बस के नीचे आने से साथी छात्र की हुई मौत के बाद आक्रोशित करनाल आईटीआई के छात्रों को पुलिस ने दौड़ा-दौड़ाकर पीटा, लाठीचार्ज और हवाई फायरिंग भी की, साथ अध्यापकों और प्रिंसिपल को भी आईटीआई कैंपस में घुसकर बुरी तरह पीटा…

जनज्वार। 11 अप्रैल को करनाल में आईटीआई के एक छात्र की हरियाणा रोडवेज की बस के नीचे आ जाने से मौत हो गई, जिसके बाद आक्रोशित आंदोलनरत छात्रों ने आईटीआई चौक पर 12 अप्रैल को कहते हुए नेशनल हाइवे जाम कर दिया कि उनके साथी छात्र की मौत ड्राइवर की लापरवाही से हुई है।

छात्र की हादसे में मौत के बाद आंदोलनरत छात्रों से पुलिस की झड़प भी हुई। मीडिया में आ रही जानकारी के मुताबिक छात्र—पुलिसिया झड़प के दौरान दर्जनभर पुलिसकर्मी और घटना को कवर कर रहे 2-3 मीडियाकर्मियों समेत दर्जनों छात्र इस घटना में घायल हो गए। फिलहाल पुलिस ने इस मामले में 100 से भी ज्यादा छात्रों छात्रों और आईटीआई कर्मचारियों ​को हिरासत में लिया है। 

प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि पहले आंदोलनरत छात्रों ने पुलिस को दौड़ाया और उसके बाद पुलिसवालों ने विरोध कर रहे छात्रों को पीटा। आईटीआई के कुछ कर्मचारियों और प्रिंसिपल को भी पुलिस द्वारा पीटे जाने की बात सामने आ रही है। इस बात की पुष्टि इससे भी होती है कि पुलिस ने अभी आईटीआई के कई कर्मचारियों और छात्रों को अपनी हिरासत में रखा हुआ है।

दैनिक भास्कर में प्रकाशित खबर के मुताबिक पुलिस ने कक्षाओं में बैठी छात्राओं पर भी लाठीचार्ज किया, जिस कारण कुछ छात्राएं पेपर नहीं दे पाईं। वे पुलिसवालों के सामने रहम की भीख मांगती रहीं, मगर किसी का दिल नहीं पसीजा। किसी तरह कक्षा से बाहर पहुंची छात्रों ने वहां मौजूद लोगों से प्रार्थना की कि अंकल हमें पुलिस से बचा लो, ये लोग हमें जान से मार देंगे। किसी तरह बस अड्डे तक छुड़वा दीजिए।

इस घटना पर आईटीआई के प्रिंसिपल बलवान ने मीडिया को बताया कि, पुलिस के सामने जो पड़ा, उसी पर लाठियां भाजनी शुरू कर दीं। कक्षाओं में शांति से बैठी छात्राओं और स्टाफ रूप में बैठे कर्मचारियों तक को नहीं बख्शा गया। पुलिस सीसीटीवी के सबूत मिटाने के लिए डीवीआर भी चुराकर ले गई है।

घटनाक्रम के मुताबिक 11 अप्रैल को करनाल में आईटीआई के छात्र निकित की बस के नीचे आ जाने से मौत हो गई थी। करनाल के रिंडल के राकेश कुमार का बेटा निकित आईटीआई का छात्र था, जिसकी बस के नीचे दबने से मौके पर ही मौत हो गई। प्रत्यक्षदर्शी कह रहे हैं कि अंकित की मौत चलती बस में लटकने के कारण हुई, मगर मृतक छात्र निकित के साथी छात्रों का कहना था कि उनके दोस्त की मौत बस ड्राइवर की लापरवाही से गई थी।

छात्रों का आरोप है कि यहां पर चालक बसों को नहीं रोकते। छात्रों को बसों के पीछे मजूबरन भागना पड़ता है। निकित की मौत भी इसी वजह से हुई है। हम इस समस्या का स्थायी समाधान चाहते हैं। छात्रों का कहना है कि आराेपी ड्राइवर को पुलिस तत्काल गिरफ्तार करे और मृतक के परिजनों को आर्थिक सहायता दी जाए।

