Last Update On : 03 05 2018 10:03:00 AM

एक तरफ कंपनी यह कह रही है कि हमने कोई बेईमानी नहीं की, वहीं कैंब्रिज एनालिटिका के कर्ता—धर्ता Nix स्पष्ट रूप से बता चुके हैं कि उनकी कंपनी डेटा चोरी कैसे करती है…

जनज्वार। डेटा लीक चोरी मामले में मीडिया में आई कंपनी कैंब्रिज एनालिटिका कंपनी बंद होने की खबरें आ रही हैं। कंपनी मैनेजमेंट के मुताबिक जिस तरह से मीडिया ने उसका निगेटिव प्रचार किया है, उससे कस्टमर दूर चले गए हैं।

हालांकि कंपनी यह कहना भी नहीं भूलती है कि उसने कभी कोई गलत काम नहीं किया। कैंब्रिज एनालिटिका के भरोसे के बावजूद हमारे कर्मचारियों ने नैतिक और कानूनी रूप से सही होकर काम किया। लेकिन मीडिया के गलत कवरेज से हमारे कस्टमर्स और सप्लायर्स दूर होते चले गए। इसीलिए हमने फैसला लिया है कि अब एनालिटिका का कारोबार लंबे समय तक चलाना मुश्किल होगा।

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हालांकि एक तरफ कंपनी यह कह रही है कि हमने कोई बेईमानी नहीं की, वहीं कैंब्रिज एनालिटिका के कर्ता—धर्ता Nix स्पष्ट रूप से बता चुके हैं कि उनकी कंपनी डेटा चोरी कैसे करती है। सबसे पहले कैंब्रिज एनालिटिका विभिन्न स्रोतों से भूमिगत रजिस्ट्री, ऑटोमोटिव डेटा, शॉपिंग डेटा, बोनस कार्ड, क्लब सदस्यता, आप जो पत्रिका पढ़ते हैं, आप किस चर्च में जाते हैं जैसी तमाम जानकारियां इकट्टा करता है। इन जानकारियों को इकट्ठा करने के लिए निक्स वैश्विक स्तर पर सक्रिय डेटा दलालों से डाटा खरीद करता है। एक्सिओम और एक्स्पिरियन-यूएस डाटा दलालों के प्रमुख नाम हैं।

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गौरतलब है कि कैंब्रिज एनालिटिका एक डाटा माइनिंग, एनालिसिस और कैंपेन मैनेजमेंट कंपनी है, जो फेसबुक सहित अन्य सोशल मीडिया के डाटा का उपयोग कर इलैक्शन और राजनीतिक कैम्पेन मैनेजमेंट करती है। इसमें बड़ी बात यह है कि कैंब्रिज एनालिटिका खुद दावा करती है कि उसकी कंपनी ने ब्रेक्सिट और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के राष्ट्रपति चुनाव में काम किया था। इस तथ्य को वह छुपाने की कोई कोशिश नहीं करती और इसे वह एक सक्सेस स्टोरी की तरह प्रचारित करती है।

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भारत में भी भाजपा इसकी सबसे पुरानी ग्राहक रही है। कांग्रेस और जदयू भी कैंब्रिज एनालिटिका के ग्राहक रहे हैं, मगर 2014 से भाजपा डाटा चोर कैंब्रिज एनालिटिका कंपनी से चुनाव जीतने के लिए मदद लेती आई है। बाद में कांग्रेस को इसका ग्राहक बता बीजेपी ने अपना एकाउंट डिलीट कर दिया था।

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कैंब्रिज एनालिटिका पर डेटा चोरी का आरोप लगने के बाद इसकी जांच ब्रिटेन की संसदीय समिति कर रही है। समिति के अध्यक्ष डेमियन कॉलिंस के मुताबिक ‘कंपनी ने जो किया, उसके लिए उनकी गंभीर जांच हो रही है। अगर एनालिटिका ने खुद के बंद करने का फैसला किया है तो भी जांच पर कोई असर नहीं पड़ेगा।’

वर्ष 2013 में कैंब्रिज के एक रिसर्चर ने अलेक्जेंडर कोगन ने पर्सनैलिटी क्विज ऐप बनाया था, जिसके जरिए फेसबुक उपयोगकर्ताओं का पर्सनल डेटा चोरी किया गया था।

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जैसे ही कोई क्विज खोलता है तो फेसबुक से लॉगिन करने को कहा जाता है। लॉगिन करते ही यह एप फेसबुक यूजर के प्रोफाइल से सारी वाइटल सूचनाएं इकठ्ठा करता है, जिसकी कई बार यूजर खुद सहमति देते है। लेकिन ये इतने छोटे और गूढ़ शब्दों में होता है कि आप इस पर ध्यान नहीं देते। दूसरा अगर कई लोगों का ध्यान जाता भी है तो एप्प की प्रकृति दिलचस्प होती है कि इस्तेमाल करने वाला एक बार देख लेना चाहता है। यह एप मानव मनोविज्ञान, स्थानीय आबादी के समाजशास्त्र और लोक प्रवृत्तियों को भी ध्यान में रखकर बनाए जाते हैं। इस एप के जरिए 5 करोड़ अमेरिकी यूजर्स की फेसबुक प्रोफाइल की पूरी जानकारी कोगन तक पहुंची।

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कोगन ने यह डेटा कैंब्रिज एनालिटिका को दे दिया। उस वक्त कैंब्रिज एनालिटिका ने राष्ट्रपति चुनाव के लिए ट्रम्प का कैंपेन संभाला। 5 करोड़ अमेरिकियों की जानकारी के आधार पर यूजर्स से कुछ सवाल पूछ कैंब्रिज एनालिटिका ने फेसबुक यूजरों का बिहेवियर स्टडी किया, जिसमें पता चला कि फेसबुक पर कौन क्या पसंद करता है। उसी के आधार पर US के फेसबुक यूजर्स को कैंब्रिज एनालिटिका पर विभिन्न श्रेणियों में बांटा।

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लोगों के फेसबुक बिहेवियर को जानने के बाद कैब्रिज एनालिटिका, उनकी वॉल पर यूजर की पसंद से जुड़े कंटेट भेजती थी। आप जिस विचारधारा, जाति, समुदाय, पार्टी समर्थक और समूह के होंगे आपके बीच वैसी पोस्ट बुस्ट की जाएगी, जिससे आप व्यापक जनमत तैयार करने में अनजाने ही भागीदार बने। इसीलिए आपने कई बार देखा होगा कि जो एड आपके किसी दूसरे मित्र को दिखा रहा है या पोस्ट दिखा रहा है वह आपको नहीं दिखा रहा, क्योंकि यह सबकुछ आपके मित्र के पुराने गूगल सर्च, फेसबुक लाइक्स, फेसबुक स्टेटस और हज़ारों तरह के सुचना के आधार पे (जिसे हम डिजिटल फुट प्रिंट भी कहते है) के आधार दिखता है और आपको टार्गेट किया जाता है।