Last Update On : 22 09 2018 04:52:02 PM
फाइल फोटो

जरूरी हो गया है कि देशभर में सरकारी संरक्षण में चल रहे अंधविश्वास के इस काले कारोबार का भंडाफोड़ व्यापक पैमाने पर करते हुये लोगों को वैज्ञानिक चेतना से लैस किया जाये…

रामनगर, जनज्वार। शिक्षा के लगातार बढ़ते प्रभाव के बाद भी समाज में बढ़ती जा रही कूपमंडूपता व अंधविश्वासों के खिलाफ अलख जगाकर समाज को जागरुक करने के प्रयास में जुटी महाराष्ट्र की ‘अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति’ का अगला पड़ाव उत्तराखण्ड राज्य होगा।

27 सितम्बर 2018, गुरुवार को अमर शहीद भगत सिंह के जन्मदिन के मौके पर समिति की ओर से उत्तराखण्ड के रामनगर शहर में ‘भगत सिंह एवं वैज्ञानिक चेतना’ विषय पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम के दौरान समिति समाज में फैली तमाम बुराईयों, तथाकथित जादू-टोने, चमत्कार आदि की पोल खोलते हुये उसकी आड़ में छिपे वैज्ञानिक पहलुओं को उजागर करेगी।

समाजवादी लोकमंच के तत्वाधान में होने वाली उत्तराखण्ड में इस प्रकार की अपने आप में अनूठी व पहली पहल के लिये महाराष्ट्र से आने वाली अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति की कल्याण शाखा के अध्यक्ष उत्तम जोगडंड तथा संगली अम्बरनाथ शाखा के जिला सचिव अमोल चैगले अपनी टीम के साथ बकायदा मंच पर सार्वजनिक प्रदर्शन करते हुये लोगो को शिक्षित व जागरुक करने का काम करेंगे।

संचार माध्यमो में आई क्रांति के दौर में जहां एक ओर यह माध्यम ‘गोबर से परमाणु बम बनाने के दावे’, ‘बत्तख से आॅक्सीजन पैदा करने’, ‘चुड़ैल का घर’, ‘स्वर्गलोक जाने वाली सीढ़ियां’, ‘बाबा के मंत्र से केंसर का ईलाज’ जैसी कुपमंडूपता परोसकर समाज को पीछे ले जाने का काम कर रहे तो दूसरी ओर इसके बरक्स दूसरी वैज्ञानिक धारा के कार्यक्रम के लिये आयोजको में भारी उत्साह है।

कार्यक्रम का आयोजन स्टेट बैंक के निकट पायतेवाली रामलीला के रंगमंच पर किया जायेगा। समाजवादी लोकमंच से जुड़े कैसर राणा का कहना है कि सत्ता चाहती है कि वैज्ञानिक तर्कों के अभाव में लोग अपने पुराने धार्मिक अंधविश्वास, दुराग्रह, कूपमंडूपता के कुएं में डूबे रहे, जिससे सत्ता के लिये जनता के रोटी-विकास की बातों का मुददा पीछे छोड़ने में आसानी हो।

केसर राणा कहते हैं, टीवी चैनल व संचार माध्यम भी जनता के बीच वैज्ञानिक चेतना का प्रचार-प्रसार करने की जगह धार्मिक अंधविश्वास के वाहक बने हुये हैं। विज्ञान व तकनीक के इस युग में भी लोग अपनी परेशानियों और बीमारियों का हल वैज्ञानिकता व उन्नत स्वास्थ्य सुविधाओं के बजाय ओझा, झाड़-फूक, जादू-टोने में तलाशने के लिये विवश हैं। ऐसे में जरूरी हो गया है कि देशभर में सरकारी संरक्षण में चल रहे अंधविश्वास के इस काले कारोबार का भंडाफोड़ व्यापक पैमाने पर करते हुये लोगों को वैज्ञानिक चेतना से लैस किया जाये।