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सुधार व खुलेपन को लेकर चीन ने दिखाया अमेरिका को आइना 

Prema Negi
7 March 2019 3:42 AM GMT
सुधार व खुलेपन को लेकर चीन ने दिखाया अमेरिका को आइना 
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बीजिंग में जारी है 13वीं एनपीसी, 2975 सदस्यों की मौजूदगी में लिए जाएंगे कई बड़े फैसले

बीजिंग से अनिल आज़ाद पांडेय की रिपोर्ट

चीन पिछले लंबे समय से सुधार व खुलेपन की नीति पर जोर दे रहा है। चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग भी अपने भाषणों के जरिए बाजार को मुक्त बनाने की वकालत कर चुके हैं। पेइचिंग में जारी 13वीं एनपीसी के दूसरे पूर्णाधिवेशन में भी इस बाबत चीन की प्रतिबद्धता नजर आ रही है।

इस बीच राष्ट्रीय विकास और सुधार आयोग ने भी खुली अर्थव्यवस्था का विकास करने की बात कही है। जिसमें विदेशी निवेश के लिए बेहतर माहौल बनाने पर बल दिया गया है। ऐसे में वैश्विक तौर पर मुक्त बाज़ार व्यवस्था की मांग करने वाले चीन ने दुनिया के सामने उदाहरण पेश करने का काम किया है। चीन का यह कदम ऐसे वक्त में कई देशों के लिए आशा की किरण लेकर आया है, जो कुछ देशों के व्यापार संरक्षणवाद के सख्त रवैये से परेशान हैं।

वैश्विक मंदी के बावजूद चीन अपने बाज़ार को और बेहतर व खुला बनाने की दिशा में जुटा हुआ है, यह काबिलेतारीफ है। चीन चाहता है कि अधिक से अधिक विदेशी कंपनियां यहां आकर काम करें।

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राष्ट्रीय विकास व सुधार आयोग के उपाध्यक्ष निंग च्यीच ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि चीन साल 2019 में व्यापक तौर पर खुली अर्थव्यवस्था का विकास करेगा। इसका सीधा लाभ उन विदेशी उद्यमों और निवेशकों को होगा, जो चीन में प्रवेश करने के इच्छुक हैं।

चीन विदेशी निवेश का पूरी तरह स्वागत करने को तैयार है। इसी कड़ी में इस साल कृषि,विनिर्माण, खनन और सेवा उद्योग में और खुलापन लाने के लिए कदम उठाये जाएंगे। इसके साथ ही पहले की तुलना में और अधिक क्षेत्रों में विदेशी निवेश के दायरे का विस्तार किए जाने पर भी इस एनपीसी में गंभीरता से विचार हो रहा है।

वहीं विदेशी निवेश को लेकर नकारात्मक सूची भी कम किए जाने पर प्रतिनिधि सहमत दिख रहे हैं। जबकि मुक्त व्यापार के पायलट क्षेत्र में खुलेपन की दिशा में भी काम जारी रहेगा। यह अपने आप में बड़ा कदम है कि चीन विदेशी निवेश को आकर्षित और प्रोत्साहित करने वाली नयी उद्योग सूची जारी करेगा। इसका फायदा जाहिर तौर पर विदेशी कंपनियों को मिलेगा।

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कहा जा सकता है कि चीन ने दुनिया के उन देशों को आइना दिखाने का काम किया है, जो अपने हितों को सर्वोपरि रख वैश्वीकरण की भावना को ठेस पहुंचा रहे हैं।

चुनौतियों का सामना कर रही है चीनी अर्थव्यवस्था

चीन विश्व की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, जो कि 130 खरब 60 अरब डॉलर की है। वैश्विक स्तर पर चीनी अर्थव्यवस्था के अनुपात की बात करें तो यह 15 फीसदी से भी अधिक है। इतना ही नहीं समूची दुनिया की आर्थिक वृद्धि में चीन 30 प्रतिशत का योगदान देता है।

हाल के वर्षों में चीन की विकास दर में गिरावट दर्ज की गयी है, चीनी आर्थिक विशेषज्ञ इसे स्वीकार करते हैं। चीनी प्रधानमंत्री ली खछ्यांग ने पांच मार्च को जो रिपोर्ट कांग्रेस के सम्मुख पेश की, उसमें भी चीनी अर्थव्यवस्था में मौजूद चुनौतियों और मुश्किलों का उल्लेख किया गया है, जिसमें घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय कारकों को जिम्मेदार ठहराया गया है। हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चीन सरकार की कोशिशों से चीनी अर्थव्यवस्था स्थिरता के साथ बढ़ रही है।

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वहीं अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि इस साल चीन की विकास दर 6.1 और 6.3 फीसदी के बीच स्थिर रहेगी। अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिए चीन रणनीति भी तैयार की है। जिसके तहत आपूर्ति पक्ष के ढांचागत सुधार पर ध्यान देते हुए आर्थिक ढांचे को बेहतर बनाया जाएगा। पिछले साल भी चीन ने वित्तीय नीति को पूरी तरह समर्थन दिया, विशेष रूप से उद्यमों के ऊपर से कर का बोझ हल्का किया गया।

इस साल भी चीन विनिर्माण उद्योग की दर को 16 फीसदी से कम कर 13 प्रतिशत पर लाएगा। माना जा रहा है कि इससे उद्यमों से लगभग 20 खरब युआन( एक युआन लगभग 10 रुपये के बराबर होता है) का बोझ कम होगा।

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यहां बता दें कि चीन के पास विश्व की सबसे बड़ी बैंकिंग परिसंपत्ति है, यह राशि 370 खरब डॉलर से भी अधिक है। इसके साथ ही चीन के पास 260 खरब डॉलर का बैंकिंग डिपॉज़िट है और 30 खरब अमेरिका डॉलर विदेशी मुद्रा भंडारण है। चीन का मानना है कि इसके चलते चीन किसी भी वित्तीय खतरे से निपटने में सक्षम है।

(चाइना मीडियाग्रुप के हिंदी रेडियो में वरिष्ठ पत्रकार अनिल आज़ाद पांडेय चीन-भारत मुद्दों पर अकसर भारतीय व अंतरराष्ट्रीय मीडिया में समसामयिक टिप्पणी लिखते हैं। इसके साथ ही ‘हैलोचीन’ पुस्तक के लेखक भी हैं।)

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