Last Update On : 06 11 2018 12:17:46 AM
प्रभाकर चौधरी की फोटो उनके फेसबुक से

मानिटरिंग सेल की मीटिंग में जिला जज के सामने ही पुलिस कप्तान प्रभाकर चौधरी और बार अध्यक्ष ने वकीलों के साथ मारपीट की। जवाबी कार्रवाई में वकीलों ने पुलिस कप्तान का मोबाइल छीन लिया और कप्तान के पीआरओ को जूतों से पीटा…

अरविंद गिरि की रिपोर्ट

जनज्वार। उत्तर प्रदेश के सीतापुर में पुलिस कप्तान प्रभाकर चौधरी द्वारा बिना कोई नोटिस दिये सीतापुर क्लब कैफे में 31 अक्टूबर को अवैध कब्जे को लेकर छापेमारी की गई और कई सीनियर अधिवक्ताओं को गिरफ्तार कर लिया। इससे वकीलों में भारी रोष फैल गया।

वकीलों के मुताबिक पुलिस कप्तान प्रभाकर चौधरी ने साजिशन अपने दलबल के साथ क्लब में रात में छापेमारी की। उसमें सुनियोजित तरीक़े से शराब की बोतलें बरामद दिखाई गईं और क्लब कैफे पर आने—जाने से रोक लगा दी गई। क्लब कैफे पर रोक लगाने के बाद प्रभाकर चौधरी ने पांच वकीलों के घर छापेमारी कर उनकी गिरफ्तारी की और सीतापुर क्लब कैफे पर कब्जे को अवैध करार देते हुए कोतवाली में वकीलों को बैठा लिया।

वकीलों का कहना है कि जहां सुप्रीम कोर्ट भी अवैध कब्जे को हटाने के लिए विधिक तरीक़े का पालन करता है, वहीं प्रभाकर चौधरी ने सारे नियम—कानूनों की धज्जियां उड़ाईं। जब वकीलों की गिरफ्तारी की सूचना सीतापुर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष हरीश द्विवेदी को हुई तो उन्होने सैकड़ों वकीलों के साथ कोतवाली जाकर अपने वकीलों को पुलिस लॉकअप से छोड़ने की बात कही, जिस पर कोतवाल ने पुलिस कप्तान के संज्ञान का हवाला देकर वकीलों को छोड़ने से साफ मना कर दिया।

प्रभाकर चौधरी द्वारा वकीलों को न छोड़ने की बात पर अध्यक्ष समेत सभी वकील तैश में आ गए। वकीलों ने पुलिस कप्तान से फोन पर ही साथियों को छोड़ने की सिफारिश की, मगर पुलिस कप्तान ने वकीलों की जिला जज के सामने मानिटरिंग सेल की मीटिंग में जिला जज से शिकायत करने के बाद वकीलों को देख लेने की बात कह दी।

मानिटरिंग सेल की मीटिंग में जिला जज के सामने ही पुलिस कप्तान प्रभाकर चौधरी और बार अध्यक्ष ने वकीलों के साथ मारपीट की। जवाबी कार्रवाई में वकीलों ने पुलिस कप्तान का मोबाइल छीन लिया और कप्तान के पीआरओ को जूतों से पीटा। जज के चैम्बर में जिला जज के सामने पुलिस और वकीलों के बीच इस मारपीट की घटना ने न्यायालय जजों, अधिवक्ता और पुलिस को शर्मसार किया।

वकीलों के मुताबिक पुलिस कप्तान प्रभाकर चौधरी ने गिरफ्तार किये गए अधिवक्ताओं पर लॉकअप के अन्दर टार्चर किया है और उनपर लूट—डकैती, सरकारी कार्यों में बाधा डालने समेत रासुका जैसी गम्भीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर 25000 हजार का ईनाम घोषित कर दिया, जिसके विरोध में सीतापुर बार एसोसिएशन, लखनऊ बार एसोसिएशन, वाराणसी बार एसोसिएशन, बलिया बार एसोसिएशन, सुल्तानपुर बार एसोसिएशन, गोण्डा बार एसोसिएशन समेत उत्तर प्रदेश की सभी बार एसोसिएशनों ने हडताल पर रहकर पुलिस प्रशासन के विरुद्ध आर—पार की लड़ाई लड़ने का मूड बनाया।

