Last Update On : 29 08 2018 08:51:09 AM
तस्वीर में उपर से दाहिने ओर बढ़ते क्रम में आनंद तेलतुंबड़े, गौतम नवलखा, वरवरा राव, स्टैन स्वामी, वेरनान गोंजाल्विस और अरुण फरेरा

वकील, शिक्षक और मानवाधिकार कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज, ख्यात कवि और बुद्धिजीवी वरवर राव, मानवाधिकार कार्यकर्ता गौतम नवलखा, जिनेस आॅर्गनाइजेशन के वर्णन गोंजा​लविस और लेखक और सामाजिक कार्यकर्ता अरुण फरेरा को किया है छापेमारी के बाद पुलिस ने किया गिरफ्तार

महाराष्ट्र, झारखंड और दिल्ली में एक साथ मारे गए पुलिस रेड से साफ है कि सरकार अब बड़े स्तर पर मानवाधिकार​​वादियों के मुंह में जाबी डालना चाहती है…

जनज्वार। आज देश के अलग—अलग ​हिस्सों में पुलिस ने मावनवाधिकार और नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं के घरों में एक साथ, एक समय पर छापे मारे हैं। ये सभी छापे भीमा कोरेगांव मामले में अभियुक्तों के खिलाफ और सबूतों व अब तक मिले सबूतों के तार जोड़ने के लिए मारे गए हैं।

आज सुबह के 6 बजे सबसे पहले छापे की खबर झारखंड की राजधानी रांची से आई। महाराष्ट्र पुलिस ने आदिवासी भूमि अधिकारों के लिए चलाए जा रहे आंदोलन ‘पत्थलगड़ी’ में सक्रिय स्टैन स्वामी के आवास पर छापा मारा। इस छापे के दौरान पुलिस ने उनके घर से कम्प्यूटर, लैपटॉप, सीडी, कुछ कागजात और किताबें उठा के ले गयी। इसके अलावा उनसे महाराष्ट्र पुलिस ने महाराष्ट्र में सक्रिय कुछ संगठनों के बारे में भी पूछताछ की।

मीडिया से बातचीत में पुणे पुलिस के एसीपी शिवाजी पवार ने छापेमारियों की पुष्टि की है।

मानवाधिकार संगठन पीयूडीआर के पदाधिकारी परमजीत से मिली जानकारी के मुताबिक महाराष्ट्र की पुणे पुलिस ने इसी के साथ भीमा कोरेगांव मामले में पहले से गिरफ्तार अरूण फरेरा के पुणे स्थित आवास पर छापेमारी की है, जबकि सुसान अब्राहम और वेरॉन गोंजाल्विस के मुंबई आवास पर पुलिस ने रेड मारी है।

वहीं मानवाधिकार कार्यकर्ता गौतम नवलखा के दिल्ली और आईआईटी प्रोफेसर और लेखक आनंद तेलतुबड़े के गोवा स्थित आवास पर छापेमारी हुई है।

इसी के साथ चर्चित जनकवि और माओवादी संबंधों के मामलों में ख्यात आंध्र प्रदेश के वरवरा राव, नसीम और क्रांति टेकुला के हैदाराबाद स्थि​त आवास, वरवरा राव की बेटी अनाला के घर और पत्रकार कुरमनात के यहां भी पुलिस ने भी छापे मारे हैं।

ये सभी छापेमारियां महाराष्ट्र की पुणे पुलिस द्वारा की गयी हैं और सभी एक समय पर हुई हैं। माना जा रहा है कि इन सभी छापेमारियों का संबंध भीमा कोरेगांव मामलों में पहले हो चुकी गिर​फ्तारियों से जुड़ी हैं। सुसान अब्राहम और अरुण फरेरा भीमा कोरेगांव के आरोपियों की पिछली जनवरी से पैरोकारी कर रहे थे।