तब एक लड़की का बलात्कार किया होगा डेरा सच्चा सौदा के मुखिया ने, लेकिन आज पूरे देश का जांघिया निकाल टांग दिया उसने अपनी गुंडई के आंगन में, और सरकार हाथ जोड़े नंगी खड़ी है उसकी दरबानी में 

सरकार कांप रही थर—थर और पेशानी पर बल पड़ा प्रशासन के, जो सरकार एक गुंडे से इस कदर खौफजदा है वह महिलाओं की रक्षा क्या करेगी 

जनज्वार, हरियाणा। बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ का नेतृत्व करने वाली केंद्र की भाजपा सरकार के शासन में तीन राज्यों हरियाणा, पंजाब और हिमाचल की पुलिस एक बलात्कारी के खौफ से हलकान है और प्रशासन अनहोनी की आशंका से भरा हुआ है।

15 साल पहले हरियाणा के सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा के मालिक गुरमीत सिंह उर्फ राम रहीम के खिलाफ उन्हीं की भक्त एक साध्वी ने पीएम कार्यलय को पत्र लिखकर हलफनामे में खुद और दूसरी साध्वियों के साथ यौन शोषण का आरोप लगाया। वर्ष 2001 में जांच सीबीआई को सौंपी गई। सीबीआई ने रिपोर्ट विशेष अदालत पंचकूला को सौंप दी, दोंनो पक्षों की गवाहियों के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा, जिसकी सुनवाई 25 अगस्त को होगी।

ऐसे में सवाल है कि क्या यह देश की शासन व्यवस्था के लिए डूब मरने का दिन नहीं है, जब देश और दुनिया में यह प्रचारित हो रहा है कि दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र एक बलात्कारी बाबा से सहमा हुआ है, उसके गुंडे तय कर रहे हैं कि 25 अगस्त को बलात्कार के आरोपी बाबा राम—रहीम की पेशी होगी कि नहीं। वे कह रहे हैं कि सरकार नहीं हम तय करेंगे कि पेशी पर राम—रहीम जाएंगे या उनकी अनुपस्थिति में अदालत फैसला सुनाएगी।

एक आम व्यक्ति,कर्मचारी, मजदूर, किसान,छात्र संघर्ष अदालत के फैसले पर सवालिया निशान खड़ा करता है तो उसे अदालत के अवमानना, संविधान के अनादर के तौर पर देखा जाता है। पर यहां उल्टा हो रहा है।

संत की दंगा प्रयोजित अंधभक्तों की भीड़ ने साफ-साफ चेतावनी दे रखी है कि अगर उनके हक में फैसला आया तो ठीक विरोध में आया तो परिणाम भुगतने का तैयार रहें। वे ललकारते हुए कह रहे हैं कि वो खून देना जानते हैं और खुन निचोडऩा भी।

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर को बाबा राम रहीम के मालिकाने वाले डेरा सच्चा सौदा के प्रवक्ता डॉ.आदित्य इंसा नसीहत देते हैं कि खट्टर गलत बयानबाजी नहीं करें। डेरा बाबा पेशी पर जाएंगे या नहीं यह वक्त बताएगा। एक संत की गुण्डई के आगे शासन प्रशासन शांति की अपील करते हुए घुटने टेके दीन-हीन स्थिती में नजर आता है। डेरा प्रमुख लगातार विवादों में रहे है।

शोले के गब्बर से भी बड़ा गुंडा 
हरियाणा में सुरक्षा बलों की 53 व पंजाब में 75 कंपनियां तैनात। पंचकूला में 30 कंपनी पैरामिलिट्री और 18 कंपनी पुलिस फोर्स तैनात है(एक कंपनी में करीब 110 जवान होते है)सीएम हरियाणा ने राजनाथ सिंह को पत्र लिख कर मांगी अतिरिक्त फोर्स। हरियाणा, पंजाब, हिमाचल व चण्डीगढ से पंचकुला जाने वाले रास्ते सील बसे भी बन्द। 25 को प्रदेश के सभ्भी शिक्षण संस्थानों में अवकाश घोषित। हरियाणा गृह सचिव रामनिवास ने कहा जरूरत पडने पर सेना की मदद भी ली जाएगी। हरियाणा पंजाब के बाद हिमाचल में भी अर्लट जारी। सभी विधायकों मंत्रीयों से दो दिन अपने हलकों में रहने के निर्देश डेरा प्रेमियों से करेगे शांति की अपील।

