मुक्त हुए बाल एवं बंधुआ मजदूरों में से 47 हरियाणा के फतेहाबाद जनपद के ईंट भट्टे से मुक्त कराए गए तो 10 को उत्तर प्रदेश के रायबरेली स्थित ईंट भट्टे से कराया गया मुक्त

ईंट भट्टा मालिकान ने बंधुआ मजदूरों के साथ दिखाया अमानवीयता का चरम, एक जगह ट्रैक्टर से रौंद दिया मजदूर को तो दूसरी जगह इलाज के अभाव में मजदूर की मौत

जनज्वार। बुंदेलखण्ड में कई वर्षों से भयंकर सूखे और अकाल के कारण हजारों दलित और आदिवासी परिवार अपने घरों में ताला लगा रोजी-रोटी के लिए पलायन कर चुके हैं। मानव तस्करों की गिद्ध दृष्टि इन भूख से तड़पते परिवारों को तलाशती रहती है और कई राज्यों में ईंट-भट्ठों से लेकर मुर्गी फार्म, कृषि फार्म, खेतिहर कार्य, भवन निर्माण के कार्यों में बंधुआ मजदूर बनाकर रख देती है। निरंतर बढ़ती जा रही बंधुआ मजदूरी केन्द्र एवं प्रदेश सरकारों के गरीब विरोधी उदासीन वातावरण के कारण है।

यही हाल उत्तर प्रदेश का भी, जहां सरकार गरीबों के प्रति उदासीन बनी रहती है। शासन-प्रशासन की लापरवाही का ही नतीजा है कि रोजगार के अभाव में बहुत मामूली मजदूरी पर इन्हें प्रवासी बनकर अन्य राज्यों में पलायन होने को मजबूर होना पड़ रहा है। राज्य सरकार इन मजदूर नागरिकों की सुख-सुविधा का कोई खयाल नहीं रखती, जिस कारण यहां के हजारों दलित, आदिवासी और अन्य पिछड़ी जातियों के लोग अन्य प्रदेशों में अपने बीबी—बच्चों के साथ पलायन को मजबूर हैं।

ऐसे ही बंधुआ मजदूरों को मुक्त करवाने का काम कर रहा है बंधुआ मुक्ति मोर्चा। एक प्रेस कांफ्रेंस में पत्रकारों से बंधुआ मजदूरों को मु​क्त कराने के अनुभव साझा करते हुए बंधुआ मुक्ति मोर्चा से जुड़े कार्यकर्ताओं ने बताया कि हमारे रेसक्यू अभियान ख्यात सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश के नेतृत्व में बंधुआ मज़दूरों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे मुक्ति अभियान का हिस्सा है।

16 मार्च, 2019 को उत्तर प्रदेश बंधुआ मुक्ति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष दलसिंगार के समक्ष ईंट-भट्ठा में कार्यरत मज़दूरों के परिवार वालों ने लिखित शिकायत दर्ज कराई कि पिछले कई महीने से जिला फतेहाबाद के ग्राम नेहला, जेबीटी ईंट-भट्ठा में चित्रकूट, बांदा उप्र के 47 बाल एवं बंधुआ मजदूरों से जबरिया ईंट पथाई का कार्य कराया जा रहा है।

जब मज़दूरों ने जबरदस्ती काम करने से मना किया तो ईंट भट्ठा मालिक नितेश ने एक मज़दूर के ऊपर ट्रैक्टर चढ़ा दिया, जिसके कारण मज़दूर के दोनों पैर ट्रैक्टर के नीचे आकर फ्रैक्चर हो गए। मजदूर के दोनों पैर फ्रैक्चर करने के बाद भट्टा मालिक ने धमकी दी कि किसी को नहीं बताना कि तुम्हारा पैर ट्रैक्टर से फ्रैक्चर हुआ है। अगर किसी को बताओगे तो उल्टा तुम सभी को फंसा दूंगा, जिसके कारण सभी मज़दूर भयभीत हो गये। शिकायतकर्ताओं ने बंधुआ मुक्ति मोर्चा से आग्रह किया कि किसी तरह हमारे सभी बच्चों को वहां से बचा लीजिये।

शिकायत के बाद बंधुआ मुक्ति मोर्चा ने 16 मार्च को दिन में लगभग 1 बजे जिला उपायुक्त फतेहाबाद को पत्र लिखकर बंधुआ मजदूरी प्रथा (उन्मूलन) अधिनियम 1976, इंटर स्टेट माईग्रेट वर्क्समैन एक्ट, 1979 एवं किशोर न्याय अधिनियम 2002-2006, अनुसूचित जाति (अत्याचार निरोधक) अधिनियम, 1989 के संदर्भ कानूनी कार्यवाही करने के लिए ईमेल कर उपायुक्त फतेहाबाद, हरियाणा से फोन पर बातचीत कर तत्काल कार्यवाही करने मांग की।

