Last Update On : 17 06 2018 07:39:07 PM

मंडी हाउस से संसद तक मार्च में उमड़े लोग, लोगों ने कहा बिल्कुल जायज मांग है केजरीवाल की, जनता की चुनी हुई सरकार को दिल्ली के उपराज्यपाल कैसे नहीं करने दे सकते हैं काम

आम आदमी पार्टी की सरकार के मुखिया अरविंद केजरीवाल के धरने को मिल चुका है चार राज्यों के मुख्यमंत्रियों का समर्थन, अब शिवसेना और तमिलनाडू से एआईडीएमके के नेता स्टालिन ने भी केजरीवाल की मांगों को ठहराया जायज, दिया समर्थन

जनज्वार। दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल के पीठ पीछे चाल चल रही बीजेपी को अंदाजा नहीं था कि एलजी बनाम केजरीवाल सरकार की टकहराहट चंद दिनों में सीधे दिल्ली की जनता बनाम प्रधानमंत्री मोदी की हो जाएगी।

आप के मंत्री गोपाल राय

पिछले 6 दिन से अपने सरकार के मंत्रियों के साथ एलजी आवास पर धरना दे रहे केजरीवाल को जिस तरह से धीरे—धीरे जनसमर्थन बढ़ रहा है, उससे न सिर्फ दिल्ली बीजेपी बल्कि केंद्र सरकार और उसके मंत्री परेशानी में पड़ गए हैं और भाजपा की हालत इस वक्त सांप—छुछुंदर का हो गया कि उसे न ​केजरीवाल की मांगों को मानते बन रहा है और मना करते।

गौरतलब है कि आज शाम 4 बजे आम आदमी पार्टी ने दिल्ली के मंडी हाउस संसद मार्ग तक ‘लोकतंत्र बचाओ’ प्रदर्शन का आह्वान किया था। पार्टी ने अपील की थी दिल्ली सरकार के समर्थन में जनता उतरे और भाजपा की सरकार को बताए कि जनता की चुनी हुई सरकार को कुछ चंद अधिकारियों के जरिए काम न करने देना, असल में लोकतंत्र की हत्या है।

आप के संयोजक केजरीवाल और दिल्ली कैबिनेट के तीन मंत्री छह दिनों से हड़ताल पर हैं। उनकी मांग है कि दिल्ली सरकार के आईएएस अपनी हड़ताल खत्म करें और एलजी घर—घर राशन पहुंचाने की योजना को मंजूरी दे।

हालांकि इस मामले में आईएएस अधिकारियों ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए दिल्ली सरकार पर पलटवार किया है। उनका कहना है कि वे हड़ताल पर नहीं हैं और पूरी ईमानदारी तथा समर्पण के साथ अपना काम कर रहे हैं, जबकि उन्हें राजनीतिक हित के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।

सीपीएम उतरी समर्थन में

खैर! इन सब हालातों के बीच केजरीवाल का धरना पक्ष बनाम विपक्ष का हो गया है। भाजपा के मुख्यमंत्रियों को छोड़ लगभग सभी दलों और उनके मुख्यमंत्रियों ने केजरीवाल के धरने का समर्थन किया है। इस समर्थन के बाद केजरीवाल की पार्टी का हौसला बढ़ा है और आज के प्रदर्शन की सफलता ने बता दिया है कि अब आप मोदी सरकार के खिलाफ सीधे तौर पर मोर्चा लेने के मूड में है।

अभी उभरी राजनीतिक स्थितियों को देखते हुए कहा ​जा सकता है कि आम आदमी पार्टी अब इस आंदोलन को एक सम्मानजनक मुकाम पर पहुंचाने से पहले रास्ते में नहीं छोड़ेगी।