डीयू के पंजाबी विभागाध्यक्ष को छात्रों द्वारा भगत सिंह शहादत दिवस मनाया जाना नहीं आया रास तो पोस्टर फाड़कर फेंक दिये और भविष्य में इस तरह की किसी भी गतिविधि में भाग न लेने की छात्रों को दे दी सख्त चेतावनी, चेतावनी न मानने पर परिणाम भुगतने की भी दी थी धमकी….

जनज्वार। दिल्ली विश्वविद्यालय में पंजाबी विभाग के छात्र अपने विभाग के खिलाफ आमरण अनशन पर बैठे हुए हैं। उनके अनशन को तीन दिन हो गए हैं। इन छात्रों को कैंपस के अंदर कम्बल या रजाई लेन की इजाजत नहीं दी गई।

जाड़े की ठंडी रातों में ठिठुरते हुए भी छात्र अपना अनशन जारी रखे हुए हैं। वहीं अनशन पर बैठी एक छात्रा की हालत गंभीर हो रही है, दूसरी तरफ इन 3 दिनों में प्रशासन ने बहुत ही संवेदनहीन और गैर जिम्मेदाराना रवैया अपनाया है।

घटनाक्रम के मुताबिक इन छात्रों ने 23 मार्च को भगतसिंह को शहादत दिवस के अवसर पर भगतसिंह का पोस्टर चिपकाया था। विभागाध्यक्ष को छात्रों द्वारा इस तरह से भगत सिंह का शहादत दिवस मनाना अच्छा नहीं लगा। उन्होंने भगत सिंह का पोस्टर फाड़ कर फेंक दिया और भविष्य में इस तरह की किसी भी गतिविधि में भाग न लेने की सख्त चेतावनी दी।

साथ ही भगत सिंह छात्र एकता मंच की अध्यक्ष राजवीर कौर को परीक्षा में न बैठने देने की धमकी दी, किन्तु जब विश्वविद्यालय प्रशासन उसे परीक्षा में बैठने से नही रोक पाया तो जान—बूझकर फेल कर दिया गया। इसी तरह की धमकियां संगठन से जुड़े अन्य छात्रों को भी विश्वविद्यालय प्रशासन की तरफ से दी जाती रही हैं।

प्रशासन की ओर से अनशनरत छात्रों से बातचीत की कोई पहल नहीं की गई और न ही अनशन पर बैठे छात्रों का मेडिकल चेकअप कराया गया। कल देर रात जब अनशनरत छात्रा राजवीर कौर की हालात बिगड़ी तो आनन फानन में प्रशासन ने सीएमओ को भेजा। सीएमओ ने राजवीर की हालत को गंभीर बताया और अनशन तोड़ने की अपील की।

सीएमओ के मुताबिक छात्र नेता राजवीर की हालत नाजुक है, उसे तुरंत भर्ती करने की जरूरत है किडनी फेल होने का खतरा है। मगर अनशनरत छात्रा राजवीर कौर ने अस्पताल में भर्ती होने से इनकार कर दिया और कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नही हो जाती वो अपना अनशन नही तोड़ेंगी।

आंदोलनरत सभी छात्र भगतसिंह छात्र एकता मंच से जुड़े हुए हैं। भगतसिंह छात्र एकता मंच के सभी सदस्य भगतसिंह के विचारों के प्रचार प्रसार में गोष्ठी और सांस्कृतिक कार्यक्रम के माध्यम से सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। ये सभी छात्र अपनी इसी सक्रियता की वजह से प्रशासन की आंख में किरकिरी बने हुए हैं।

जिस छात्रा राजवीर कौर की हालत अनशन के चलते खराब हो रही है वह दिल्ली विश्वविद्यालय में एम फिल की छात्रा हैं। उन्होंने वर्ष 2017 में पंजाबी विभाग में प्रवेश लिया है। गौरतलब है कि राजवीर केा कोर्स वर्क में लगातार दूसरी बार फेल किया गया है।

राजवीर ने पंजाबी विभाग पर प्रक्रियागत अनियमितता का भी आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हे उनके विभागाध्यक्ष ने 2 दिन के भीतर बिना किसी कमेटी मीटिंग के परीक्षा देने के लिए बाध्य किया। छात्रों की मांग है कि विभागीय अनियमितताओं की जांच के लिए एक स्वतंत्र जांच कमेटी का गठन हो।

विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ अनशनरत छात्रों की मांग है कि प्रशासन द्वारा राजवीर के रिजल्ट में भेदभाव की जांच के लिए एक स्वतंत्र जांच कमेटी का गठन किया जाए। साथ ही दीवार पत्रिका या पर्चे के माध्यम से अपने विचार को छात्रों के सामने रखने की आजादी का लिखित आश्वासन दिया जाए।

छात्रों की मांग यह भी है कि पंजाबी विभागाध्यक्ष द्वारा शहीदों के अपमान एवं दुर्व्यवहार के लिए सामूहिक माफी मंगवाई जाए या उनको पद से बर्खास्त किया जाए। साथ ही पंजाबी भाषा को सम्मान दिया जाय और यह सुनिश्चित किया जाय कि पंजाबी विभाग के सभी सूचनापत्र व पाठ्यक्रम पंजाबी में हो। इसके साथ—साथ पंजाबी विभाग में पीने के पानी और लाइब्रेरी की व्यवस्था उपलब्ध कराई जाये।