हर साल सावन में करोड़ों लोगों के लिए धर्म और आस्था का स्थान बनने वाले बैजनाथ मंदिर की सांस्कृतिक विरासत बहुत दिलचस्प भी है और सांस्कृतिक विराटता का अप्रतिम उदाहरण भी…

जनज्वार, देवघर। हिंदुओं के सबसे प्रसिद्ध धर्मस्थलों में से एक झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैजनाथ के मंदिर से जुड़ी कथा भारतीय समाज के बहुलतावाद का बहुत ही खूबसूरत उदाहरण है। खासकर ऐसे में समय में जब सरकार और उसकी पोषित संस्थाओं द्वारा बहुत ही तैयारी के साथ संप्रदायों में नफरत फैलाने की साजिश जारी है।

सांप्रदायिक नफरत के इस दौर में हिंदू—मुस्लिम साझी संस्कृति का मिसाल है झारखंड के देवघर का वैजनाथ मंदिर। देवघर में बोलबम यानी शिव का विश्वप्रसिद्ध मंदिर है, जहां सावन के महीने में करोड़ों की संख्या में हिंदू श्रद्धालु आते हैं। पर कम लोग जानते हैं कि बाबा को जो पहला फूल चढ़ता है, वह आज भी एक मुस्लिम यानी हलीम साहब के यहां से आता है।

देवघर के पंडा लोग बताते हैं कि एक समय में बैजनाथ बाबा और हलीम सा​हब एक साथ चेस खेलते थे। आइए अजय प्रकाश के संग देवघर के पंडा अशोक तिवारी से ही जानते हैं इस साझी विरासत की अनसुनी कहानी।


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