Last Update On : 13 08 2018 10:08:35 AM

सोमनाथ चटर्जी के पिता जहां दक्षिणपंथी राजनीति के बहुत करीबी थे बल्कि अखिल भारतीय हिंदू महासभा जैसे संगठनों के संस्थापक रहे, वहीं सोमनाथ ने करियर की शुरुआत वामपंथी पार्टी सीपीएम के साथ की…

जनज्वार। 10 बार सांसद रहे लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी का दिल का दौरा पड़ने के बाद निधन हो गया। मामूली हार्ट अटैक के बाद हालांकि उन्हें अस्पताल में भर्ती करा दिया गया था, मगर उनकी हालत संभल नहीं पाई।

89 वर्षीय सोमनाथ चटर्जी लंबे समय से डायलिसिस पर थे। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही उनका ब्रेन हैमरेज भी हुआ था। मीडिया में आई खबरों के मुताबिक, ‘पिछले 40 दिनों से चटर्जी का इलाज चल रहा था। स्वास्थ्य में सुधार के संकेत मिलने के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिली थी, लेकिन केवल तीन दिन बाद 7 अगस्त को उन्हें दोबारा हालत बिगड़ने के बाद अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था।’

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही सोमनाथ चटर्जी की पत्नी रेणु चटर्जी का भी निधन हुआ है। अब उनके पीछे परिवार में एक पुत्र और दो पुत्रियां हैं।

2004 से 2009 के बीच लोकसभा अध्यक्ष रहे सोमनाथ चटर्जी को उनकी पार्टी माकपा ने संप्रग-1 सरकार से समर्थन वापस लेने के बाद लोकसभा अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने से उनके इनकार के बाद 2008 में पार्टी से निष्कासित कर दिया था।

25 जुलाई 1929 को असम के तेजपुर में जन्मे सोमनाथ चटर्जी के पिता का नाम निर्मल चंद्र चटर्जी और मां का नाम वीणापाणि देवी था। पेशे से वकील उनके पिता अखिल भारतीय हिंदू महासभा के संस्थापकों में शामिल थे।

सोमनाथ चटर्जी कोलकाता और ब्रिटेन में मिडिल टैंपल से लॉ की पढ़ाई करने के बाद कलकत्ता हाईकोर्ट में वकील बन गए थे, मगर इसके बाद उन्होंने राजनीति में आने का फैसला किया। वह लोगों के बीच एक प्रखर वक्ता के तौर पर जाने जाते थे।

सोमनाथ चटर्जी का राजनीतिक जीवन तमाम विरोधाभाषों के साथ शुरू हुआ। उनके पिता जहां दक्षिणपंथी राजनीति के बहुत करीबी थे बल्कि अखिल भारतीय हिंदू महासभा जैसे संगठनों के संस्थापक रहे वहीं सोमनाथ ने करियर की शुरुआत घोर वामपंथी पार्टी सीपीएम के साथ 1968 में की।

1971 में पहली बार वह सांसद चुने गये और फिर 10 बार लोकसभा के सांसद बने। उनका नाम देश के सबसे लंबे वक्त तक सांसद रहने वाले नेताओं में शामिल है। राजनीति में सोमनाथ चटर्जी की पहचान एक सम्मानीय नेता के तौर पर रही

35 साल लंबे समय तक सांसद के तौर पर देश की सेवा करने के लिए 1996 में उन्हें सर्वश्रेष्ठ सांसद के पुरस्कार से भी नवाजा गया था। वर्ष 2004 में 14वीं लोकसभा के लिये उन्हें सभी दलों की सहमति से लोकसभा का अध्यक्ष चुना गया था।