सीबीआई अदालत ने राम रहीम को बलात्कार का दोषी करार दिया। डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह दोषी करार दिये जाने के बाद कोर्ट ने सजा सुरक्षित कर ली है। सजा 28 अगस्त को सुनाई जाएगी। जेल भेजने से पहले पुलिस राम रहीम का मेडिकल जांच कराएगी। राम रहीम पहले ही पीठ के दर्द का बहाना बनाते रहे हैं।

जानकारी के मुताबिक राम रहीम को अदालत सीधे अंबाला सेंट्रल जेल भेजेगी। हालांकि एक जानकारी यह भी है कि सेना के अस्थाई जेल में भी उन्हें एहतियातन रखा जा सकता है। पुलिस ने राम रहीम को गिरफ्तार कर लिया है। राम रहीम अब पुलिस के कब्जे में हैं।  

राम रहीम को सजा बलात्कार की धारा 376 के तहत सजा हुई है।  

वही दूसरी तरफ राम रहीम के समर्थकों ने गुंडागर्दी शुरू कर दी है। कई टीवी चैनलों के ओवी वैन पर हमला हुआ है। कई गाड़ियों को फूंके जाने की खबर है। मीडिया की कई गाड़ियों पर राम रहीम के भक्तों ने हमला किया है। पुलिस ने भी आंसू गैस के गोले छोड़ने शुरू कर दिए हैं और लाठी चार्ज शुरू कर दिया है। 

ऐसे में पुलिस और शासन व्यवस्था के लिए मुख्य चुनौती यह है कि हजारों की संख्या में जुटे राम रहीम के भक्तों को शांतिपूर्वक उनके घरों को कैसे लौटाया जाए। सिरसा, अंबाला और पंचकुला में डेरा डाले बैठे भक्तों में बड़ी संख्या महिलाओं और बच्चों की भी है। पंजाब राज्य में भी भक्तों द्वारा अराजकता फैलाने का संदेह है। 

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15 साल पुराने बलात्कार के मामले में सजा सुनाते हुए सीबीआई की विशेष अदालत ने राम रहीम को बलात्कार का दोषी माना है। 15 साल पहले 2001 में मामला उस समय प्रकाश में आया था जब राम रहीम के आश्रम की दो साध्वियों ने सुप्रीम कोर्ट में चिट्ठी लिखकर बलात्कार की शिकायत की थी। 

2001 में हरियाणा के सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा के मालिक गुरमीत सिंह उर्फ राम रहीम के खिलाफ उन्हीं की भक्त एक साध्वी ने पीएम कार्यलय को पत्र लिखकर हलफनामे में खुद और दूसरी साध्वियों के साथ यौन शोषण का आरोप लगाया। वर्ष 2001 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जांच सीबीआई को सौंपी गई। सीबीआई ने रिपोर्ट विशेष अदालत पंचकूला को सौंप दी, दोंनो पक्षों की गवाहियों के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा, जिसकी सुनवाई 25 अगस्त को होगी।

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संत गुरमीत सिंह उर्फ राम रहीम की इन मामलों में सजा होना बाकि 

रणजीत सिंह हत्याकांड- यह मामला भी साध्वियों के यौन शोषण से जुड़ा बताया जाता है। रणजीत सिंह डेरा की प्रबंधन समिति का सदस्य था, जिसकी वजह से डेरामुखी के करीब होने से सारी गतिविधियों से वाकिफ था। लेकिन 10 जुलाई 2003 को उसकी हत्या कर दी गई। यह मामला भी अदालत में विचारधीन है।

पत्रकार रामचन्द्र छत्रपति हत्याकांड-सिरसा जहां कि डेरा मुख्यालय है वहीं से समाचार पत्र ‘पूरा सच’ के पत्रकार रामचन्द छत्रपति ने डेरा सच्चा सौदा से जुड़ी खबरें प्रकाशित कीं। उन्होनें ही साध्वी यौन शोषण और रणजीत सिंह हत्याकाण्ड का खुलासा किया। डेरा के दो शूटरों ने 24 अक्टूबर 2002 को रामचंद छत्रपति को पांच गोलियां मारीं, जिसमें एक शूटर मौके पर पकड़ा गया और एक को बाद में गिरफ्तार किया गया। छत्रपति ने 21नवंबर 2002 को दम तोड़ दिया। उनके बेटे अंशुल छत्रपति की लंबी लड़ाई के बाद केस सीबीआई को सौंपा गया। इस मामले में डेरामुखी को आरोपी बनाया हुआ है।

फकीर चन्द गुमशुदगी मामला- वर्ष 2010 में पूर्व साधू रामकुमार बिशनोई ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर पूर्व मैनेजर फकीर चंद की गुमशुदगी की सीबीआई जांच की मांग की थी। आरोप इसमें भी डेरा मुखी पर रहा कि डेरा प्रमुख के आदेश पर फकीर चन्द की हत्या कर दी गई है। सीबीआई सुबूत नहीं जुटा पाई और क्लोजर रिपोर्ट फाईल कर दी बिशनोई ने हाईकोर्ट में उस रिपोर्ट को चुनौती दे रखी है।

400 साधुओं को नपुंकस बनाया जाना- जिला फतेहाबाद टोहाना शहर का हंसराज चौहान जो किशोर अवस्था में डेरा साधु बन गया था ने 17 जुलाई 2012 को हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि डेरा प्रमुख के इशारे पर साधुओं को नपुंसक बनाया जाता है। इस तरह के 400 साधु हैं, 166 का नाम समेत ब्यौरा दिया। हंसराज ने यह भी खुलासा किया कि पत्रकार छत्रपति हत्याकाण्ड में आरोपी निर्मल और कुलदीप भी नपुंसक साधु हैं। जेल में बन्द साधुओं ने स्वीकार भी किया कि वो नपुंसक है। यह मामला भी विचाराधीन है।

गुरू गोबिन्द सिंह लिबास सिखों से विवाद- वर्ष 2007 में डेरा प्रमुख ने पंजाब में गुरू गोबिन्द सिंह जैसी वेशभूषा धारण कर फोटो खिख्ंचवाए जिसके विरोध में 13 मई 2007 को सिखों ने डेरा प्रमुख का पुतला जलाया व सिख व डेरा प्रेमी विवाद भी हुआ। इस मामले में डेरा बाबा बरी हो गए।