Last Update On : 18 11 2017 12:41:00 PM

बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड (बीएसईबी) ने फिर एक बार करामात की मिसाल कायम की है। उसने छात्र धनंजय कुमार को दसवीं को बोर्ड परीक्षा में हिंदी के पेपर में मात्र 02 नंबर दिये थे, जबकि अब खुलासा हुआ है कि उसे असल में 79 नंबर मिले थे जो विशेष योग्यता की श्रेणी में आता है…

पटना। बीएसईबी के परीक्षा परिणामों में इस तरह की करामातें अक्सर देखने को मिल जाती हैं। कभी वह बारहवीं में सहरसा की प्रियंका जिसे संस्कृत में 9 नंबर और विज्ञान में 29 नंबर मिले थे, जिसको केस—मुकदमा करने के बाद संस्कृत में 61 और विज्ञान थ्योरी में 80 में से 80 नंबर मिले थे। प्रियंका को यह नंबर इस साल 18 अक्तूबर को बीएसईबी द्वारा दिए गए। इस मामले में छात्रा प्रियंका को पटना हाईकोर्ट के आदेश के बाद बीएसईबी को हर्जाने के बतौर 5 लाख रुपए देना है।

यह तो वह मामले हैं जो आरटीआई या अन्य किसी माध्यम से सामने आए हैं, न जाने ऐसे कितने मामले होंगे जब टॉपर्स फेल हुए होंगे और फेल छात्र टॉपर घोषित।

परीक्षा परिणाम आने के बाद बिहार के रोहताश जिले के रहने वाले छात्र धनंजय कुमार ने हिंदी में 02 नंबर मिलने पर स्क्रूटनी के लिए आवेदन किया था। मजेदार यह है कि स्क्रूटनी में भी उसे 02 से अधिक नंबर प्राप्त नहीं हुए। उसके बाद उसने आरटीआई दाखिल की। 1 नवंबर को मिले आरटीआई में उसे अपने उत्तर पुस्तिका की एक फोटोकॉपी प्राप्त हुई। उत्तर पुस्तिका की फोटोकॉपी में उसे 79 नंबर मिले थे।

1 नवंबर को प्राप्त हुए आरटीआई को लेकर धनंजय कुमार बीएसईबी के दफ्तर में 15 दिन तक चक्कर काटता रहा, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। आखिरकार वह अपने परीक्षा परिणाम और आरटीआई जवाब के साथ एक टीवी चैनल पर पहुंचा जहां कार्यक्रम के बीच में ही बीएसईबी के आॅफिस से नया रिजल्ट देने के लिए फोन आया।

धनंजय को न सिर्फ हिंदी में 79 नंबर हैं बल्कि विज्ञान में 80, गणित में 96 और संस्कृत में 79 नंबर मिले हैं।