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जनमंच के संयोजक एसआर दारापुरी ने किया 7 अप्रैल से भूख हड़ताल पर बैठे चंद्रशेखर का समर्थन, कहा एक योद्धा जहां भी होता है मोर्चा लेता है

चंद्रशेखर ने भूख हड़ताल कर की मांग एससी/एसटी एक्ट पर बदलाव के निर्देशों को लिया जाए वापस, 2 अप्रैल को प्रदर्शन के दौरान हिंसा के शिकार दलितों को मिले न्याय, मृतकों को मिले मुआवजा

जनज्वार, सहारनपुर। यूपी में जारी दलितों के दमन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने, दलितों पर लादे मुकदमों को वापस लेने, भारत बंद में हुई हिंसा की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग को लेकर सहारपुर जेल में बंद भीम आर्मी के मुखिया चंद्रशेखर आजाद ‘रावण’उपिछले 5 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं। उन्होंने इन मांगों के साथ यह भी कहा है कि हिंसा के नाम पर गिरफ्तार सभी को तत्काल बिना शर्त रिहा करने व बंद के दौरान मरे लोगों को 20 लाख रुपए मुआवजा देने की भी मांग रखी है।

7 अप्रैल से भीम आर्मी के नेता चंद्रशेखर जेल में भूख हड़ताल पर हैं। उनकी मांग है कि एससी/एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसला वापस लिया जाए। साथ ही भारत बंद के दौरान दलितों को टारगेट कर हमले हुए हैं और उसके बाद जो फर्जी मुकदमे दर्ज कर दलितों की गिरफ्तारियां की गई हैं उन्हें छोड़ा जाए।

गौरतलब है कि 2 अप्रैल को हुए भारत बंद में मरने वालों में एक भी अपर कास्ट का नहीं है। भीम आर्मी नेता चंद्रशेखर ने मांग रखी है कि जो लोग बंद के दौरान मरे हैं, उन्हें सरकार मुआवजा दे।

भीम आर्मी नेता चंद्रशेखर पर लगे रासुका वापस लेने की मांग को लेकर जनमंच अन्य संगठनों के साथ 12 अप्रैल को राष्ट्रपति को मांग पत्र सौंपेगा। मांगपत्र में राष्ट्रपति से कहा जाएगा कि संवैधानिक प्रमुख तथा दलित होने के नाते देश में भाजपा की केन्द्र व राज्य सरकारों द्वारा दलितों, आदिवासियों और समाज के कमजोर तबकों के विरूद्ध छेड़े गई हिंसा पर तत्काल रोक लगे।

जनमंच के संयोजक और पूर्व पुलिस महानिरीक्षक एसआर दारापुरी ने कहा कि जेल में बंद भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर की भूख हड़ताल का मैं समर्थन करता हूं। मोदी और योगी सरकार अपनी नाकामियों पर पर्दा डालने के लिए पूरे देश में जातीय ध्रुवीकरण की धृणित राजनीति का खेल खेल रही है।

पूर्व पुलिस उपमहानिरीक्षक दारापुरी ने आरोप लगाया कि दलितों, आदिवासियों और समाज के कमजोर तबकों के विरूद्ध सरकार ने युद्ध छेड़ दिया है। अकेले उत्तर प्रदेश में भारत बंद में हुई हिंसा के नाम पर हजारों दलितों के विरूद्ध फर्जी मुकदमे कायम कर दिए गए हैं। उनको गिरफ्तार कर जेल में बंद कर दिया गया। उन्हें थानों में बर्बर तरीके से पीटा जा रहा है। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गो के साथ बदसलूकी की गयी। बकायदा सूची बनाकर दलितों की हत्याएं हो रही हैं।

भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर और उनके साथियों की हाईकोर्ट से जमानत होने के बाद सरकार ने रासुका लगाकर जेल में बंद कर रखा है और जेल में भी उन्हें यातनाएं दी जा रही हैं। सरकार की दमन की यह कार्यवाहियां देश और प्रदेश की शांति और सामाजिक ताने—बाने को तहस—नहस कर देंगी।