Last Update On : 28 10 2018 07:00:26 PM
पुरानी दिल्ली की प्रतिकात्मक फोटो

दिल्ली विश्वविद्यालय में साहित्य के शिक्षक रहे वरिष्ठ लेखक आनंद प्रकाश से लीजिए इस कमाल के किस्से का आनंद

जनज्वार। अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त इतिहासकार बिपीन चंद्रा को जो नब्बे के दशक में जे.एन.यू. से रिटायर हुए, शुरू में दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कालेज में पढ़ाते थे। तब उन्हें सिर्फ़ दो शौक थे, मार्क्सवादी पुस्तकें पढ़ना और हिंदू कालेज-सेंट स्टीफेंंस के बीच क्रिकेट मैच देखना। इन दोनों में उन्हें कौन ज़्यादा प्रिय था, यह कहना मुश्किल था।

उन दिनों वह कालेज के स्टाफ़ क्वार्टर्स में रहते थे। उनकी पत्नी भारत सरकार के किसी मंत्रालय में वरिष्ठ अधिकारी थी और प्राय: व्यस्त रहती थी। बिपन का कार्यक्षेत्र घर और कालेज, या फिर विश्वविद्यालय की आर्ट्स फ़ैकल्टी तक सीमित था। वहां वह पूरे उत्साह से वर्ग संघर्ष का सच छात्रों को समझाते।

एक रविवार सुबह खुशनुमा थी और श्रीमती बिपीन ने अचानक कबाब बनाने की ख़्वाहिश ज़ाहिर की। बिपीन ने ख़ुश होकर कहा: “यह तो बहुत अच्छा है, कबाब बनाते हैं। क्या करना होगा?”

श्रीमती बिपीन ने कहा, “आप तीमारपुर जाकर क़ीमा ले आएं, कबाब मैं बना दूंगी।”

तीमारपुर उनके क्वार्टर से महज़ एक-डेढ़ किलोमीटर दूर था। बिपन साहिब ने जोश में आकर कहा, “मैं पैदल जाता हूं और क़ीमा लेकर तुरंत लौटता हूं। इस बहाने सैर भी हो जाएगी। तुम तैयारी शुरू करो, मैं अभी आया!”

प्रसिद्ध इतिहासकार बिपिन चंद्रा : दीवानगी क्रिकेट और इतिहास की

इधर श्रीमती बिपीन ने मसाले निकालने शुरू किए और उधर बिपन साहिब ने थैला उठाया और तीमारपुर की तरफ़ रवाना हो गए। रास्ते में दिल्ली विश्वविद्यालय का क्रिकेट ग्राउंड पड़ता था और वहां उस दिन हिंदू कालेज और सेंट स्टीफ़ेंस के बीच क्रिकेट मैच चल रहा था।

बिना अधिक सोचे बिपीन साहिब के पांव उधर मुड़ गए। वहां कई दोस्त बैठे थे और उनमें दोनों टीमों के खिलाड़ियों की ख़ूबियों-ख़ामियों पर बारीक चर्चा चल रही थी। इतिहासकार बिपन साहिब को भी दोनों टीमों के इतिहास का नक़्शा पूरी तरह याद था, मसलन कि पिछले साल या उससे पहले किस टीम ने क्या नीति अपनाई थी और उसकी बदौलत क्या ख़ामियाज़ा भुगतना पड़ा था। फिर, बातचीत, चाय, और हल्के खानपान का दौर शुरू हो गया।

ख़ैर, इस तरह शाम होने लगी और अचानक एक ख़ास मौक़े पर हिंदू कालेज के एक बल्लेबाज़ ने धुंआधार रन बनाने शुरू किये। नतीज़तन देखते न देखते हिंदू कालेज की टीम विरोधी टीम को हराने में कामयाब हो गई। ज़ोरदार तालियों की गड़गड़ाहट ख़त्म हुई तो एक दोस्त ने टिप्पणी करते हुए कहा: “आज तो मज़ा आ गया, हिंदू ने सेंट स्टीफ़ेन्स का क़ीमा बना दिया।”

बिपीन साहिब ने क़ीमा सुना तो ज़ोर से उछले और कहा, “क़ीमा!”
दोस्तों ने उन्हें अचरज से देखा और कहा, क्या हुआ बिपन?
बिपीन साहिब फिर ज़ोर से उछले और कहा, “क़ीमा!”