Last Update On : 14 09 2018 10:53:51 AM

पिछले वर्ष जून 2017 से राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत बंद भीम आर्मी प्रमुख को आज भले ही यूपी सरकार ने जेल से रिहा कर दिया हो, पर चंद्रशेखर फिर से भाजपा की दलित और जन विरोधी नीतियों के​ खिलाफ पूरे तेवर के साथ में मैदान होंगे

जनज्वार, दिल्ली। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून ‘एनएसए’ के तहत बंद प्रदेश के सबसे लोकप्रिय दलित नेता चंद्रशेखर आजाद ‘रावण’ की वृहस्पतिवार 13 सितंबर को रिहाई की मंजूरी दे दी। चंद्रशेखर तड़के सुबह करीब 3 बजे आज सहारनपुर जेल से बाहर आ चुके हैं। 5 जून 2017 को चंद्रशेखर को उनके अन्य साथियों के साथ सहारनपुर से गिरफ्तार किया गया था।

गौरतलब है कि अप्रैल 2017 में सहारनपुर के शब्बीरपुर गांव में आंबेडकर की मूर्ति लगाने को लेकर तनाव हुआ, जो मई 5 को जातीय हिंसा में तब्दील हो गया। भीम आर्मी से जुड़े युवा शब्बीरपुर गांव में आंबेडकर की मूर्ति लगाना चाहते थे, लेकिन दबंग राजपूतों ने नहीं लगाने दिया। वहीं 5 मई को राजपूतों ने महाराणा प्रताप के जन्मदिन के अवसर पर एक भड़काऊ यात्रा निकाली जिसमें तेज आवाज में डीजे के जरिए दलितों को अपमानित किया जा रहा था। दलितों ने राजपूतों से इस रवैए से बाज आने को कहा, लेकिन वह और नंगई पर उतारू, जिसके बाद हिंसा भड़की थी।

भीम आर्मी के संस्थापक और प्रमुख चंद्रशेखर की रिहाई पर उनकी मां कमलेश देवी ने संतोष व्यक्त किया है और कहा है कि सरकार ने हमारी सुनने में एक साल लगा दिया। यूपी सरकार की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार यह रिहाई सरकार ने चंद्रशेखर आजाद और दो चंद्रशेखर के साथ बंद दो अन्य आरोपियों शिवकुमार और सोनू की मां की ओर से दाखिल आवेदन पर विचार करने के बाद रिहाई को मंजूरी दी है।

भीम आर्मी के प्रमुख और रैडिकल युवा दलित नेता की छवि वाले चंद्रशेखर आजाद ‘रावण’ साल भर बाद जब आज देर रात 3 बजे जेल से रिहा हुए तो उनके तेवर में कोई कमी नहीं दिखी। उन्होंने जेल गेट से बाहर आते ही मीडिया से बातचीत में दो टूक कहा, ‘अभी लड़ाई शुरू हुई है। भीम आर्मी इस सरकार से सीधे लड़ाई लड़ी लड़ेगी। मेरी अपील है कि 2019 में बीजेपी को सत्‍ता से उखाड़ फेंकने के लिए भीम आर्मी के साथी तैयारी करें।’

सरकार ने समय से पहले ही आपको रिहा क्यों कर दिया के जवाब में आजाद ने कहा कि भाजपा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के ​डर से मुझे रिहा किया है। यूपी की योगी सरकार ने मेरी रिहाई खुद की इज्जत बचाने के लिए की है।

इस रिहाई की राजनीतिक मंशा देखें तो साफ है कि यह रिहाई नजदीक आते लोकसभा चुनावों के मद्देनजर भाजपा सरकार के खिलाफ उठ रहे दलितों के गुबार को शांत करने का एक टोटका भर लगता है। चंद्रशेखर आजाद ‘रावण’ के रिहा होने पर वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश कहते हैं, ‘रिहाई पर चंद्रेशेखर का स्वागत है। पर यूपी की भाजपा सरकार क्या अब बताएगी कि चंद्रशेखर जैसे दलित समाज के युवा होनहार कार्यकर्ता को उसने एक साल से भी ज्यादा समय तक जेल में क्यों रखा? उन पर रासुका (NSA) क्यों थोपा गया? सरकार और सत्ताधारी दल अपने षड्यंत्रकारी आचरण के लिए दलित-समाज से तत्काल माफी मांगे!’

गौरतलब है कि 1 नवंबर 2017 को इलाबाहाद हाईकोर्ट से चंद्रशेखर को जमानत मिल चुकी थी, लेकिन ठीक एक दिन बाद 2 नवंबर को सरकार ने चंद्रशेखर की रिहाई रोकने के लिए एनएसए के तहत मुकदमा दर्ज कर दिया था।

पूर्व आईजी उत्तर प्रदेश और सामाजिक कार्यकर्ता एसआर दारापुरी ने कहा, ‘भीम आर्मी संस्थापक चंद्रशेखर की रिहाई का निर्णय भाजपा द्वारा दलित आक्रोश को कम करने का प्रयास है। वैसे चंद्रशेखर की रिहाई के लिए सुप्रीमकोर्ट में पिटीशन भी लंबित है। अब देखना है कि चंद्रशेखर मायावती की जातिवादी और अवसरवादी राजनीति का अनुसरण करता है या रैडिकल दलित एजंडा लेकर संघर्ष की अम्बेडकरवादी राजनीति का। चंद्रशेखर मायावती के लिए भी एक चुनौती बन सकता है। आइए प्रतीक्षा करें! फिलहाल चंद्रशेखर की रिहाई का स्वागत है। जय भीम- लाल सलाम।’