सेक्सुअल हरासमेंट की शिकायत करने वाली 9 महिलाओं को आॅल इंडिया ने तब नौकरी ने निकाला है जबकि असिस्टेंट डायरेक्टर रत्नाकर भारती के खिलाफ हो चुकी है एफआईआर दर्ज, यही नहीं एआईआर की आंतरिक जांच कमेटी ने भी करीब एक साल पहले पाया है भारती को यौन शोषण का दोषी…

सुशील मानव की रिपोर्ट

जनज्वार। महिला समानता, स्त्री सशक्तीकरण, लैंगिक समानता जैसे दावों और नारों के बावजूद तमाम ऑफिसों, संस्थानों और कार्यस्थलों की कार्यसंस्कृति किस हद तक मर्दवादी है, इसका एक उदाहरण 31 अक्टूबर को एमपी के शहडोल स्थित ऑल इंडिया रेडियो (एआईआर) में देखने को मिला, जहां 9 महिलाकर्मियों को सिर्फ इसलिए बर्खास्त कर दिया गया क्योंकि सभी 9 महिलाओं ने बीते साल स्टेशन के असिस्टेंट डायरेक्टर (प्रोग्रामिंग) रत्नाकर भारती के खिलाफ यौन शोषण के आरोप लगाए थे।

न सिर्फ इस मामले में रत्नाकर भारती के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई, बल्कि एआईआर की आंतरिक जांच कमेटी ने भी करीब एक साल पहले उनको दोषी पाया। बावजूद इसके आरोपी रत्नाकर भारती अभी भी ऑल इंडिया रेडियो दिल्ली में कार्यरत हैं, जबकि पीड़ित नौ महिलाओं की सेवा ऑल इंडिया रेडियो से समाप्त कर दी गई है।

वहीं जब इसके बाबत ऑल इंडिया रेडियो के डीजी फैयाज शहरयार से पूछा गया तो उन्होंने पूरी बेशर्मी से तर्क दिया कि पूरे मामले की जांच आंतरिक कमेटी ने की और कार्रवाई हुई। उन्होंने कहा कि शहडोल में रत्नाकर भारती के खिलाफ शिकायत के बाद तुरंत ही उनका ट्रांसफर दिल्ली कर दिया गया, जबकि अभी भी वो कमेटी की सख्त निगरानी में हैं।

वहीं जब आरोप लगाने वाली महिलाओं को नौकरी से निकालने बारे में पूछा गया तो उन्होंने निर्लज्जता की सारे हदें फांदते हुए तर्क दिया कि जिन लोगों का काम कमजोर होता है, उनकी सेवाएं समाप्त कर दी जाती हैं, ये हमारा नियम है, इसे किसी और तरह से देखने का कोई मतलब नहीं है।

यानी ऑल इंडिया रेडियो के डीजी फैयाज शहरयार को एक यौन उत्पीड़न आरोपी पुरुष का काम मजबूत लगा और आरोप लगाने वाली सभी 9 महिलाओं का काम एक साथ कमजोर। इससे यह स्पष्ट हो जाता है कि काम में कमजोर होने के चलते नहीं बल्कि अपने मर्दवादी अहम और वासना को नकारकर उसे चैलेंज करने वाली 9 औरतों को सबक सिखाने के लिए नौकरी से निकाला है।

इसका सबूत है ऑल इंडिया रेडियों की कर्मचारी यूनियन द्वारा सभी छह स्टेशनों पर यौन शोषण के मामलों को गंभीरता से न लेने पर प्रसार भारती के चीफ एग्जिक्यूटिव को पत्र लिखकर रोष प्रकट करना।

ल इंडिया रेडियों की कर्मचारी यूनियन का कहना है कि धर्मशाला, ओबरा, सागर, रामपुर, कुरुक्षेत्र और दिल्ली समेत 6 स्टेशनों में हाल में हुए यौन शोषण के सभी मामलों में आरोपियों को चेतावनी देकर छोड़ दिया गया है, जबकि शिकायत करने वाली सभी महिलाओं को नौकरी छोड़ने को कहा गया।


जन पत्रकारिता को सहयोग दें / Support people journalism


Facebook Comment