Last Update On : 13 03 2018 08:18:00 PM

सुप्रीम कोर्ट ने दिया फैसला जब तक नहीं हो जाती आधार मामले की पूरी सुनवाई आधार के लिए न डाले कोई सरकारी विभाग दबाव 

जनज्वार, दिल्ली। आधार मसले पर सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के बाद आम जनता थोड़ी राहत की सांस लेती दिखाई दे रही है। एक सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि सिर्फ सामाजिक कल्याणकारी योजनाओं के अलावा कहीं भी आधार फिलहाल अनिवार्य नहीं है।

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गौरतलब है कि कोर्ट के इस फैसले से पहले बैंक, मोबाइल, पासपोर्ट के लिए 31 मार्च तक की डेडलाइन सरकार की तरफ से तय कर दी गई थी। कहा जा रहा था कि तब तक हर किसी का आधार से लिंक होना अति अनिवार्य है, नहीं तो वह संबंधित सेवाओं का लाभ नहीं ले पाएगा।

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जानी—मानी वकील वृंदा ग्रोवर की तरफ से आधार की अनिवार्यता को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी। यह याचिका उन्होंने तत्काल में पासपोर्ट बनवाने को लेकर दायर की थी।

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गौरतलब है कि जनवरी 2018 में जारी पासपोर्ट नियमों के तहत तत्काल योजना में नया पासपोर्ट बनवाने या नवीनीकरण के लिए सरकार की तरफ से आधार को अनिवार्य कर दिया गया है। यह याचिका वृंदा ने तब दायर की जब उन्होंने पासपोर्ट रिन्यू के लिए आवेदन दिया था, मगर आधार लिंक न होने के कारण उनका पासपोर्ट रद्द कर दिया गया और नया पासपोर्ट जारी करने से पहले उनसे आधार नंबर देने को कहा जा रहा था।

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वृंदा ने अपनी याचिका में लिखा है कि पासपोर्ट अधिकारियों ने आधार के बिना उनका पासपोर्ट रिन्यू करने से इंकार कर दिया था, जबकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक आधार सिर्फ कल्याणकारी योजनाओं के लिए ही अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि उनका पासपोर्ट तब रद्द किया गया है जबकि उन्हें तीन दिन के अंदर एक सेमिनार में हिस्सा लेने ढाका पहुंचना है, उन्हें किसी भी हाल में 3 दिन के अंदर पासपोर्ट चाहिए।

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गौरतलब है कि वृंदा ग्रोवर से पहले भी आधार ऐक्ट की वैधता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा चुकी है। याचिकाकर्ताओं ने कहा था कि आइडेंटिटी नंबर्स के इस्तेमाल से नागरिक अधिकार समाप्त हो जाएंगे और नागरिकता दासत्व तक सिमट जाएगी। गौरतलब है आधार अनिवार्य करने पर यह बहुचर्चित सुनवाई पिछले पांच सालों से चल रही है। कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और हाई कोर्ट के एक पूर्व जज ने आधार स्कीम को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। इस मामले में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एके सिकरी, जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस अशोक भूषण की बेंच सुनवाई कर रही है।