आईपीएस प्रभाकर का वकीलों से विवाद का पुराना रहा है नाता
आईपीएस प्रभाकर चौधरी की तैनाती आगरा जिले के लोहामंडी में 2013 में रही थी, वे वहां क्षेत्राधिकारी रह चुके हैं। वहां वकील नितिन वर्मा के छोटे भाई अभिषेक वर्मा को तब 14 मई 2013 को कोबरा पुलिस ने मोटरसाइकिल से टक्कर मार दी, जिसमें वह बुरी तरह घायल हो गये जिसकी शिकायत तत्कालीन सिटी एसपी पवन से की थी, जिसको लेकर प्रभाकर चौधरी ने रार पाल ली थी। तब प्रभाकर चौधरी अपने साथ लोहामंडी थाना प्रभारी त्रिपुरेर कौशिक समेत पवन कुमार, दुर्गेश सिंह, उदयवीर सिंह समेत दस—बारह पुलिस कांस्टेबलों को लेकर अभिषेक वर्मा के घर में घुस गए और उनके सभी परिजनों को बुरी तरह पीटा।

उस पिटाई में अभिषेक वर्मा की पत्नी के पेट में पल रहे नवजात शिशु की मृत्यु हो गई, जिसकी शिकायत तब अधिवक्ता नितिन वर्मा ने आईजी, डीआईजी समेत सभी उच्च अधिकारियों से की थी, मगर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

कोई कार्रवाई न होते देख नितिन वर्मा ने महामहिम राज्यपाल महोदय से प्रभाकर चौधरी के खिलाफ शिकायत की, जिसके बाद राज्यपाल ने जिलाधिकारी की देखरेख में इस कांड की मजिस्ट्रेटियल जांच करायी, जिसमें आईपीएए प्रभाकर चौधरी पर थानों की पोस्टिंग में घूस लेने का दोषी पाया गया और अन्य पुलिसकर्मी भी दोषी पाये गये। इसकी रिपोर्ट सीवीसीको भेज दी गई।

अधिवक्ता नितिन वर्मा ने मानवाधिकार आयोग को भी पत्र भेजकर शिकायत की, जिस पर आईपीएस प्रभाकर चौधरी समेत आरोपी सातों पुलिसकर्मियों पर दो दो लाख का जुर्माना मानवाधिकार आयोग के आदेश पर लगाया गया।

उत्तर प्रदेश के देवरिया जनपद में भी पुलिस अधीक्षक प्रभाकर चौधरी की पोस्टिंग 2015 में अग्नि शमन अधिकारी के बतौर हुई थी, जहां उन्होंने अपने साथी पुलिसकर्मियों के साथ अधिवक्ता अभिषेक मिश्रा की दुकान तोड़ दी और उनके साथ मारपीट की। इसकी जानकारी होने पर जिला बार एसोसिएशन ने पुलिस अधीक्षक से आर पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया और सिविल कोर्ट में हड़ताल कर तत्कालीन जिलाधिकारी अनिता श्रीवास्तव के कार्यालय को घेर लिया। इसमें अनिता श्रीवास्तव की गाड़ी को अधिवक्ताओं ने गुस्से का शिकार बनाया, जिसके बाद जिलाधिकारी अनिता श्रीवास्तव प्राइवेट गाड़ी से आवास पर चली गईं।

इस घटना के बाद तीन अधिवक्ताओं पर प्रभाकर चौधरी ने एफआईआर दर्ज करा दी, जिसके बाद अधिवक्ताओं के भीतर और गुस्सा बढ़ गया। परिणामस्वरूप पुलिसकर्मियों को न्यायालय में दौड़ा—दौड़ाकर मारा। अंत में पुलिस कप्तान प्रभाकर चौधरी को झुकना पड़ा और मुकदमा वापस लिया।