Last Update On : 13 08 2018 09:35:31 AM

अंधविश्वास विरोधी मंच और दिल्ली सरकार मिलकर करेंगे स्कूलों—कॉलेजों में अंधविश्वास के खिलाफ कविता, कहानी और निबंध प्रतियोगिता का आयोजन, इस कड़ी में पहला कार्यक्रम 19 अगस्त को दिल्ली के कांस्टीट्यूशनल क्लब में….

जनज्वार। देशभर में जिस तरह से अंधविश्वास और टोना—टोटका का बोलबाला कायम है, वैसे में इस समाज को अंधविश्वास से मुक्त करने के लिए एक सशक्त जनआंदोलन की जरूरत है। इसी जरूरत को पूरा करने के लिए अंधविश्वास विरोधी मंच 19 अगस्त को ‘तर्कशीलता और वैज्ञानिकता के पक्ष’ में दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब के डिप्टी स्पीकर हॉल में गोष्ठी आयोजित कर रहा है।

अंधविश्वास विरोधी पहल को आगे बढ़ाते हुए आगामी दिनों में अंधविश्वास विरोधी मंच स्कूलों—कॉलेजों से लेकर मोहल्लों तक और सेमीनारों से लेकर सड़कों पर प्रदर्शन आयोजित करेगा। 19 अगस्त के कार्यक्रम के ठीक बाद अंधविश्वास विरोधी मंच और दिल्ली सरकार मिलकर स्कूलों—कॉलेजों में अंधविश्वास के खिलाफ कविता, कहानी और निबंध प्रतियोगिता करेंगे और एक विशाल मुशायरे का भी आयोजन होगा। इन दोनों कार्यक्रमों की सहमति दिल्ली सरकार से मिल गयी है।

दिल्ली के कान्स्टीट्यूशन क्लब में 19 अगस्त को शाम 3 बजे से ‘तर्कशीलता और वैज्ञानिकता के पक्ष’ विषय पर हो रही गोष्ठी में बतौर वक्ता प्रोफेसर मृदुला मुखर्जी, ज्ञान विज्ञान जत्था के प्रमुख डॉ. रघुनंदन, नरेंद्र दाभोलकर द्वारा स्थापित अंधश्रद्धा उन्मूलन समिति की ओर से अविनाश, वैज्ञानिक गौहर रजा, लेखक व प्रोफेसर अपूर्वानंद, वरिष्ठ लेखक प्रेमपाल शर्मा, लेखक सिद्धार्थ और पत्रकार अजय प्रकाश अंधविश्वास के विरोध में अपनी बात रखेंगे।

कार्यक्रम के संचालन की जिम्मेदारी जनस्वास्थ्य चिकित्सक एके अरुण संभालेंगे। इसके अलावा भी कुछ महत्वपूर्ण वक्ता कार्यक्रम में शरीक होंगे, जिसकी सूचना अगले कुछ दिनों में जनज्वार दे देगा। इसके बाद 23 अगस्त को अंधविश्वास विरोधी मंच द्वारा दिल्ली विश्वविद्यालय के शाहदरा स्थित श्यामलाल कॉलेज में छात्रों के बीच आयोजन किया जाएगा।

यह कार्यक्रम जनज्वार, युवा संवाद, इंसाफ/पीस और संभव प्रकाशन के सौजन्य से आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम के संयोजक प्रेमपाल शर्मा और सहसंयोजक राजीव रंजन हैं।

कार्यक्रम में अरविंद गौड़ के निर्देशन में संचालित ‘अस्मिता थिएटर’ की जननाट्य मंडली द्वारा अंधविश्वास के खिलाफ एक नाटक आयोजित किया जाएगा। उसके अलावा शम्सुल इस्लाम के निशांत ग्रुप द्वारा गीतों की प्रस्तुति की जाएगी।

गौरतलब है कि आज देश में आए दिन तांत्रिकों, बाबाओं के टोना-टोटकों द्वारा अपराधों के दर्जनों मामले रोज मीडिया में छाये रहते हैं। यों तथाकथित डिग्रीधारी, सफेदपोश भी धर्म, आस्था की आड़ में इन अंधविश्वासों के इतने ही शिकार है, मगर गरीब, वंचित समुदायों का तो आर्थिक सामाजिक शोषण हो रहा है। कारण- अंधविश्वास, अज्ञानता, जानकारी का अभाव।

हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई कोई भी धर्म, समुदाय इन बुराइयों से अछूता नहीं है। 21वीं सदी में दिल्ली जैसे शहर में इन कुकृत्यों की दास्तानों से सिर शर्म से झुक जाता है। दिल्ली में एक साथ ही परिवार के ग्यारह लोगों द्वारा आत्महत्यायें इसी अंधविश्वास का अंजाम थीं।

5 वर्ष पहले 20 अगस्त, 2013 को अंधविश्वास के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाले पूना के डॉक्टर नरेन्द्र दाभोलकर की अंधभक्तों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। तर्कशीलता के पक्ष में खड़े दाभोलकर के अलावा धर्म, जाति, संप्रदाय और अंधभक्ति फैलाकर समाज को बांटने वाले इन लोगों ने तर्कवादी डॉक्टर एमएम कलबुर्गी, गोविंद पानसरे और पत्रकार गौरी लंकेश की भी हत्या इसलिए कर दी क्योंंकि ये अंधविश्वास के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे थे।

आमजन में जागरुकता फैलाने के लिए अंधविश्वास विरोधी मंच ने यह पहल ली है, जिसमें अलग—अलग क्षेत्रों के एक्सपर्ट और वैज्ञानिक, पत्रकार, डॉक्टर, सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षाविद जुड़े हुए हैं।

मंच के आयोजक मंडल में पूर्व आईपीएस विकास नारायण राय, जनस्वास्थ्य से जुड़े ए.के.अरुण, पत्रकार पीयूष पंत, लेखक प्रेमपाल शर्मा, वैज्ञानिक सुरजीत, राजदूत अनूप मुद्गल, वैज्ञानिक पी.वी.एस.कुमार, उपन्यासकार संजीव, वैज्ञानिक सुबोध मोहंती, प्रोफेसर शम्सुल इस्लाम, संभव प्रकाशन से शिक्षक विक्रम प्रताप , पत्रकार अजय प्रकाश, लेखक सिद्धार्थ, राजीव रंजन, विष्णु शर्मा समेत कई अन्य लोग शामिल हैं।