अंतरिक्ष में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने के साथ ही चीन मोबाइल फोन, 5जी तकनीक व आर्टिफिशियल इंटलीजेंस के क्षेत्र में भी बहुत कुछ नया कर रहा है। ऐसे में पश्चिमी देश चीन पर बौद्धिक संपदा अधिकार के उल्लंघन का आरोप लगाकर बच नहीं सकते…

बीजिंग से अनिल आज़ाद पांडेय की रिपोर्ट

इंटलेक्चुअल प्रॉपर्टीराइट को लेकर चीन लंबे समय से काम करने में जुटा हुआ है। चीन ने इस अधिकार की रक्षा के लिए उस वक्त से ही मजबूती से कदम उठाने शुरू किए, जब वह जून 1980 में वर्ल्ड इंटलेक्चुएल प्रॉपर्टी राइट ऑर्गनाइजेशन का सदस्य बना।

सदस्य बनने के बाद लगभग चार दशक होने को हैं, इस दौरान चीन ने बौद्धिक संपदा अधिकार से जुड़े तमाम मामलों का निपटारा किया। चीन ने विकास का नया पैमाना गढ़ते हुए सृजन व नवाचार के क्षेत्र में भी अग्रणी भूमिका निभाई है। चीनी कंपनियों को अब महज कॉपी, पेस्ट कर अपने उत्पाद बनाने वाली कंपनियां नहीं कह सकते हैं। क्योंकि चीन ने हाल के वर्षों में बहुत तरक्की की है।

अंतरिक्ष में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने के साथ ही चीन मोबाइल फोन, 5जी तकनीक व आर्टिफिशियल इंटलीजेंस के क्षेत्र में भी बहुत कुछ नया कर रहा है। ऐसे में पश्चिमी देश चीन पर बौद्धिक संपदा अधिकार के उल्लंघन का आरोप लगाकर बच नहीं सकते। क्योंकि उनकी कंपनियों को चीनी उद्यमों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन चीन लगातार आगे बढ़ रहा है और बीजिंग में चल रही एनपीसी में भी चीनी प्रतिनिधि बौद्धिक संपदा अधिकार को और मजबूत बनाने के बारे में विचार कर रहे हैं।

हालांकि अमेरिका जैसे कुछ देश चीन पर बौद्धिक संपदा अधिकार के उल्लंघन के आरोप लगाते रहे हैं। लेकिन चीन अपनी क्षवि को सुधारने में लगा है। चीन की राजधानी बीजिंग में भी सरकार ने संपदा अधिकार से जुड़े मामलों की जल्द सुनवाई करने के लिए एक विशेष अदालत का गठन किया है। इस अदालत में तमाम बड़े विवादित मसलों पर फैसला आता है। इसके साथ ही चीन कॉपी राइट के उल्लंघन को लेकर भी गंभीर है। यह चीन द्वारा उठाए जा रहे विभिन्न कदमों में देखा जा सकता है।

कॉपीराइट मामलों की सुनवाई के लिए इंटरनेट कोर्ट भी स्थापित की गयी है। चीन ने पहले की तुलना में कॉपीराइट व बौद्धिक संपदा अधिकार के उल्लंघन के मामलों में दंड व जुर्माना भी बढ़ाया है। इसके अलावा चीन ने पिछले साल बौद्धिक संपदा अधिकार ब्यूरो का पुनर्गठन भी किया है, जिसका मकसद इससे जुड़ी घटनाओं से गंभीरता से निपटना है।

हाल में चाइना-अमेरिका वाणिज्यिक संघ द्वारा एक रिपोर्ट जारी की गयी। रिपोर्ट कहती है कि अमेरिका के 59 प्रतिशत उद्यमी मानते हैं कि चीन ने पिछले कुछ सालों में बौद्धिक संपदा अधिकार के क्षेत्र में बहुत अच्छा काम किया है। इस बात में दम भी लगता है।

कुछ दिन पहले इस रिपोर्ट के लेखक ने भी किसी अमेरिकी विशेषज्ञ से बात की, उनका कहना था कि अमेरिका की सिलिकॉनवैली में चीन में हो रहे नवाचार को लेकर चिंता रहती है। क्योंकि आए दिन कोई न कोई चीनी कंपनी कुछ न कुछ नया प्रयोग या काम कर चर्चा में आ जाती है।

यहां बता दें कि चीन अब उत्पादकता व सृजन पर विशेष ध्यान दे रहा है। इसका नतीजा यह हुआ है कि दुनिया के बड़े देशों की कंपनियां भी चीन का लोहा मानने लगी हैं। वैसे इस एनपीसी में भी चीन ने बौद्धिक संपदा अधिकार के प्रति अपनी इच्छाशक्ति दिखाने का काम किया है। देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रतिनिधि वैश्विक स्तर पर आईपीआर की रक्षा में अपनी जिम्मेदारी को समझते हैं।

बताया जाता है कि इंटलेक्चुअल प्रॉपर्टीराइट के उल्लंघन के खिलाफ दंडात्मक क्षतिपूर्ति सिस्टम का गठन करेगा। इसका उद्देश्य अधिकार के उल्लंघन का खर्च बढ़ाना है। इसके साथ ही चीन अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी मजबूत करेगा, देसी-विदेशी उद्योगों के बीच तकनीकी आदान प्रदान और व्यापारिक आवाजाही का विस्तार करेगा।

विदेशों में बौद्धिक संपदा अधिकार की रक्षा वाले हेल्प सेंटर की स्थापना के लिए काम करेगा। विदेशों में अधिकार की रक्षा को गति देगा। ताकि चीनी बौद्धिक संपदा अधिकार का विदेशों में कारगर संरक्षण किया जा सके।

आंकड़ों की बात करें तो साल 2018 में चीनी बौद्धिक संपदा अधिकार के उपयोग खर्च में आयात राशि 2 खरब 30 अरब युआन थी। जो कि 2017 के मुकाबले 20 फीसदी अधिक थी, जबकि निर्यात की राशि 37 अरब युआन थी, इस राशि में 2017 की तुलना में 15 प्रतिशत का इजाफा हुआ।

एनपीसी में पेश सरकारी कार्य रिपोर्ट के मुताबिक चीन इस साल अंतरराष्ट्रीय नवाचार सहयोग का विस्तार करेगा। साथ ही आविष्कार की दिशा में प्रयोग को लेकर परिवर्तन लाएगा। वहीं चीन ने ट्रेडमार्क कानून के नए दौर का संशोधन कार्य भी शुरू कर दिया है। इस साल देश में ट्रेडमार्क के जांच की समय-सीमा को पांच महीने किया जाएगा।

(अनिल आज़ाद पांडेय चाइना मीडियाग्रुप में वरिष्ठ पत्रकार हैं। पिछले कई वर्षों से चीन में रहते हुए चीन-भारत मुद्दों पर भारतीय व अंतर्राष्ट्रीय मीडिया में अकसर लिखते रहते हैं और हैलोचीन पुस्तक के लेखक भी हैं।)


जन पत्रकारिता को सहयोग दें / Support people journalism


Facebook Comment