Last Update On : 04 06 2018 08:18:00 AM

जहर पीने के बाद भर्ती हुई एक महिला की इलाज के दौरान हो गई थी मौत तो परिजनों ने अस्पताल में हंगामा कर इंजेक्शन लगाने वाली नर्स के साथ की थी मारपीट, जिसके बाद हड़ताल पर चले गए थे 800 जूनियर डॉक्टर और नर्स

रांची, जनज्वार। झारखंड के राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (रिम्स) में डॉक्टरों और नर्सों के 1 जून की रात को हड़ताल पर जाने के बाद 3 जून तक वहां तकरीबन डेढ़ दर्जन मरीजों की मौत हो गई। मुख्यमंत्री की सख्ती के बाद स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी और मुख्य सचिव ने गुस्साए डॉक्टरों से बातचीत की, जिसके बाद कल शाम को जूनियर डॉक्टरों और नर्सों ने अपनी हड़ताल वापस लेने का फैसला किया।

गौरतलब है कि रिम्स की एक नर्स पर इलाज के दौरान मर चुके एक मरीज के परिजनों द्वारा किए गए हमले के बाद जूनियर डॉक्टरों और नर्सों ने हड़ताल कर दी थी। मरीज के परिजनों का कहना था कि नर्स की लापरवाही के चलते मरीज की मौत हुई है, जबकि जिस मरीज की मौत हुई उसे जहर खाने के बाद अस्पताल में भर्ती किया गया था।

जानकारी के मुताबिक 1 जून की रात केा एक नर्स के इंजेक्शन देने के बाद रिम्स में जहर खाने के बाद इलाज के लिए भर्ती गीता देवी की मौत हो गई थी, जिसके बाद गीता देवी के परिजनों ने नर्स के साथ बदसलूकी और मारपीट की। इसी के विरोध में 2 जून की सुबह से जूनियर डाक्टर और नर्स हड़ताल पर चले गए और रिम्स में नए मरीजों की भर्ती पर रोक लगा दी गई।

डॉक्टरों और नर्सों के हड़ताल पर जाने से स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई। प्रभात खबर के मुताबिक इस दौरान तकरीबन डेढ़ दर्जन लोगों की मौत हो गई। इतनी बड़ी संख्या में इलाज के अभाव में मरीजों के दम तोड़ने के बाद मामला राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने संज्ञान में लिया और हड़ताली डॉक्टर और नर्स जल्द से जल्द काम पर वापस लौटें।

मुख्यमंत्री रघुवर दास ने ट्वीट किया कि, ‘रिम्स में अराजकता बर्दाश्त नहीं की जायेगी। अपनी बात रखने का हक सबको है, लेकिन कायदे से। मैं हड़ताली कर्मियों से काम पर जल्द वापस लौट आने की अपील करता हूं। स्वास्थ्य मंत्री और मुख्य सचिव को वार्ता कर मामले का जल्द निपटारा करने के निर्देश दिए हैं।’

मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद मुख्य सचिव सुधीर त्रिपाठी और स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रबंशी ने रिम्स के हड़ताली डॉक्टरों और नर्सों से बातचीत की, जिसके बाद कल शाम डॉक्टरों और नर्सों ने हड़ताल वापस ली।

गौरतलब है कि हड़ताल के दौरान 2 और 3 मई को रिम्स से दो हजार से अधिक मरीजों को बिना इलाज वापस लौटना पड़ा। गंभीर रूप से बीमार मरीजों को उनके परिजन महंगे और मनमानी फीस वसूलते अस्पतालों में भर्ती करने को विवश हुए, तो डेढ़ दर्जन बेबस लोगों ने अस्पताल में ही दम तोड़ दिया।

डॉक्टरों और नर्सों की सख्त रुख के दौरान मरीजों के परिजनों ने अस्पताल परिसर में कल 3 मई की सुबह धरना—प्रदर्शन भी किया कि स्वास्थ्य कर्मी अपनी जिस छोड़कर काम पर लौटें।

सांसद महेश पोद्दार की अपील के बावजूद नर्स डॉक्टर हड़ताल तोड़ने को तैयार नहीं हुए थे। सांसद ने आश्वासन दिलाया था और मरीजों के परिजनों से भी अपील की थी कि एक परिवार की गलती की सजा अस्पताल में इलाज करा रहे सैकड़ों-हजारों मरीजों को नहीं दी जा सकती, इसलिए वे अपने फैसले पर पुनर्विचार करें और जल्द से जल्द काम पर लौटें। उनकी समस्याओं का समाधान जरूर होगा।

वहीं महेश पोद्दार ने मरीजों के परिजनों से भी अपील की थी कि वे अस्पताल के डॉक्टरों और मरीजों के साथ मारपीट न करें। रिम्स अस्पताल से हर दिन सैकड़ों लोग स्वस्थ होकर जाते हैं, उनकी देखभाल यही डॉक्टर और नर्स करते हैं। किसी भी की मौत दुखदायी होती है, लेकिन नियति भी कोई चीज है, इसे स्वीकार करना चाहिए। कोई डॉक्टर या नर्स नहीं चाहता कि जिसका वे इलाज कर रहे हैं, उसकी मौत हो जाये।