि जिस तरह से डालीगंज पुल पर कश्मीरी दुकानदारों को मारा पीटा गया और उसके बाद घटना की जिम्मेदारी लेते हुए विश्व हिंदू दल ट्रस्ट के अंबुज निगम ने थाने से उत्तेजक बयान जारी किए, वो साफ करता है कि इन सांप्रदायिक तत्वों को योगी सरकार में संरक्षण मिला हुआ है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा कश्मीरियों पर हमले रोकने के लिए नियुक्त नोडल अधिकारी पुलिस महानिरीक्षक कानून व्यवस्था और डीजीपी यूपी की भूमिका पर सवाल है कि उन्होंने ऐसे हमले रोकने के लिए क्यों नहीं पहले से प्रभावी कदम उठाए।

वक्ताओं ने कहा कि आज महिला दिवस पर यूपी में महिला उत्पीड़न का सवाल अहम है। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के जुमले वाली सरकार में बेटियों का घर से निकलना सुरक्षित नहीं रह गया है। एक तरफ कुंभ में सूबे के मुखिया समेत पूरी कैबिनेट का जमावड़ा होता है, वहीं मेडिकल की छात्रा और नाबालिग बच्ची के साथ सामूहिक दुष्कर्म जैसी घटनाओं पर योगी सरकार आपराधिक चुप्पी अख्तियार कर लेती है।

पिछले दिनों एमनेस्टी इंटरनेशनल ने यूपी में सर्वाधिक दलित उत्पीड़न तो वहीं संयुक्त राष्ट्र संघ ने मुसलमानों पर बढ़ते हमलों के लिए जो चिंता व्यक्त की वह साफ करता है कि सरकार मुनवादी एजेंडे पर वंचित समाज के खिलाफ हमलावर है। 5 मार्च को 13 प्वाइंट रोस्टर, सवर्ण आरक्षण जैसे मुद्दों का विरोध करने वाले कानपुर देहात और बिहार के भागलपुर में मुकदमा कायम करना साफ करता है कि सरकार किसी भी विरोध के स्वर को कुचल देना चाहती है।

पिछले साल 2 अप्रैल को भारत बंद में मुजफ्फरनगर के उपकार बावरा, विकास मेडियन और अर्जुन पर रासुका लगाकर योगी सरकार ने इंसाफ की आवाजों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा घोषित कर दिया है।

वक्ताओं ने कहा कि मुजफ्फरनगर में बेराजगारी जैसे मुद्दे पर सवाल करने पर भाजपा के नेताओं ने अदनान नामक युवक को पीटा, मेरठ में अतिक्रमण के नाम पर पुलिस की मौजूदगी में दो सौ से अधिक घरों को आग के हवाले कर दिया गया। वहीं गाजीपुर में भावरकोल थाने के सुखडेहरा गांव में दलित को पीटने के बाद दौड़ाकर गोली मार देने की घटनाएं सूबे के हालात को सामने ला देती हैं। योगी-मोदी सरकार की अराजकता का सबसे जीवंत उदाहरण उसके सांसद और विधायक की आपस में जूतमपैजार है।

धरने में सृजनयोगी आदियोग, पिछड़ा महासभा के एहसानुल हक मलिक, शिवनारायण कुशवाहा, स्वराज अभियान के राजीव ध्यानी, फैजान मुसन्ना, अनमोल सिंह, यादव सेना के शिवकुमार यादव, सचेन्द्र यादव, जमीयतुल कुरैशी उत्तर प्रदेश के शकील कुरैशी, पसमांदा मुस्लिम महाज की नाहिद अकील, खालिद, अरविंद कुमार, जैद अहमद फारुकी, अहमद हसैन, डॉ. कमरुद्दीन कमर, शम्स तबरेज, कमर सीतापुरी, मुकेश गौतम, मो. आफाक, आइसा के शिवा राजवार, हमसफर से रुबीना, जैनब, आईयूएमएल के मो. अतीक, साझी दुनिया से अंकिता मिश्रा, ताजिम खान, राबिन वर्मा, एपीसीआर के नजमुस साकिब एडवोकेट, आसिफ अकरम खान, महेन्द्र प्रताप, नूर आलम, आल इंडिया वर्कर्स काउंसिल के ओपी सिन्हा, केके शुक्ला, वीरेन्द्र त्रिपाठी, ताबिस खान, मोहम्मद सरफराज, मो. उमर, तन्मय श्रीवास्तव, आशीष पासवान, प्रेम कुमार बहुजन, सीटू से आरएस बाजपेई, शाहरुख अहमद, इमरान अंसारी, वीरेन्द्र गुप्ता, अजय शर्मा, प्रबुद्ध गौतम, मलिक शाहबाज, गुफरान चौधरी, मोहम्मद नासिर, मो. कादिर, रिषभ रंजन, सतीश तिवारी, दिनेश, जगन्नाथ यादव, आनंद कुमार, चौधरी उदय प्रताप सिंह समेत अनेक लोग शामिल हुए।


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