प्रतीकात्मक फोटो

सामूहिक बलात्कार के तमाम निशानदेहियों—जख्मों से भरी बच्ची बेहोशी की हालत में सड़क पर मिली, जहां से उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। फिलहाल उसकी हालत गंभीर बनी हुई है…

जनज्वार। ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ सिर्फ नारा है, क्योंकि अगर यह हकीकत होता तो दिन—ब—दिन असुरक्षित हो रहीं बेटियों—बच्चियों के साथ होने वाली हैवानियत की घटनाओं से अखबार पटे नहीं रहते। मानसिक विक्षिप्तों की भीड़ में शुमार हो चुके हैवानों को 6 माह की बच्ची से लेकर 70 साल की बुढ़िया तक में दिखाई देती है तो सिर्फ योनि, अगर ऐसा न होता तो हर रोज घटने वाली दर्जनों—दर्जन बलात्कार की घटनाएं न सुनाई देतीं।

आज ऐसा ही एक मामला सामने आया है जुर्म का दूसरा नाम बन चुके उत्तर प्रदेश में। एनडीटीवी में छपी खबर के मुताबिक उत्तर प्रदेश के महोबा जिले के मुख्यालय नवीन गल्ला मंडी के पास एक घुमंतू परिवार की सो रही ढाई साल की बच्ची को कल 15 नवंबर की रात को झोपड़ी में घुसकर बलात्कारी उठा ले गए। उसके बाद उसका दुष्कर्म कर उसे सड़क पर लहूलुहान हालत में फेंककर भाग गए।

सामूहिक बलात्कार के तमाम जख्मों से भरी बच्ची बेहोशी की हालत में सड़क पर मिली, जहां से उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। फिलहाल उसकी हालत गंभीर बनी हुई है।

पुलिस अधीक्षक कुंवर अनुपम सिंह ने मीडिया को बताया कि “गुरुवार 15 नवंबर की मध्यरात्रि को दो या तीन अज्ञात बदमाशों ने सड़क किनारे झोपड़ी बनाकर रह रहे घुमंतू जाति (पछइया लोहार) के एक परिवार में धावा बोलकर ढाई साल की बच्ची का अपहरण कर लिया और उसे लेकर फरार हो गए। सुबह बच्ची खून से लथपथ झोपड़ी से काफी दूर सड़क किनारे बेहोशी की हालत में फेंकी हुई मिली है।”

शुरुआती छानबीन के बाद पुलिस अधीक्षक ने बताया किबच्ची की हालत देखकर ऐसा लग रहा है कि उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया है। फिलहाल, बच्ची को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है और घटना के खुलासे के लिए अपराध शाखा (क्राइम ब्रांच) के अलावा पुलिस की तीन टीमें गठित की गई हैं। आसपास लगे सीसीटीवी के फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं, जिससे बलात्कारियों को पकड़ा जा सके।


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