Last Update On : 19 08 2018 10:41:32 AM

कल 3.30 बजे इमरजेंसी से न्यूरोलॉजी के इमरजेंसी में शिफ्ट किए गए बार—बार बेहोश हो रहे संजय सिंह को अभी तक नहीं आया है कोई डॉक्टर देखने, न ही अभी ​तक किया गया है किसी तरह का कोई टेस्ट, जबकि बांयी आंख से दिखाई देना हो गया है बंद और चेहरे—शरीर में सूजन बढ़ रही है लगातार

जनज्वार। मॉब लिंचिंग का हालिया शिकार मोतिहारी स्थित महात्मा गांधी सेंट्रल यूनिवर्सिटी में सोशलॉजी विभाग में अस्सिटेंट प्रोफेसर संजय कुमार की हालत लगातार खराब होती जा रही है, बांयी आंख से दिखना बंद हो गया है। लगातार बेहोश हो रहे हैं, शरीर और चेहरे की सूजन बढ़ रही है। मगर शासन—प्रशासन के दबाव में डॉक्टर उनकी अनदेखी कर रहे हैं।

डॉक्टरों का उनके प्रति लापरवाहीपूर्ण रवैये और लगातार खराब होती हालत को देख पीड़ित संजय कुमार के परिजन और साथी उन्हें दिल्ली एम्स रेफर करने का निवेदन कर रहे हैं, मगर उन्हें पटना मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल से दिल्ली एम्स रेफर करने के लिए आनाकानी की जा रही है और तरह—तरह के बहाने बनाए जा रहे हैं कि मरीज एकदम ठीक है, कि हर मॉब अटैक के बाद मरीज की ऐसी हालत हो जाती है।

न्यूरोलॉजी विभाग के एमरजेंसी में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे प्रोफेसर संजय कुमार की इतनी क्रिटिकल हालत के बावजूद डॉक्टर किस हद तक लापरवाह बने हुए हैं इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्हें कल 3.30 बजे इमरजेंसी से न्यूरोलॉजी के इमरजेंसी में शिफ्ट किया गया है, मगर उसके बाद से अभी तक कोई डॉक्टर उन्हें देखने नहीं आया।

अभी तक डॉक्टरों द्वारा उनका न तो कोई टेस्ट किया गया है और न ही उनकी जान बचाने के लिए किसी तरह की कोई तत्परता दिखाई दे रही है। जब वहां मौजूद संजय कुमार के परिजन और साथी शिक्षक निवेदन कर रहे हैं कि कृपया उन्हें देखें ये बार—बार बेहोश हो रहे हैं, बांयी आंख से दिखना बंद हो गया है, शरीर की सूजन और चेहरे की सूजन लगातार बढ़ रही है तो डॉक्टर सहमते—सहमते सफाई में कह रहे हैं कि ये मॉब अटैक के बाद के मामूली सिमटम हैं। घबराइये मत।

संजय सिंह के साथी शिक्षकों का कहना है कि डॉक्टरों के रवैये से ऐसा लग रहा है कि वो शासन—प्रशासन के दबाव में काम कर रहे हैं, इसीलिए इतने सीरियस मरीज को अनदेखा किया जा रहा है। साथी शिक्षकों कह रहे हैं हमें डर है कि डॉक्टरों और शासन—प्रशासन की इस हद तक लापरवाही से कहीं हम अपने साथी प्रोफेसर को खो न दें।

गौरतलब है कि इस मामले में पुलिस सिर्फ मॉब अटैक के नाम पर ही कार्रवाई कर रही है। नामजद रिपोर्ट दर्ज करवाने के बावजूद न तो महात्मा गांधी सेंट्रल यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर अरविंद अग्रवाल, राहुल आर पांडेय, पत्रकार संजय कुमार सिंह, अमन बिहार वाजपेयी, सन्नी मिश्रा, पुरुषोत्तम मिश्रा, मीडियाकर्मी ज्ञानेश्वर गौतम, डीन पवनेश कुमार, दिनेश व्यास, सहायक प्राध्यापक जितेंद्र गिरी, संजय कुमार, समाजशास्त्र विभाग के राकेश पांडेय के खिलाफ किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

संजय सिंह की हत्या करने के इरादे से 17 अगस्त को 25—30 लोगों का झुंड दिन में तकरीबन 12.30 बजे उन्हें उनके घर से मारते—मारते ले गया। उन्हें इतना मारा गया कि उनके शरीर पर अंडरवियर—बनियान भी नहीं बची। उनके गुप्तांग पर चोट पहुंचाई गई। इतने से भी मन न भरा तो पेट्रोल छिड़कर आग लगाने की कोशिश की गई। समय पर कुछ लोगों ने संजय कुमार को नहीं बचाया होता तो वो तभी अपनी जान से हाथ धो बैठे होते।

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संजय कुमार के साथी शिक्षक जो कि एसोसिएशन से जुड़े हैं, बताते हैं यहां की शिक्षक एसोसिएशन बहुत दिनों से हड़ताल पर थी वाइस चांसलर अरविंद अग्रवाल के खिलाफ, क्योंकि उनके राज में यहां भ्रष्टाचार बुरी तरह व्याप्त है। यहां रोज शिक्षकों को प्रताड़ित किया जाता है, उनसे जबरन रेजिग्नेशनल लिखवाया जाता है, जिसका हम लोग विरोध कर रहे थे।

इस हमले की कड़ी भी वहीं से जुड़ी है। वाइस चांसलर अरविंद अग्रवाल ने यहां के कुछ गुंडा—आपराधिक तत्वों को पैसा खिलाकर शिक्षकों के खिलाफ किया है। ये गुंडा तत्व एक मौके की तलाश में थे कि कैसे हम लोगों को निशाना बनाएं और फेसबुक पर की गई असिस्टेंट संजय कुमार की टिप्पणी से उन्हें यह मौका मिल गया। यहां के डीन पवनेश कुमार ने भी संजय कुमार को धमकी दी थी, अन्य शिक्षकों को भी धमकाया था।

संजय कुमार के साथी शिक्षक साफ—साफ कह रहे हैं कि वाइस चांसलर, डीन और कुछ अन्य ताकतवर लोगों को बचाने के लिए संजय कुमार को मौत के मुंह में धकेला जा रहा है उन्हें ठीक से इलाज मुहैया नहीं कराया जा रहा, न ही दिल्ली एम्स रेफर किया जा रहा है।