Last Update On : 25 12 2017 11:12:00 PM

देश में यह दूसरा मामला जब दाढ़ी रखने के कारण मुस्लिम छात्रों को एनसीसी ट्रेनिंग से वंचित कर दिया हो, इससे पहले हैदराबाद में हो चुका है ऐसा बेइज्जत करने वाला व्यवहार 

जनज्वार, दिल्ली। 19 दिसंबर से दिल्ली के रोहिणी इलाके में चल रहे 10 दिनों के एनसीसी कैंप में शामिल होने गए जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के उन 11 छात्रों को अफसरों से बाहर निकाल दिया, जिन्होंने धार्मिक कारणों से दाढ़ी कटवाना मुनासिब नहीं समझा।

कैंप से बाहर ढकेल दिए गए जामिया मिल्लिया इस्लामिया के ये छात्र अपने कैंपस लौट आए हैं और ये कल से ही ये भूख हड़ताल पर हैं। इनकी अपने विश्वविद्यालय जामिया से मांग है कि वह उन्हें कैंप का सर्टिफिकेट मुहैया कराए, तभी वह भूख हड़ताल खत्म करेंगे। छात्रों का कहना है कि ट्रेनिंग से वह वंचित अपनी कमी से नहीं बल्कि एनसीसी अफसरों की हठधर्मिता और सांप्रदायिक मनोस्थिति के कारण हैं, इसलिए विश्वविद्यालय इस ट्रेनिंग के दौरान मिलने वाले सर्टिफिकेट को देना सुनिश्चित करे।

गौरतलब है कि 19 दिसंबर को दिल्ली के जामिया मिल्लिया विश्वविद्यालय से 35 छात्र एनसीसी के ट्रेनिंग कैंप में गए थे, जहां इस बार उन्हें ट्रेनिंग के बाद सी सर्टिफिकेट मिलना था। 35 छात्रों में से 11 के दाढ़ी थी, जिसको सेव करने के लिए पहले दिन से ही एनसीसी अधिकारी दबाव बनाने लगे थे। पर छात्रों ने धार्मिक कारणों से दाढ़ी बनवाने का परहेज रखा, जिसके कारण उन्हें आखिरकार 24 दिसंबर को कैंप से बाहर कर दिया गया।

हालांकि इस बारे में एनसीसी अधिकारियों का कहना है कि सिख समुदाय से वास्ता रखने वालों के अलावा एनसीसी के कोड आॅफ कंडक्ट में किसी अन्य धर्म के व्यक्ति को दाढ़ी रखने की सुविधा नहीं है।

लेकिन तीसरे साल के छात्र मोहम्मद हमजा का कहना है कि मैं कम से कम 30 एनसीसी कैम्प में शामिल हो चुका हूं, लेकिन कभी कोई समस्या नहीं हुई। पिछले एक साल से हालात बहुत बदल गए हैं, जब से हमारे नए कमांडिंग ऑफिसर (सीओ) ने कार्यभार संभाला है। मोहम्मद हमजा ने रोहिणी कैंप के बारे में बताया कि पहले दिन सबकुछ ठीक रहा, लेकिन दूसरे दिन हमारे सीनियर्स ने कहा कि कैंप में दाढ़ी नहीं चलेगी।

जामिया स्टुडेंट्स फोरम के मीरन हैदर के अनुसार जामिया के वीसी तलत महमूद ने आश्वस्त किया है कि इस बारे में वह जांच समिति का गठन करेंगे और जानने की कोशिश करेंगे कि असल में हुआ क्या है? वहीं छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालय में एनसीसी के इंचार्ज रजनीश कुमार ने छात्रों के साथ हुए गलत व्यवहार में कोई साथ नहीं दिया। छात्रों ने रजनीश कुमार को एनसीसी इनचार्ज के पद से हटाए जाने की मांग की है।

2015 में भी ऐसा ही एक मामला सामने आया था जब आंध्र प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग ने एनसीसी निदेशक से जवाब मांगा था। आयोग यह सवाल रक्षा मंत्रालय से भी पूछ चुका है और मामला अभी लंबित है।