पहले भी हरियाणा रोडवेज के ड्राइवरों की लापरवाही से ऐसी घटनाएं होती रहती हैं। इससे पहले गवर्नमेंट काॅलेज के छात्र सागर की करनाल के सेक्टर-14 चौक पर इसी तरह बस की चपेट में आने से मौत हुई थी, जिसमें रोडवेज बस चालक की लापरवाही सामने आई थी। अंकित की मौत मामले में छात्रों ने जब आईटीआई चौक को विरोधस्वरूप जाम किया तो वहां पुलिस वाले उन्हें वहां से खदेड़ने पहुंच गई। गुस्साए छात्रों ने इसका विरोध किया तो और पुलिसवालों पर पत्थर बरसाए।

जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने छात्रों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा, उन पर लाठीचार्ज किया और हवाई फायरिंग भी की। पुलिसिया कार्रवाई से बेकाबू छात्रों ने भी पुलिस पर खूब पत्थर बरसाए। मगर पुलिस ने भी इस घटना में लड़कियों को तक नहीं बख्शा। पुलिस की कार्रवाई में कुछ छात्राओं को भी चोट आई है, जिससे तनाव और अफरातफरी का माहौल पैदा हो गया। डर के मारे लोग इधर—उधर भागने लगे, जिस कारण पुलिस को ट्रैफिक डायवर्ट करना पड़ा।

बकौल पुलिस हमें जानकारी मिली थी कि 250—300 छात्र आईटीआई के मुख्य गेट पर हैं और जीटी रोड को जाम किया हुआ है, जिसको रोकने के लिए पुलिस वहां पहुंची। मगर कुछ शरारती छात्रों ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया, जिस कारण भारी संख्या में पुलिसवालों को चोटें आईं। दर्जनों छात्रों को भी पुलिसिया मार में गंभीर चोटें आई हैं।

वहीं आंदोलनरत छात्रों का कहना है कि पुलिस ने उन पर लाठीचार्ज किया, उन्हें दौड़ा—दौड़ाकर पीटा और उन पर हवाई फायरिंग भी की। हमारे अध्यापकों और प्रिंसिपल को भी आईटीआई कैंपस में घुसकर बुरी तरह पीटा। इस मामले में पुलिस ने अब तक 100 से भी ज्यादा छात्रों को हिरासत में लिया है। इस सम्बन्ध में थाना सिविल लाईन में 148,149,341,332,353 व 8 नेशनल हाईवे एक्ट के तहत पुलिस ने मामला दर्ज किया है।

गौरतलब है कि आईटीआई चौक पर महीनों से सड़क खुदी पड़ी है और मनमाने अतिक्रमण के चलते पार्किंग भी मनमाने तरीक़े से होती है। बसें स्टॉप पर रुकतीं तक नहीं। सबसे बड़ी बात यह है कि करनाल मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का विधानसभा क्षेत्र है। सवाल है कि जब यहां की क़ानून व्यवस्था इतनी लचर है और महीनों से सड़कें खुदी हुई और अतिक्रमण ग्रस्त हों तो बाकी राज्य की कानून व्यवस्था का हाल क्या होगा।

यहां पर जो हालात बने हुए हैं, वह मौत को दावत देते प्रतीत होते हैं, और कानून व्यवस्था भी जैसे किसी कांड का ही इंतजार कर रही थी।

सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञ पूर्व आईपीएस वीएन राय कहते हैं, ‘जिस इमारत की खिड़कियाँ टूटी छोड़ दी जाएँ, वहाँ बड़ा हादसा होगा ही। खट्टर के करनाल में सड़कें गड्ढों और अतिक्रमण के लिए जानी जाती हैं। छोटे-मोटे हादसे होते ही रहते हैं, अब एक छात्र की जान जाने से तूफ़ान मच गया है। इतने महत्वपूर्ण चौक पर विकास के नाम पर सड़कें महीनों से खुदी पड़ी हैं और मनमाने अतिक्रमण ने सभी सड़क इस्तेमाल कर्ताओं को अस्तव्यस्त रखा हुआ है। वाहन पार्किंग जहाँ तहाँ मनमाने तरीक़े से होती है। बसें भी स्टॉप पर नहीं रुकतीं। ज़ाहिर है ऐसे में सभी को मानो किसी बड़ी त्रासदी की प्रतीक्षा थी। मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र में भी क़ानून व्यवस्था की रोज़मर्रा की रूटीन लापरवाही ही इस बड़े कांड के पीछे है।’


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