Last Update On : 05 06 2018 03:50:00 PM

करोड़ों रुपये की कीमत वाली इस सरकारी जमीन पर स्थानीय भू-माफिया पिछले एक वर्ष से निर्माण और तालाब को पाटने की कवायद करते हुए जमा रहे हैं कब्जा…

गोरखपुर से अतुल शुक्ला की रिपोर्ट

गोरखपुर, जनज्वार। सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जहां भू-माफियाओं पर नकेल कसने की तमाम बातें और वादे करते हैं, वहीं उनके अपने ही गृह जनपद में गोरखपुर-सोनौली अंतरराष्ट्रीय राजमार्ग पर पीपीगंज कस्बे के साहबगंज ग्रामसभा स्थित पोखरे को पाटकर, भू-माफिया अवैध निर्माण कर रहे हैं। स्थानीय ग्रामसभा के निवासी और ग्रामप्रधान प्रशासनिक अधिकारियों से फरियाद करते थक चुके हैं, लेकिन स्थानीय प्रशासन और जिले के आलाधिकारी अवैध निर्माण पर रहस्यमय चुप्पी साधे हुए हैं।

अंतरराष्ट्रीय राजमार्ग से लगा हुआ है पोखरा (तालाब)
गोरखपुर जिले की कैम्पियरगंज तहसील के साहबगंज ग्रामसभा स्थित पोखरा, गाटा संख्या-345) अंतरराष्ट्रीय राजमार्ग को लगा हुआ है, जिसका क्षेत्रफल 0.526 हेक्टेयर है। करोड़ों रुपये की कीमत वाली इस सरकारी जमीन पर स्थानीय भू-माफिया पिछले एक वर्ष से निर्माण व पाटने की कवायद करके कब्जा कर रहे हैं।

बीते वर्ष जुलाई माह में जब ग्रामीणों ने अवैध निर्माण के खिलाफ मुहिम छेड़ी, तब प्रशासन के हस्तक्षेप पर कुछ दिन के लिए निर्माण कार्य रुका था, लेकिन कुछ समय के बाद पुनः भू-माफिया निर्माण व पटान कराने लगे। इस बार जब ग्रामीणों ने जिले के आलाधिकारियों के सामने गुहार लगाई तो प्रशासन ने रहस्यमय ढंग की चुप्पी अख्तियार कर ली है। तबसे स्थानीय नागरिक व ग्राम प्रधान धर्मेंद्र जायसवाल तहसील दिवस, थाना दिवस से लगायत जिलाधिकारी कार्यालय व मुख्यमंत्री जनता दरबार तक चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर जारी शासनादेश, जलाशय हैं जीवनधारा
सर्वोच्च न्यायालय ने जलाशयों को जीवनधारा माना है। जल संरक्षण के महत्व को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2001 में समस्त तालाबों, पोखरों व जलाशयों के संरक्षण संवर्धन एवं विकास हेतु निर्णय दिया गया। इसका अनुपालन सुनिश्चित कराते हुए राजस्व परिषद् एवं राज्य सरकार ने भी जलाशयो को अवैध कब्जों से मुक्त कराने व राजस्व अभिलेखों को दुरूस्त किये जाने का निर्देश दिया है।

उच्चतम न्यायालयों द्वारा Omprakash Varma Vs state of UP के case के निर्णय के अनुपालन में प्रमुख सचिव राजस्व ने कहा कि “उक्त विषय के सन्दर्भ में बहु सदस्यीय समिति का गठन किया गया है और समस्त अधिकारियों से अनुरोध है कि इसका समुचित प्रचार-प्रसार अपने अपने क्षेत्रों में नियमित रूप से करना सुनिश्चित करें और अवैध कब्जों के सम्बन्ध में प्राप्त शिकायतों की जाँच कराकर कार्यवाही रिपोर्ट/प्रगति रिपोर्ट मण्डलायुक्त के माध्यम से परिषद् को पाक्षिक रूप से उपलब्ध करना सुनिश्चित करें।”

देखिये किस तरह अंतरराष्ट्रीय राजमार्ग से लगा हुआ है तालाब

सिविल अपील संख्या- 4787/2001, हिंचलाल तिवारी बनाम कमलादेवी, ग्राम उगापुर, तालुका आसगांव, जिला संत रविदास नगर, उत्तर प्रदेश के मामले में तालाब को सार्वजनिक उपयोग की भूमि के तहत समतलीकरण कर यह करार दिया गया था कि वह अब तालाब के रूप में उपयोग में नहीं है। तालाब की ऐसी भूमि को आवासीय प्रयोजन हेतु आवंटन कर दिया गया था। इस मामले में 25 जुलाई 2001 को पारित हुए आदेश में कोर्ट ने कहा कि जंगल, तालाब, पोखर, पठार तथा पहाड आदि को समाज के लिए बहुमूल्य मानते हुए इनके अनुरक्षण को पर्यावरणीय संतुलन हेतु जरूरी कहा है।

निर्देश है कि तालाबों को ध्यान देकर तालाब के रूप में ही बनाये रखना चाहिए। उनका विकास और सौंदर्यीकरण किया जाना चाहिए, जिससे जनता उसका उपयोग कर सके। आदेश है कि तालाबों के समतलीकरण के परिणामस्वरूप किए गए आवासीय पट्टों को निरस्त किया जाए। आवंटी स्वयं निर्मित भवन को 6 माह के भीतर ध्वस्त कर तालाब की भूमि का कब्जा ग्रामसभा को लौटाएं। यदि वे स्वयं ऐसा नहीं करते हैं तो प्रशासन इस आदेश का अनुपालन सुनिश्चित कराये।

इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के उक्त आदेश का संज्ञान लेते हुए परिषद ने नये सिरे से 8 अक्तूबर 2001 को एक महत्वपूर्ण शासनादेश जारी किया, जिसमें आवासीय प्रयोजन के लिए आरक्षित भूमि को छोड़कर किसी अन्य सार्वजनिक प्रयोजन की आरक्षित भूमि को आवासीय प्रयोजन के लिए आबादी में परिवर्तित किया जाना बिल्कुल ही आपत्तिजनक है।