भय के साए में पंचकुला
वकील रविन्द्र सिंह ढूल ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की जिसमें कहा गया है कि पंचकुला व आसपास के लोग भय के साये में जी रहे हैं। धारा 144 के बाद भी भारी संख्या में समर्थक जुट रहे हैं, जिससे साफ है फैसला आने के बाद अनहोनी हो सकती है।

डेरा समर्थकों को यहां से मिल रहा हौसला
विधानसभा चुनावों में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह खुद डेरा प्रमुख से मिलने डेरा सिरसा पहुंचे थे, जिसके बाद डेरा ने खुला समर्थन दिया था और डेरा समर्थकों का दावा रहा कि हरियाणा की जीत में उनका अहम रोल है। स्थानीय विधायक डेरा नाम चर्चा घरों में हाजिरी भी लगाते रहे है।

संत गुरमीत सिंह उर्फ राम रहीम की क्राइम रिपोर्ट कार्ड

रणजीत सिंह हत्याकांड- यह मामला भी साध्वियों के यौन शोषण से जुड़ा बताया जाता है। रणजीत सिंह डेरा की प्रबंधन समिति का सदस्य था, जिसकी वजह से डेरामुखी के करीब होने से सारी गतिविधियों से वाकिफ था। लेकिन 10 जुलाई 2003 को उसकी हत्या कर दी गई। यह मामला भी अदालत में विचारधीन है।

पत्रकार रामचन्द्र छत्रपति हत्याकांड-सिरसा जहां कि डेरा मुख्यालय है वहीं से समाचार पत्र ‘पूरा सच’ के पत्रकार रामचन्द छत्रपति ने डेरा सच्चा सौदा से जुड़ी खबरें प्रकाशित कीं। उन्होनें ही साध्वी यौन शोषण और रणजीत सिंह हत्याकाण्ड का खुलासा किया। डेरा के दो शूटरों ने 24 अक्टूबर 2002 को रामचंद छत्रपति को पांच गोलियां मारीं, जिसमें एक शूटर मौके पर पकड़ा गया और एक को बाद में गिरफ्तार किया गया। छत्रपति ने 21नवंबर 2002 को दम तोड़ दिया। उनके बेटे अंशुल छत्रपति की लंबी लड़ाई के बाद केस सीबीआई को सौंपा गया। इस मामले में डेरामुखी को आरोपी बनाया हुआ है।

फकीर चन्द गुमशुदगी मामला- वर्ष 2010 में पूर्व साधू रामकुमार बिशनोई ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर पूर्व मैनेजर फकीर चंद की गुमशुदगी की सीबीआई जांच की मांग की थी। आरोप इसमें भी डेरा मुखी पर रहा कि डेरा प्रमुख के आदेश पर फकीर चन्द की हत्या कर दी गई है। सीबीआई सुबूत नहीं जुटा पाई और क्लोजर रिपोर्ट फाईल कर दी बिशनोई ने हाईकोर्ट में उस रिपोर्ट को चुनौती दे रखी है।

400 साधुओं को नपुंकस बनाया जाना- जिला फतेहाबाद टोहाना शहर का हंसराज चौहान जो किशोर अवस्था में डेरा साधु बन गया था ने 17 जुलाई 2012 को हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि डेरा प्रमुख के इशारे पर साधुओं को नपुंसक बनाया जाता है। इस तरह के 400 साधु हैं, 166 का नाम समेत ब्यौरा दिया। हंसराज ने यह भी खुलासा किया कि पत्रकार छत्रपति हत्याकाण्ड में आरोपी निर्मल और कुलदीप भी नपुंसक साधु हैं। जेल में बन्द साधुओं ने स्वीकार भी किया कि वो नपुंसक है। यह मामला भी विचाराधीन है।

गुरू गोबिन्द सिंह लिबास सिखों से विवाद- वर्ष 2007 में डेरा प्रमुख ने पंजाब में गुरू गोबिन्द सिंह जैसी वेशभूषा धारण कर फोटो खिख्ंचवाए जिसके विरोध में 13 मई 2007 को सिखों ने डेरा प्रमुख का पुतला जलाया व सिख व डेरा प्रेमी विवाद भी हुआ। इस मामले में डेरा बाबा बरी हो गए।