Last Update On : 10 03 2018 08:54:00 PM

शिक्षक नेताओं को लिया हिरासत में तो कर दी सड़क जाम, कहा नहीं मानी हमारी मांगें तो हिंसक हो जाएगा आंदोलन

रांची, जनज्वार। झारखंड में अपनी मांगों को लेकर पारा शिक्षक सड़कों पर हैं। शिक्षकों ने सरकार को चेताया है कि अगर उनकी मांगों पर कान नहीं दिया गया तो बहुत जल्द झारखंड लालखंड में तब्दील हो जाएगा और इसके लिए राज्य की भाजपा सरकार जिम्मेदार होगी। एकीकृत पारा शिक्षक संघर्ष मोर्चा के बैनर तले आंदोलनरत शिक्षकों के नेताओं को पुलिस ने आज दिन में हिरासत में ले लिया है, जिसके विरोधस्वरूप नाराज शिक्षकों ने सड़क जाम कर दी।

गौरतलब है कि एकीकृत पारा शिक्षक संघर्ष मोर्चा के बैनर तले विधानसभा मैदान में प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों के मुताबिक झारखंड के बिहार से अलग होने के साथ ही पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के शासनकाल में उन्हें ग्राम शिक्षा समिति के जरिये पारा शिक्षक के तौर पर प्राथमिक आैर मिडिल स्कूलों में नियुक्ति दी गई थी। 16—17 साल का लंबा वक्त बीत जाने के बावजूद सरकार ने हम लोगों के हित में कोई कदम नहीं उठाया है।

आज हिरासत में लिए जाने से पहले पारा शिक्षकों के आंदोलन की अगुवाई कर रहे संजय दुबे, विनोद बिहारी महतो व अन्य शिक्षक नेताओं ने कहा कि पारा शिक्षक झारखंड के निवासी हैं। सभी को सम्मान के साथ जीने का संविधान ने हक दिया है। यदि राज्य सरकार ने हमारी मांगों को नहीं माना तो शांतिपूर्ण आंदोलन को हिंसक आंदोलन में भी तब्दील होते देर नहीं लगेगी।

शिक्षकों का कहना है कि राज्य में चाहे जिस भी दल की सरकार रही हो, सबने पारा शिक्षकों को परमानेंट करने का आश्वासन दिया। मगर राजनेताओं के लिए मात्र यह एक मुद्दा है, जिससे वे खेलते हैं। अगर पारा शिक्षकों को समान काम के बदले समान वेतन के लाभ के साथ सरकारी शिक्षकों की तरह अन्य तमाम सुविधाएं देकर नियमित कर दिया जायेगा, तो उनका एक राजनीतिक मुद्दा ही खत्म हो जायेगा। इसीलिए यहां की सरकारें नहीं चाहतीं कि पारा शिक्षकों को नियमित किया जाये।

शिक्षकों ने चेताया, अब हम राजनीतिक दलों के हाथ का खिलौना ज्यादा वक्त नहीं बनेंगे। यदि इस बार रघुवर दास सरकार ने हमारी मांगें नहीं मानीं तो यह साल आंदोलनों, संघर्षों और हिंसा का रहेगा, और अगर इस दौरान हिंसक घटनाएं हो गईं तो इसके लिए सरकार जिम्मेदार होगी।

गौरतलब है कि अपनी छह सूत्रीय मांगों के साथ झारखंड की शिक्षा मंत्री नीरा यादव का घेराव करने के लिए आज सुबह से सूबे के विभिन्न जिलों से हजारों की संख्या में पारा शिक्षक एकत्र हुए थे। शिक्षकों की भारी भीड़ को देखते हुए पैदल मार्च शुरू होने के पहले ही एकीकृत पारा शिक्षक संघर्ष समिति के चार प्रमुख नेताओं को पुलिस ने अपनी हिरासत में लिया। बाद में रांची के एसडीआे अंजलि यादव ने उन्हें वार्ता के नाम पर अपने पास बुलाया।

शिक्षक नेताओं ने आरोप लगाया है कि मैनेजमेंट आैर इवेंट वाली भाजपा सरकार पारा शिक्षकों की मांगों पर कोई ध्यान नहीं दे रही है। पारा शिक्षकों के आंदोलन की अगुवाई एकीकृत पारा शिक्षक संघर्ष मोर्चा के नेता संजय दुबे, विनोद बिहारी महतो, विक्रांत ज्योति, नारायण महतो, मनोज यादव, सुष्मिता देवी, उमाशंकर, आशुतोष कुमार सिंह, रवींद्र कुमार सिंह समेत कुछ अन्य लोग कर रहे हैं।

आंदोलन में हिस्सा लेने आए एक पारा शिक्षक ने कहा कि देश ही नहीं झारखंड में भी मैनेजमेंट आैर इवेंट वाली भाजपा सरकार सत्तासीन है, इसीलिए हमारी मांगों के प्रति सरकार का ध्यान नहीं जा रहा। एक मजदूर भी अगर दिनभर मजदूरी करता है, तो शाम को उसके हाथ में पैसा होता है। मगर एक पारा शिक्षक महीनेभर मजदूरों की तरह खटता है, स्कूली बच्चों को अपने बच्चों से भी अधिक स्नेह देता है, फिर भी उसे पांच महीने-छह महीने के बाद भी तनख्वाह नहीं मिल पाती।

शिक्षक नेताओं ने कहा कि झारखंड में सत्तासीन हर दल ने 60 हजार से अधिक पारा शिक्षकों को छलने आैर ठगने का काम किया है। पारा शिक्षकों को स्थायी करने के नाम पर देश में शिक्षा का अधिकार कानून लागू होने के बाद से सरकार की आेर से कर्इ तरह के ट्रेनिंग कार्यक्रम भी करवाये गये।

शिक्षकों ने मांग रखी कि सभी पारा शिक्षकों ने एलीमेंटरी ट्रेनिंग लेने के साथ डीएलएड, बीएड, शिक्षक पात्रता परीक्षा आैर केंद्रीय पात्रता परीक्षा दी है आैर उसमें सफलता हासिल की, मगर बीते 16-17 सालों से यहां के विभिन्न दलों की सरकारें उनके साथ में राजनीति करती आ रही है।

क्या हैं पारा शिक्षकों की मांगें
समान काम का समान वेतन मिले, यानी पारा शिक्षकों को भी सरकारी शिक्षकों के समान वेतन दिया जाये।
शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की परीक्षा पास कर चुके अभ्यर्थियों को शिक्षक के पद पर सीधे नियुक्त किया जाये।
टेट सर्टिफिकेट की अवधि का विस्तार किया जाये। अन्य राज्यों में टेट सर्टिफिकेट की वैधता की अवधि 7 साल है, जबकि झारखंड में सिर्फ 5 साल है।
स्कूलों के समायोजन की जो प्रक्रिया है उसे रोका जाये।
पारा शिक्षकों के लिए पारा शिक्षक कल्याण कोष का गठन किया जाये और पारा शिक्षकों को इपीएफ से जोड़ा जाये।
60 हजार पारा शिक्षकों को डीएलएड की ट्रेनिंग दी गयी है, अब इसकी फीस तय कर दी गयी है। पारा शिक्षकों की मांग है कि इस फीस को वापस लिया जाये और पहले की तरह मुफ्त में डीएलएड की ट्रेनिंग दी जाये।