Last Update On : 10 08 2017 08:00:00 AM

भारत में सबसे ज्यादा पसंद की जाने वाली मछली हिल्सा को बंग्लादेश ने कराया पेटेंट, बंग्लादेश में मिलती है सबसे ज्यादा हिल्सा 

भारत में मछली खाने के लिए प्रसिद्ध बंगाली समुदाय जिस मछली को सबसे चाव से खाता है वह है हिल्सा। भोजन विशेषज्ञों और स्वाद के जानकारों का मानना है मछली में हिल्सा जैसा स्वाद इन इलाकों में पाई जाने वाली किसी दूसरी मछली में नहीं है।

यही वजह है कि हिल्सा, रोहू या दूसरी मछलियों से कई गुना अधिक कीमत पर मिलती है। आम घरों में हिल्सा तब बनती है जब कोई मेहमान आता है। पर इस मछली को अब बंग्लादेश ने पेटेंट करा लिया है।

हिल्सा मछली बंग्लादेश में 75 फीसद, म्यांमार में 15 और भारत में सबसे कम 5 फीसद पाई जाती है।

डिपार्टमेंट आॅफ पेटेंट्स, डिजाइंस एंड ट्रेड मार्क (डीपीडीटी) एक ऐसा विभाग है जो दुनिया भर में पेटेंट का काम करता है। उसी ने सभी मानकों को देखते हुए हिल्सा को बंग्लादेश की मछली के रूप में पेटेंट अधिकार दिया है। इस विभाग ने 1 जून को हिल्सा का रजिस्टर्ड किया और रजिस्ट्रेशन कंफर्म करने के लिए नियमत: 2 महीने तक पेटेंट के लिए किसी तरह का ऐतराज भी निमंत्रित किया था। पर कहीं से कोई अड़चन नहीं आई।

मछली का ऐसे हुआ पेटेंट
वर्ल्ड इंटेलैक्युअल प्रॉपटी आर्गेनाइजेशन ने हिल्सा मछली को बंग्लादेश के नाम से पेटेंट करते हुए जियोग्रॉफिकल इंडिकेशन (जीआई) दिया है। जीआई पेटेंट की पहचान का एक मानक, जिसे ट्रेड मार्क के रूप में अब सिर्फ बंग्लादेश इस्तेमाल कर विश्व बाजार में अपनी मछली बेच सकता है।

बंग्लादेश ने 2013 में ही अपने यहां जियोग्राफिकल इंडिकेटिव प्रोडक्ट्स ‘रजिस्ट्रेशन एंड प्रोटेक्शन’ एक्ट —2013 बनाया है। बंग्लादेश सरकार अभी इस एक्ट पर नीति बनाने की प्रक्रिया में जुटी है।

आर्थिक फायदा होगा
डीपीडीटी के रजिस्ट्रार मोहम्मद सनवर के अनुसार, ‘हमने हिल्सा को आर्थिक जरूरतों के लिए भी पेटेंट कराया है। बाजार भाव को लेकर होने वाले शोध बताते हैं कि ट्रेड मार्क वाले अच्छे उत्पादों के लिए ग्राहक 10 से 30 फीसदी तक अधिक भुगतान करने को तैयार रहते हैं। हिल्सा बंग्लादेश से आई है, इस रूप में प्रचारित कर बेचना बंग्लादेश की आमदनी बढ़ाएगा।

इससे पहले बंग्लादेश रसमलाई, जमादानी सारी और खादी को जियोग्राफिकल इंडिकेशन नियमों के तहत रजिस्टर्ड करा चुका है। इसमें से जमादानी साड़ी को सबसे पहले कराया था।