Last Update On : 27 06 2018 04:57:31 PM

इतिहास में पहली बार राजघाट स्थित गांधी समाधि पर लगा ताला, विश्व ​​हिंदू परिषद ने की वहां अपनी दो दिन की कार्यशाला

जो गांधी वैमनस्यता और सांप्रदायिकता के खिलाफ संघर्ष में मारे गए, जिन विचारों के लोगों ने उनकी हत्या की, आज वही लोग उसी गांधी समाधि पर नफरत की राजनीति फैलाने की बना रहे हैं रणनीति

29 को गांधी शांति प्रतिष्ठान, गांधी स्मारक निधि और गांधी के विचारों को मानने वाले दिल्ली समेत देश भर में विश्व हिंदू परिषद के अतिवादी रवैए के खिलाफ करेंगे प्रदर्शन

जनज्वार, दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली के राजघाट पर महात्मा गांधी की वह समाधि है जहां देश-दुनिया के हजारों लोग हर दिन प्रणाम करने अौर प्रेरणा लेने अाते हैं। लेकिन यह समाधि स्थल बगैर किसी सूचना के विश्व हिंदू परिषद के कार्यक्रम के लिए 24—25 जून को बंद कर दिया गया और इसकी किसी को कानोंकान खबर नहीं थी।

रविवार 24 जून को कागज पर लिखी एक सूचना राजघाट के प्रवेश-द्वारों पर चिपका दी गई। सूचना में कहा गया कि 24 अौर 25 जून को राजघाट बंद रहेगा। पर यह फैसला किसने किया, क्यों किया अौर जो अाज तक कभी नहीं हुअा था, वैसा फैसला करने पीछे कारण क्या रहा, इसकी कोई जानकारी नागरिकों को दी नहीं गई।

गांधी शांति प्रतिष्ठान और गांधी स्मारक निधि की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है, ‘लेकिन सच तो सच है जो छुपाने-दबाने-ढकने से रुकता नहीं है। तो सच यह है कि 24-25 जून के दो दिनों में, राजघाट के ठीक सामने स्थित गांधी स्मृति व दर्शन समिति के परिसर में विश्व हिंदू परिषद की बैठक चल रही थी जिस कारण राजघाट पर ताला जड़ दिया गया।

प्रेस विज्ञप्ति में आगे कहा गया है कि हमें पता नहीं है कि गांधी स्मृति व दर्शन समिति, जो गांधीजी की स्मृतियों अौर विचार को जीवंत रखने के उद्देश्य से बनाई गई थी, उसे किसी निजी संस्था की बैठकों के लिए किस अाधार पर दिया गया। अौर वह भी विश्व हिंदू परिषद जैसी संस्था को जिसका कभी दूर-दूर से भी महात्मा गांधी के अादर्शों व विचारों से नाता नहीं रहा है।

गौरतलब है कि गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति ही गांधी समाधि की देखरेख करता है और ​संचालन की जिम्मेदारी उसी को है। गांधी स्मारक निधि के अध्यक्ष प्रधानमंत्री मोदी, उपाध्यक्ष केंद्रीय संस्कृति मंत्री महेश शर्मा हैं।

गांधीवादी संस्थाओं की सूत्रों की मानें तो गांधी समाधि पर ताला लगवाने और कार्यक्रम करने की इजाजत देने की हिम्मत संस्कृति मंत्री महेश शर्मा में नहीं है, इतना बड़ा फैसला लेने की हिम्मत विश्व हिंदू परिषद को तभी हुई होगी जब प्रधानमंत्री के यहां से हरी झंडी मिली हो।

गांधी शांति प्रतिष्ठान के अध्यक्ष कुमार प्रशांत कहते हैं, ‘जब भी कोई सत्ताधारी अौपचारिकता पूरी करने राजघाट अाता है तो कुछ समय के लिए राजघाट सामान्य जनता के लिए बंद कर दिया जाता है। लेकिन 24 अौर 25 जून को कौन कुर्सीधारी वहां अाया था? अौर दो दिनों की बंदी का अौचित्य क्या था? न राजघाट प्रशासन ने, न दिल्ली सरकार ने अौर न केंद्र सरकार ने इस बारे में कोई स्पष्टीकरण अाज तक दिया है।’

कुमार प्रशांत आगे कहते हैं, ‘विश्व हिंदू परिषद हो कि दूसरी कोई भी संस्था, सबको यह हक है ही कि वे अपनी विचार-बैठकें अपनी सुविधा की जगहों पर करें, लेकिन किसी को भी यह हक नहीं है कि वह किसी सार्वजनिक जगह का मनमाना इस्तेमाल करे। बापू-समाधि जैसी पवित्र जगह तो किसी ऐसे सार्वजनिक स्थल की श्रेणी में भी नहीं अाती है जिसका सरकार या सरकार की अाड़ में चलने वाली कोई संस्था अपने हित के लिए मनमाना इस्तेमाल करे, जब चाहे, उसे ताला मार दे।’

कुमार प्रशांत और गांधी स्मारक निधि के अध्यक्ष रामचंद्र राही की ओर से संयुक्त रूप से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि इतिहास गवाह है कि उसके एक थपेड़े से न जाने कितनी सत्ताएं अौर सत्ताधीश काल के गाल में समा गये हैं अौर समाज अपने पवित्र प्रतीकों के साथ अागे बढ़ता गया है राजघाट की मनमाना तालाबंदी पवित्र राष्ट्र-भावना का अपमान है।

दोनों ही संस्थाओं के प्रमुखों ने कहा है कि हम इसकी निंदा ही नहीं करते हैं, बल्कि समता व समानता के मानवीय मूल्यों में अास्था रखने वालों सारे देशवासियों से अपील करते हैं कि वे इस मनमानी अौर अपमान का खुला निषेध करें तथा शुक्रवार 29 जून 2018 को अपने नगर-गांव-कस्बे के गांधी-स्थल पर बड़ी संख्या में जमा हों अौर सरकार की इस मनमानी के विरुद्ध अावाज उठाएं. हमें याद रखना चाहिए कि वह शुक्रवार का ही दिन था जब अाज से कोई 70 साल पहले महात्मा गांधी को गोली मारी गई थी।

29 को देश भर में होने वाले प्रदर्शन के बारे में दोनों गांधीवादी संस्थाओं का कहना है कि सत्ता की मनमानी का सशक्त निषेध 29 जून को हमारा कार्यक्रम होगा। हम चाहते हैं कि केंद्र में हो कि राज्यों में, अक्ल के बंद दरवाजे खुलें। हम उस पर यह पहली दस्तक दे रहे हैं।