Last Update On : 31 03 2018 07:42:00 PM

झारखंड अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रमुख लोगों में शामिल यह सरगना झारखंड के विद्यार्थी परिषद की राज्य कार्यकारिणी का है सदस्य, करीब एक दशक से है संघ के आनुषांगिक संगठन में सक्रिय, विद्यार्थी परिषद के अगुआ नेताओं में है शामिल

जनज्वार, रांची। देश के 24 लाख छात्रों की तैयारी और देश के करोड़ों रुपए के संसाधन बर्बाद कराने वाला सीबीएसई पर्चा लीक कांड का सरगना कहीं और से नहीं मोदी जी की पार्टी के छात्र संगठन एबीवीपी की पैदाईश है।

सीबीएसई पर्चा लीक कांड में एबीवीपी का छात्रनेता गिरफ्तार

गौरतलब है कि कोचिंग सेंटर चलाने वाला झारखंड के चतरा जिले का सतीश कुमार पांडेय ABVP का झारखंड प्रदेश कार्यसमिति का सदस्य और चतरा जिला संयोजक है। इससे पहले वह नगर नगर कार्यसमिति सदस्य और नगर सह मंत्री रह चुका है। उसकी पूरी फेसबुक वॉल अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की गतिविधियों, पुरस्कारों और संगठन—भाजपा से संबंधित पोस्टों से भरी हुई है।

बड़ी बात यह है कि वह अपने फेसबुक पर तरह—तरह के राष्ट्रवादी दावे करता है, मुस्लिमों और अल्पसंख्यकों को गाली देता है। वह कम्युनिस्टों के प्रति नफरत रखता है। लेकिन उसका रिलेशनशिप स्टेटस ओपेन है।

झारखंड के चतरा जिले से अन्य अभियुक्तों के साथ गिरफ्तार हुआ सतीश कुमार पांडेय ने 31 मई 2017 के पोस्ट में उसने एबीवीपी के Nikhil Ranjan को बधाई देते हुए लिखा है, ‘भैया जी को अखिल भारतीय विधार्थी परिषद् क्षेत्रीय संगठन मंत्री बिहार – झारखंड के लिए दायित्व मिला। अ.भा.वि.प. झारखंड कि ओर से बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएं। आशा और उम्मीद है आपके सफल निर्देशन में अ.भा.वि.प. के कार्य को गति मिलेगी।’

29 मई 2017 के पोस्ट में धर्मनिरपेक्ष हिंदुओं को गाली देते हुए लिखता है, ‘कुछ हिजड़ों ने सनातनी संस्कृति पर वार किया…100 करोड़ हिंदुओं की भावनाओं को तार-तार किया…।।।
#kerala।’

सरगना का स्टेटस विस्तार से समझने की जरूरत इसलिए है कि मुस्लिमों से नफरत, वामपंथियों को लाल आतंक कहने वाला यह आरोपी दरअसल उसी जमात का हिस्सा है जो भारत माता की जय बोलते हुए दंगे करते हैं और समय पड़ने पर बंदे मातरम बोलते हुए घरों को फूंक देते हैं। इनका कुल मिला—जुलाकर मकसद यह होता है कि वह छात्रों को बुनियादी सवालों और जनता को असल मांगों से कोसों दूर धर्म—संप्रदाय की चक्की में पीसते रहें।

आप स्टेटस चेक करके देखें तो यह मानेंगे कि असल में काला धंधा करने के लिए हिंदूवाद उसके लिए एक बहाना था, जिसके जरिए वह छात्रों को अपने जाल में फांसता और विरोधियों को भगवा गुंडागर्दी के जरिए चुप रखता था। गौरतलब है कि सतीश ने 19 जून 2017 के बाद अपना कोई स्टेटस अपडेट नहीं किया है। 

संभव है उसकी गिरफ्तारी के बाद विद्यार्थी परिषद हाथ झाड़ ले, लेकिन उसके फेसबुक से साफ होता है उसकी विद्यार्थी परिषद और भाजपा दोनों में ही गहरी पैठ थी और अगर जांच सही दिशा में हो तो उसके साथ कई और लोग इन संगठनों के संलिप्त हो सकते हैं।