Last Update On : 07 03 2018 09:29:00 PM

सरकार ने दिया सलवार, चुन्नी और साड़ी का विकल्प, जींस-टॉप का कोई ऑप्शन ही नहीं

जयपुर, जनज्वार। भाजपा शासन में अब कॉलेज गोइंग लड़कियां जींस टॉप और अपनी पसंद की कोई ड्रेस नहीं पहन पाएंगी, ऐसा इसलिए क्योंकि भारतीय संस्कृति में लड़कियों के लिए ऐसे कपड़े वर्जित हैं उन्हें सलवार कमीज या साड़ी पहननी चाहिए।

जी हां, अब राजस्थान सरकार कॉलेजों में भी ड्रेस कोड लागू करने जा रही है। स्कूल से निकलने के बाद लड़कियां ड्रेस से मुक्ति के बाद अपनी पसंद के कपड़े कॉलेज जाने के लिए पहनती थीं, मगर लड़कियों की पहनने ओढ़ने की यही स्वच्छंदता लगता है भाजपा सरकार को रास नहीं आ रही, तभी तो वह जबरन छात्र—छात्राओं पर ड्रेस कोड लागू करने जा रही है।

राजस्थान के कॉलेज शिक्षा विभाग की संयुक्त निदेशक डॉ. ज्योत्सना भारद्वाज ने इन मुद्दे पर कहती हैं, कॉलेजों से ड्रेस के रंग वगैरह पर जवाब मिल जाने के बाद नए सत्र से इसे लागू कर दिया जाएगा, जिससे बाद छात्रों के लिए ड्रेस में आना अनिवार्य होगा।

जहां कॉलेज यूनिफॉर्म में भगवा रंग शामिल करने की चर्चा भी की जा रही है, वहीं ड्रेस कोड लागू करने पर छात्र खासकर लड़कियां खासा आक्रोशित हैं। जयपुर की मिताली जो सेकेंड ईयर की स्टूडेंट है, कहती है सरकार का यह तालिबानी फैसला हम लड़कियों के लिए ही खासतौर पर है। भाजपा और आरएसएस के आदर्श में चूंकि पाश्चात्य कपड़े खासकर जींस—पैंट लड़कियों के लिए फिट नहीं बैठते, इसलिए कॉलेज की लड़कियों को साड़ी या सूट सलवार पहनाने की तैयारी कर रही है।

राजस्थान की शिक्षामंत्री किरण माहेश्वरी कॉलेजों में ड्रेस कोड लागू करने पर भाजपा सरकार का बचाव करते हुए कहा है कि ‘यह छात्रों की ही मांग थी कि उनके कॉलेजों में ड्रेस कोड होना चाहिए, जिससे ये साफ रहे कि कौन कॉलेज का स्टूडेंट है। हमने ये नहीं कहा कि ड्रेस किसी खास रंग की होनी चाहिए, ड्रेस का रंग तो छात्रों को ही चुनना है।’

वहीं कांग्रेस ने भी भाजपा सरकार के इस निर्णय का विरोध करना शुरू कर दिया है। कांग्रेस ने इस निर्णय को तालिबानी करार देते हुए राजस्थान की भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ का एजेंडा लागू करने की एक कोशिश के तहत यह फैसला लिया जा रहा है।

कॉलेजों में ड्रेस कोड लागू करने के मुद्दे पर कांग्रेस नेता गोविंद सिंह दातोसर ने कहा कि ‘राजस्थान में सरकार आरएसएस के इशारे पर चल रही है। पहले पाठ्यक्रम में बदलाव किए गए, फिर स्कूल में भगवा कपड़े पहनने का नोटिस दिया। अब सबकुछ भगवा करके ये सबको बाबा बनाना चाहते हैं।’