सैकड़ों बार कलक्टर के माध्यम से उत्तर प्रदेश सरकार एवं प्रधानमंत्री को इस संबंध में ज्ञापन भेज चुके हैं, मगर निरंकुश सरकार जनता के साथ लगातार फरेब करती चली आ रही है….

देवरिया से अरविंद गिरी की रिपोर्ट

जनज्वार। योगीराज में उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में गन्ना किसानों का आंदोलन बैतालपुर चीनी मिल को चलाने के लिए लगातार 100 दिन से जारी है। किसान लंबे समय से ब्रजेंद्र मणि त्रिपाठी के नेतृत्व में बैतालपुर चीनी मिल को दोबारा चलाने की मांग के साथ आंदोलनरत हैं।

गौरतलब है कि बैतालपुर चीनी मिल को थापर ग्रुप ने मायावती सरकार में इस चालबाजी के साथ खरीदा था कि चीनी मिल हम सरकार के अनुक्रम में चलायेंगे और पूर्वांचल के नौजवानों को रोजगार मुहैया करायेंगे, जिससे युवाओं के पलायन पर रोक लगेगी।

बेतालपुर चीनी मिल को खरीदने के बाद थापर ग्रुप ने पूर्वांचल के जनता के साथ धोखाधड़ी कर मिल को सरकार से मिलीभगत कर स्क्रैप को बेचने का कार्य शुरू कर दिया। क्षेत्र की जनता ने देवरिया की धरोहर कहकर मिल के स्क्रैप को बचाने के लिए सरकार से लेकर उच्च न्यायालय इलाहाबाद का भी दरवाजा खटखटाया। दबाव डालकर मिल को फिर से चलाने का आदेश भी कराया और स्क्रैप पर रोक लगाई।

चीनी मिल चलाओ संघर्ष समिति, बैतालपुर के अध्यक्ष ब्रजेंद्र मणि त्रिपाठी लगातार उत्तर प्रदेश में योगी सरकार बनने के बाद से मिल को चलाने के लिए आंदोलन करते आ रहे हैं। ब्रजेंद्र मणि कहते हैं, सैकड़ों बार कलक्टर के माध्यम से उत्तर प्रदेश सरकार एवं प्रधानमंत्री को इस संबंध में ज्ञापन भेज चुके हैं, मगर निरंकुश सरकार जनता के साथ लगातार फरेब करती चली आ रही है।

आंदोलनकारी कहते हैं, देश—प्रदेश में गन्ना की सियासत कर भाजपा ने सरकार बनाई, मगर गन्ना किसानों के हिस्से सिर्फ ठगी आई। भाजपा किसान विरोधी है। किसान पिछले 100 दिनों से बैतालपुर चीनी मिल को चलाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। किसानों के साथ की गई नाइंसाफी भाजपा, मोदी—योगी को महंगी पड़ेगी। विधानसभा चुनाव में गन्ना किसानों से वादा करने के बाद भी बैतालपुर चीनी मिल को चलाया नहीं गया। सरकार को चाहिए कि गन्ना किसानों से किया अपना वादा पूरा करे।

गौरतलब है कि पथरदेवा में अपनी सरकार के कैबिनेट मंत्री सुरेंद्र प्रताप शाही के चाचा रविन्द्र किशोर शाही की पुण्यतिथि में जब योगी आदित्यनाथ आए थे तो उन्होंने बैतालपुर की चीनी मिल को दोबारा चलाने के लिए हज़ारों लोगों के बीच घोषणा की, मगर यह घोषणा सिर्फ चुनावी जुमला और जनता के साथ एक बार फिर धोखाधड़ी साबित हुई।

जब योगी सरकार अपने वादों को भूल गई तो चीनी मिल चलाओ संघर्ष समिति ने लोगों के बीच जा अनिश्चितकालीन धरने का निर्णय लिया। संघर्ष समिति ने 7 दिसम्बर, 2018 को कलेक्ट्रेट परिसर देवरिया में अनिश्चितकालीन धरने की घोषणा कर दी और सैकड़ों किसानों के साथ धरना शुरू कर दिया।

चीनी मिल चलाओ संघर्ष समिति के आंदोलन और मांग को बैतालपुर के किसानों, जनता, व्यापारियों, वकीलों, महिलाओं और विभिन्न राजनीतिक दलों का समर्थन प्राप्त हो रहा। किसानों ने अपनी मांगों को लेकर लगातार उत्तर प्रदेश सरकार और केन्द्र सरकार के पूर्व सूक्ष्म लघु मंत्री कलराज मिश्र को घेरना शुरू किया, मगर राजनीति के धुरंधर मंत्री ने किसानों को दरकिनार कर अपनी नाकामी के लिए जनता से दूरी बनानी शुरू कर दी। जब कभी भी आंदोलनकारी किसानों ने उनसे मिलने का प्रयास किया उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष से ही मुलाकात करा पल्ला झाड़ने की कोशिश की।

सत्तासीनों की बेरुखी देख चीनी मिल चलाओ संघर्ष समिति के नेतृत्व में अपनी मांगों को लेकर पिछले 100 दिनों से किसान आंदोलित हैं। जिस दिन लोकसभा चुनाव के लिए आचार संहिता की घोषणा चुनाव आयुक्त द्वारा की जा रही थी, उस दिन किसान-नौजवान सदर सांसद को कोस रहे थे कि जनता इसका बदला चुनाव में लेगी। किसान कह रहे थे चीनी मिल चलाओ संघर्ष समिति बैतालपुर का आंदोलन तब तक चलेगा, जब तक कलराज मिश्र और नरेन्द्र की सरकार को किसान-मजदूर उखाड़ नहीं फेंकेंगे।


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