Last Update On : 07 08 2018 11:21:21 PM

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा अब इस मामले की जांच करेगी सीबीआई 

जैसा कि हर अपराध के बाद होता है, देवरिया बालिका गृह बलात्कार कांड में भी होना शुरू हो गया है। हाइकोर्ट के बंद करने के आदेश के बावजूद सरकार और उसके मंत्रियों पर कार्रवाई की जगह अधिकारी सिर्फ मामूली अधिकारी नप रहे हैं, जो साल-छह महीने में फिर इन नेताओं की कृपा से नौकरी में लौट आएंगे…

देवरिया, जनज्वार। उत्तर प्रदेश में देवरिया के बालिका गृह रेप केस और 18 लड़कियों के गायब होने के मामले में योगी सरकार द्वारा सस्पेंड डीपीओ को आज बर्खास्त किए जाने पर जिले के नए डीएम अमित किशोर ने कहा कि डीपीओ ने भारी गलती की थी। बालिका गृह की मान्यता खत्म होने के बाद भी यहां लड़कियां भेजे जाने में उनकी बराबर की भूमिका थी, इसलिए उन्हें सजा मिल गई है। इस मामले में और भी दोषी अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री की चर्चित सामूहिक विवाह योजना की जिम्मेदारी भी मां विंध्यवासिनी महिला प्रशिक्षण एवं समाज सेवा संस्थान को दी गई थी, जिसकी पैरवी करते हुए देवरिया के तत्कालीन डीएम ने कहा था यह महिलाओं के लिए काम करने वाली सबसे जिम्मेदार संस्था है, जबकि उसकी मान्यता 3 साल पहले खत्म हो चुकी थी।

यह भी पढ़ें : देवरिया बालिका सुधार गृह से 18 बच्चियां-महिलाएं गायब, इसमें बलात्कार के आरोपियों को बचाने का हुआ है खेल

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अब इस मामले की जांच सीबीआई करेगी। योगी ने मीडिया से कहा, ‘अब तक हुई जांच में जितने भी अधिकारी जिम्मेदार पाए गए हैं, सभी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई है। इसके अलावा देवरिया के जिलाधिकारी समेत कई अन्य अधिकारियों को चार्जशीट सौंपी गई है।’

पुलिस ने अब तक इस रूह को कंपा देने वाले मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया है। बालिका गृह की संचालिका गिरिजा त्रिपाठी की बेटी कंचन लता त्रिपाठी को भी आज गोरखपुर से हिरासत में लिया गया है। जबकि बच्ची की शिकायत के बाद ही गिरिजा त्रिपाठी और उसके पति मोहन त्रिपाठी को परसों देर रात तो उसके बेटे प्रदीप त्रिपाठी को पुलिस कल ही गिरफ्तार कर चुकी थी।

 बच्चियों को अपनी संस्था में शरण देने के नाम पर शासन—प्रशासन से सांठगांठ कर उनके जिस्म का धंधा करने वाली वाली गिरिजा त्रिपाठी की बेटी कंचन त्रिपाठी गोरखपुर में एक ओल्ड एज होम का संचालन व देखरेख करती है। कहा जा रहा है कि इस कांड के तार वहां से भी जुड़े हुए हैं। पुलिस ओल्ड एज होम पर भी कार्रवाई करेगी।

गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने लोकसभा में देवरिया शेल्टर होम मामले पर बयान देते हुए कहा कि बालिका संरक्षण गृह में हुई इस जघन्य वारदात पर यूपी सरकार ने जितनी जल्दबाजी में कार्रवाई की, वह तारीफ के काबिल है। उसके बाद हमारी सरकार ने पूरे देशभर के बाल सुधार गृहों की जांच के आदेश जारी कर दिए हैं, ताकि इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके। योगी सरकार ने तुरंत हाई लेवल कमेटी गठित की है ताकि जांच में पारदर्शिता रहे। राजनाथ सिंह के शब्दों में कहें तो ‘इस कमेटी में एडीजी और एडिशनल चीफ सेक्रेटरी शामिल हैं। सरकार की तारीफ इसलिए भी की जानी चाहिए कि उसने तुरंत डिस्ट्रिक्ट प्लानिंग आफिसर को सस्पेंड किया और संचालिका को गिरफ्तार किया।’ मगर असल सवाल है कि शासन—प्रशासन असली मुजरिमों पर हाथ क्यों नहीं डाल रहा है।

मां विध्यवासिनी शेल्टर होम मामले को लेकर प्रदेश की महिला एवं बाल विकास मंत्री रीता बहुगुणा जोशी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि हमारी सरकार दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी। हमने जो हाई लेवल टीम गठित की थी, उसने वहां जाकर मुक्त करायी बच्चियों से अलग-अलग बात की है।

रीता बहुगुणा जोशी ने प्रेस को बताया कि मां विध्यवासिनी शेल्टर होम को 2010 में मान्यता मिली थी और 2014 तक इन्हें कई तरह की मान्यता मिलीं, जिसमें शेल्टर होम को शिशु बाल गृह, पालना गृह सहित कई और मान्यता भी मिली थी, जिसे रद्द कर दिया था और यह बालिका गृह गैरकानूनी रूप से चल रहा था। सवाल है कि आखिर शासन—प्रशासन की नाक के नीचे 3 साल से बच्चियों का धंधा करने वाला यह शेल्टर कैसे चल रहा था और किस बिना पर पुलिस वहां लड़कियों को छोड़कर जा रही थी।

इस मामले में एक बात और गौर करने वाली बात है कि संचालिका गिरिजा त्रिपाठी ने खुद स्वीकारा है कि यहां 42 लड़कियां थीं, मगर सिर्फ 24 यहां से पुलिस ने मुक्त कराई सवाल है कि आखिर शेष बच्चे कहां गये? इस संबंध में संस्था के रजिस्टर में भी कोई जानकारी नहीं है। रीता बहुगुणा के मुताबिक जल्द ही गायब लड़कियों का पता लगाया जाएगा।

गौरतलब है कि यह खौफनाक घटना सामने आने के बाद मुख्यमंत्री योगी ने प्रदेश के अन्य शेल्टर होम की भी जांच के आदेश जारी किए हैं।

संस्था से मिले रजिस्टर के मुताबिक बीते तीन सालों के दौरान देवरिया पुलिस ने 707 लड़कियों को गिरिजा देवी के शेल्टर होम में भेजा था, ​जिनमें से 697 लड़कियों को बाद में परिवार के साथ भेजा जा चुका था जबकि 10 लड़कियां बालिका गृह में ही रह रही थीं। रजिस्टर के मुताबिक ही 2016-17 में 262, 2017-18 में 320 और 2018-19 में 125 लड़कियां यहां आईं। इस मामले में रीता बहुगुणा ने यूपी पुलिस को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि मान्यता रद्द होने के बावजूद पुलिस लड़कियों को वहां क्यों भेज रही थी, इसकी भी जांच की जा रही है।