शिकायत मिलने के तुरन्त बाद हरियाणा के फतेहाबाद उपायुक्त धीरेन्द्र खडगटा ने फतेहाबाद एसडीएम सुरजीत सिंह नैन व अन्य सम्बंधित अधिकारियों को निर्देश दिया, जिसके बाद नेहला गांव के जेबीटी ईंट-भट्ठा से 47 बाल एवं बंधुआ मजदूरों मुक्त कराया गया। उस दिन काफी रात होने की वजह से सभी मज़दूरों को फतेहाबाद में रुकने की व्यवस्था कराई और अगले दिन 17 मार्च को बिना मुक्ति प्रमाण पत्र दिये सभी मज़दूरों को जबरन ठेला गाड़ी में बैठाकर बांदा चित्रकूट के लिए भेज दिया। सभी बंधुआ मज़दूर आज 18 मार्च, 2019 को चित्रकूट और बांदा में लगभग 2 बजे अपने घर पहुंचे हैं।

इस संदर्भ में बंधुआ मुक्ति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष ने मज़दूरों को मुक्ति पत्र देने के विषय में अधिकारियों से फोन पर बात की तो एसडीएम फतेहाबाद ने कहा कि जब ऊपर से आदेश आयेगा, तभी मुक्ति प्रमाण पत्र दिया जायेगा। अब सवाल यह कि क्या उक्त अधिकारियों को पता नहीं है कि बंधुआ मजदूरी अधिनियम 1976 क्या है? अगर पता है तो मुक्ति प्रमाण पत्र क्यों नहीं दिया गया? अगर नहीं पता है तो क्यों नहीं?

अधिकारियों की लापरवाही के कारण हजारों हजार गरीब दलित आदिवासियों का शोषण होता है। इसके जिम्मेवार केन्द्र और राज्य में बैठी सत्तारूढ़ पार्टियां हैं।

हरियाणा के फतेहाबाद से मुक्त कराए गए 47 मज़दूरों में चित्रकूट के ग्राम बगलई के राजाराम, शोभा, सुधा, मुन्नीलाल, राजाबाई, हरिश्चंद्र, रत्ती, कमला, मनीषा, मनोज, पूनम, नरेश, प्रेमलता, नरेन्द्र, फूलचंद्र, आशा, रिंकी, पिंकी, प्रिती, आशू, ग्राम भैंसौंधा के रामरहीम, हीरामनी, पूनम, चुनकावन, श्रवण, रामनारायण, चुनकी, विकाश, अवधेश, संतोशिया, अजय, मनधीर, राजू, गीता, पवन, शालनी, मोनका और बांदा जिला के ग्राम पचोखर के सुमेर, राजेश, चंदा, राधा, रूची, संजय, राकेश, सुमन, कंचन, धर्मेंद्र समेत कुछ अन्य लोग शामिल हैं।

वहीं उत्तर प्रदेश के ही रायबरेली की लालगंज तहसील के गांव चुमतहर के आरजीएफ ईंट-भट्टे पर बांदा जिले के 10 बाल एवं बंधुआ मज़दूरों से भी जबरन ईंट पथाई का कार्य कराया जा रहा था। 16 जनवरी, 2019 को बंधुआ मुक्ति मोर्चा के पास इसकी शिकायत आई। इस शिकायत की जांच करने पर सामने आया कि ईंट भट्टे पर एक मजदूर की तबीयत खराब हुई और समय पर मालिक द्वारा इलाज कराने के लिए पैसे नहीं दिये गये, जिसके कारण एक मज़दूर की तबीयत काफी खराब होने के बाद मौत हो गई। इन मज़दूरों को भी न मुक्ति प्रमाण पत्र मिला और न मृतक के परिजनों को मुआवजा।

रायबरेली से मुक्त हुए 10 मज़दूरों में बांदा जिला के ग्राम पून के मृतक शिवबाबू, रंची, रोशनी, शोभा, ओमप्रकाश, गौरा, सविता, कविता, रेखा, मंजू और कुछ अन्य लोग शामिल हैं।

बंधुआ मुक्ति मोर्चा ने उत्तर प्रदेश सरकार और जिलाधिकारी से मांग की है कि व​​ह नैतिकता के तहत इन नागरिकों को सम्मानपूर्वक जिन्दगी जीने की सुरक्षा और अवसर प्रदान करे। इन्हें जो संवैधानिक अधिकार मिले हुए हैं उन तमाम कानूनों का पालन किया जाए, जिससे बंधुआ मजदूरी प्रथा (उन्मूलन) अधिनियम 1976, अनुसूचित जाति (अत्याचार निरोधक) अधिनियम 1989, इन्टर माईग्रेंट वर्क्समैन एक्ट 1979 की धारा 370 (भारतीय दण्ड संहिता), न्यूनतम मज़दूरी अधिनियम 1948 एवं किशोर न्याय अधिनियम 2000-2006 का खुला उल्लंघन न हो सके।


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