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प्रधानमंत्री मोदी ने सार्वजनिक मंचों से खुद को एक बार नहीं कई कई बार चौकीदार बताया है। जनता ने अगर उन्हें चौकीदारी के लिए चुना है तो उसका फर्ज बनता है कि हम उनसे पूछे ‘रक्षा’ मंत्रालय से राफेल से जुड़ी फाइल कैसे चोरी हो गई…

सुशील मानव

सुप्रीम कोर्ट ने राफेल डील पर पुनर्विचार याचिका की सुनवाई के दौरान चौकीदार यानी प्रधानमंत्री मोदी की ओर से उनके अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कोर्ट में नए कागज पेश करते हुए कहा कि आप इन दस्तावेजों के आधार पर राफेल केस की सुनवाई करें।

कोर्ट ने नए दस्तावेजों के आधार पर जब सुनवाई करने से इन्कार कर दिया तो चौकीदार के अटार्नी जनरल ने कहा- “जिस कागज के आधार पर आप सुनवाई कर रहे हो वो चोरी के हैं और इन दस्तावेजों को रक्षा मंत्रालय से चुराया गया है।” कोर्ट ने कहा कोई बात नहीं। गलत तरीके से हासिल दस्तावेजों पर भी एविंडेंस एक्ट के तहत सुनवाई हो सकती है।

इस पर चौकीदार के अटार्नी केके वेणुगोपाल ने धमकी देते हुए कहा हम उन पर रक्षा जैसे संवेदनशील चीज से जुड़े दस्तावेज चुराने के लिए क्रिमिनल केस करेंगे।

कोर्ट ने कहा अगर सचमुच मामला इतना गंभीर है तो आप बताओ की इस दस्तावेज के चोरी पर अब तक आपकी सरकार ने क्या कदम उठाए हैं? इस बात पर चौकीदार के अटार्नी जनरल ने पूरी बेशर्मी से कहा कि गर हम FIR करते तो कई याचिकाकर्ताओं के नाम भी आ जाता।

फिर चौकीदार के अटार्नी जनरल वेणुगोपाल ने कोर्ट को गुमराह करने की कोशिश करते हुए कहा कि क्या मिग की जगह राफेल नहीं होना चाहिए। फिर चौकीदार के अटार्नी जनरल ने कोर्ट से कहा कि गर राफेल पर सीबीआई जांच होगी तो राफेल डील डैमेज होगा। ये देशहित में नहीं होगा। हद है, चौकीदार का अटार्नी है कि नौटंकी पार्टी।

इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने सार्वजनिक मंचों से खुद को चौकीदार बताया है, एक बार नहीं कई कई बार। हमने उन्हें चौकीदारी के लिए चुना है तो हमारा फर्ज बनता है कि हम उनसे पूछें कि रक्षा मंत्रालय से राफेल से जुड़ी फाइल कैसे चोरी हो गई?

चौकीदार के रहते ही नीरव मोदी, मेहुल चौकसी, विजय माल्या, ललित मोदी बैंकों का सारा माल लूटकर चलते बने। मतलब साफ है चौकीदार चोरों से मिला हुआ है। चौकीदार न सिर्फ देश की सुरक्षा से खिलावड़ कर रहा है, बल्कि हमारी आपकी जान भी जोखिम में डाल रहा है। वरना और क्या वजह है कि चौकीदार ने अनुभवी और सरकारी संस्थान हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को राफेल सौदे से हटाकर 10 दिन पहले बनी अनिल अंबानी की कंपनी को राफेल डील में साझेदार बना लेता है। एक बार इस मामले को फिर से जरा सीरियस होकर देखते हैं।

कोर्ट को फिर से गुमराह करने की कोशिश करते हुए सरकार के अटार्नी जनरल ने कहा कि अगर इस मामले की सीबीआई जांच से राफेल डील में डैमेज होगा, जो देशहित से सही नहीं होगा। गौरतलब है कि इससे पहले भी मोदी सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में गलत तथ्य पेश करके कोर्ट को सुनवाई के दौरान गुमराह किया गया था जिसके बाद ही दिसंबर में हुई सुनवाई के बाद राफेल सौदे पर मोदी सरकार को क्लीनचिट दे दी थी।

इसके बाद कोर्ट ने भारत और फ्रांस के बीच 23 सितंबर 2016 को हुए राफेल विमान सौदे के खिलाफ दायर जांच संबंधी सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि राफेल सौदे में निर्णय लेने की प्रक्रिया पर शक करने की कोई वजह नहीं है। साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा था कि राफेल लड़ाकू विमानों की कीमत पर फैसला लेना अदालत का काम नहीं है।


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