Last Update On : 12 06 2018 06:04:32 PM

आत्महत्या का कारण माना जा रहा पारिवारिक, मॉडलिंग से मॉडर्न आध्यात्मिक गुरु तक की उनकी जीवन यात्रा रही है बड़ी दिलचस्प

इंदौर, जनज्वार। फैशन डिजाइनर से आध्यात्मिक गुरु बने भय्यूजी महाराज ने आज अपने सिर पर गोली मारकर आत्महत्या कर ली। आत्महत्या का कारण पारिवारिक कलह और तनाव माना जा रहा है।

पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक भय्यूजी महाराज ने अपनी लाइसेंसी रिवॉल्वर से अपने सिर में गोली मारी। जब उन्होंने यह कृत्य किया तब वह अपने खंडवा रोड स्थित मकान की पहली मंजिल पर थे। गोली की आवाज सुनने के बाद परिजन उनके कमरे की ओर दौड़े। लहूलुहान हालत में भय्यूजी को बॉम्बे अस्पताल पहुंचाया गया। आईसीयू में भर्ती किया गया, मगर उन्हें बचाया नहीं जा सका।

भय्यूजी महाराज का एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ है। अंग्रेजी में लिखे इस नोट में उन्होंने लिखा है, ‘किसी को वहां परिवार की देखभाल के लिए होना चाहिए। मैं जा रहा हूं… काफी तनावग्रस्त, परेशान था।’

राजनीतिक रूप से ताकतवर संतों में गिने जाने वाले भय्यू जी महाराज की प्रसिद्धि और शोहरत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उनके काफिले में कई गाड़ियां चलती थीं। उनके शिष्यों में फिल्मी सितारों से लेकर जाने—माने राजनेता शामिल हैं। हमेशा उनके आश्रम में इन लोगों की भीड़ रहती थी।

राजनीति में इनकी पैठ का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि हाल में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कुछ अन्य संतों के साथ इन्हें राज्यमंत्री का दर्जा दिया था, लेकिन इन्होंने राज्यमंत्री पद ठुकरा दिया था।

आत्महत्या के बाद उन्हें इंदौर के बॉम्बे अस्पताल में ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उनके मौत की पुष्टि की। गौरतलब है कि भय्यूजी महाराज ने कुछ समय पहले 49 वर्ष की उम्र में पहली पत्नी की मौत के बाद दूसरी शादी की थी। शादी को लेकर उठे सवाल पर उन्होंने कहा था कि उन्होंने अपनी बेटी और मां का ख्याल रखने के लिए शादी की है। भय्यूजी महाराज की बेटी पुणे में रहकर पढ़ाई करती है।

प्रधानमंत्री बनने से पहले गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी जब सद्भावना उपवास पर बैठे थे, तो उनका उपवास भय्यू महाराज ने ही खुलवाया था।

अपनी देखरेख में सदगुरु दत्त धार्मिक ट्रस्ट चलाने वाले भय्यूजी महाराज का नाम सबसे पहले उस समय चर्चा में आया था जब अन्ना आंदोलन के समय उन्होंने सरकार के साथ बातचीत में बड़ी भूमिका अदा की थी। अन्ना हजारे का अनशन इनकी मध्यस्थता के बाद ही टूटा था। इसके लिए शरद यादव ने भय्यू जी महाराज की जमकर आलोचना भी की थी।

वर्ष 1968 में पैदा हुए भय्यू महाराज का असली नाम उदयसिंह देखमुख था। शुजालपुर के जमींदार परिवार से ताल्लुक रखने वाले भय्यूजी महाराज ने मॉडलिंग का करियर छोड़कर आध्यात्म का रास्ता चुना था। वे ख्यात सियाराम शूटिंग के मॉडल रह चुके हैं।

भय्यूजी महाराज के आश्रम में आने वाली ख्यात हस्तियों में पूर्व प्रेसिडेंट प्रतिभा पाटिल, पीएम नरेंद्र मोदी, महाराष्ट्र के पूर्व सीएम विलासराव देखमुख, शरद पवार, लता मंगेशकर, उद्धव ठाकरे और मनसे के राज ठाकरे, आशा भोंसले, अनुराधा पौडवाल, फिल्म अभिनेता मिलिंद गुणाजी समेत कई नाम शामिल हैं।

आध्यात्मिक गुरु के अलावा उनका नाम सामााजिक कार्यों में भी वे बढ़—चढ़कर हिस्सेदारी करते थे। अब तक वे हजारों कन्‍याओं का विवाह करवा चुके हैं। पर्यावरण को लेकर चिंतित रहने वाले भय्यूजी महाराज की मध्‍य प्रदेश और महाराष्‍ट्र में कई जलाशयों के पुनर्निर्माण में महत्‍वपूर्ण भूमिका रही है। वृक्षारोपण अभियान और संविधान की प्रतियों को बांटने का अभियान भी उनकी एक सार्थक पहलकदमी मानी जाती है।

राजनीति में भय्यूजी महाराज का झुकाव किसी एक दल की तरफ नहीं रहा। कांग्रेस, बीजेपी, शिव सेना समेत अन्य कई दलों के दिग्गज नेताओं के साथ उनके बहुत अच्छे संबंध रहे। राजनीति में आने के कई आॅफर मिलने के बावजूद वे कभी राजनीति में नहीं उतरे।

मामले की जांच कर रहे पुलिस महानिरीक्षक मकरंद देवस्कर ने कहा सुसाइड नोट और पिस्टल बरामद कर ली गई है। मामले की जांच की जा रही है, जिसके तहत परिवार के सदस्यों भी पूछताछ की जाएगी।

भय्यूजी महाराज की मौत पर दुख व्यक्त करते हुए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट किया, “संत भय्यूजी महाराज को सादर श्रद्धांजलि। देश ने संस्कृति, ज्ञान और सेवा की त्रिवेणी व्यक्तित्व को खो दिया। आपके विचार अनंत काल तक समाज को मानवता की सेवा के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करेंगे।”

(नरेंद्र मोदी का अनशन तुड़वाते हुए भय्यूजी महाराज की फाइल फोटो)