माता—पिता बच्चों के लिए खरीद रहे बुलेट प्रूफ  बैग कि गोली लगते वक्त हो सके बचाव

खुद के देश और पूरी दुनिया को युद्ध और अपराध में धकलने वाला विश्व का सर्वशक्तिशाली देश खुद इस समय भस्मासुर के मुंह पर बैठा दिख रहा है और मानवता और जीवन बचाए रखने के टोटके कर रहा है।

जी, हां यहां बात हो रही है अमेरिका की, जहां किशोर अपराधियों की तादाद तेजी से बढ़ रही है। और बड़ी बात यह है कि किशोरों को अपराधी कोई और नहीं बल्कि घर में पड़ी बंदूकें बना रही हैं, जिनका अमेरिकी जीवनशैली में उसी तरह उपलब्धता है जैसे बच्चों वाले घरों में खिलौने सहज मिल जाते हैं।

पिछले दिनों अमेरिकी शहर फ्लोरिडा के पार्कलैंड इलाके के स्टोनमैन डॉगलस हाई स्कूल में एक बच्चे ने 17 बच्चों को गोलियों से भून दिया था।

गौरतलब है कि हाल ही में अमेरिका स्थित फ्लोरिडा के हाईस्कूल में एक पूर्व छात्र द्वारा 14 फरवरी को की गयी गोलीबारी में कई छात्रों समेत लगभग 17 लोग मारे गये। 19 वर्षीय क्रूज फ्लोरिडा के पार्कलैंड स्थित मारजोरी स्टोनमैन डगलस हाईस्कूल का पूर्व छात्र है और गोलीबारी की घटना को भी इसी स्कूल में अंजाम दिया गया है।

क्रूज के पास से जांच में भारी मात्रा में राइफल की मैगजीन बरामद की गईं। शुरुआती छानबीन में सामने आया कि क्रूज को अनुशासनात्मक कार्रवाई के तहत मारजोरी स्टोनमैन डगलस हाईस्कूल से निकाल दिया गया था, जिसकी खुन्नस में उसने इस गोलीकांड को अंजाम दिया। 

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इसके बाद से सहमे अभिभावक अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए बुलेटप्रूफ बैग खरीद रहे हैं जिससे अगर उनका कोई सहपाठी या स्कूल का छात्र उनपर गोली चलाए तो वह पीछे से बच सकें। हालांकि लोग इसका मजाक भी उड़ा रहे हैं कि इस टोटके से बच्चों को हिंसा या मौत से कैसे बचाया जा सकता है।

फिर भी कई सारे अमेरिकी माता—पिता ने बुलेट प्रूफ बैग खरीद रहे हैं। खरीदने वाले माता—पिता में से कईयों ने फेसबुक और इंस्ट्राग्राम पर बच्चों समेत बैग की तस्वीरें भी लोड की हैं।

अंग्रेजी वेबसाइट इंडिपेंडेंट से बातचीत में पांचवी कक्षा की शिक्षक और मां साराह पंपीलोनिया बताती हैं कि मैंने अपने 4 वर्षीय बेटे के लिए यह बैग उस समय खरीद लिया जब मैंने फेसबुक पर इसका विज्ञापन देखा।

इसके अलावा कई और मांओं ने भी ऐसे बैग खरीद—खरीद कर इंट्राग्राम में अपलोड किया है। पर सवाल यह है कि समाज के हिंसक होते जाने के बीच इस तरह के टोटके कितने दिन तक बच्चों को बचा पाएंगे जबतक हम यह मानने को तैयार नहीं होंगे कि समाज से हिंसा का स्थान कम और बहुत करना होगा।


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