Last Update On : 13 10 2018 02:12:33 PM

क्या संयोग है कि जीडी अग्रवाल की मौत वहीं हुई, जहां गांधी जी की शिष्या मीरा बेन का आश्रम हुआ करता था, मुश्किल से सौ मीटर दूर…

उमेश चंदोला का विश्लेषण

ऋषिकेश में मेरा बचपन गुजरा। शिक्षा हुई। भारत के अन्य धार्मिक स्थलों की तरह धर्म—अधर्म, मुर्गा—दारू की कॉकटेल ऋषिकेश हरिद्वार का भी अंग रही है। साथ ही सच्चे साधुओं के मर्डर, अवैध शारीरिक संबंध, आश्रम सम्पति के लिए क्रूरतम ढंग से हत्यायें एक आम परिघटना के रूप में 1990 के दिनों में थी।

एक अपेक्षाकृत बहुत बेहतर आश्रम में संगीत विभाग के एक बाबा ने बताया कि यहां दूध चार ग्रेड का मिलता है। लाखों रुपए डोनेशन दो तो मरने तक आराम से एसी कमरों में रहो। यानर बाज़ार के नियमों को अति श्रद्धा से माना जाता था। ये तो आम आदमी का अनुभव ही है कि सीजन में धर्मशालाओं में सैकड़ों हजारों प्रतिदिन का किराया देना पड़ता है। बाज़ार की ये भी सुविधा है कि आप अपने इनकम टैक्स की चोरी में भी आश्रम के संस्कृत विद्यालयों, गोशालाओं की पूरी मदद ले सकते हैं।

मध्य तथा उच्च स्तरीय भक्त वृन्द को भी प्रभावित करने में गोशाला औऱ फ़्री संस्कृत विद्यालयों का बड़ा हिस्सा है। ग़रीब, अनाथ बच्चा मजदूरों की संस्कृत भाषा का प्रयोग देश—विदेशों से आए भक्तों को कर्मकांड, गंगा आरती में प्रभावित करने में होता है। सुबह 4 बजे ये मजदूर उठा दिये जाते हैं।

सच्चे साधु अक्सर गंगा में कूदकर आत्महत्या कर लेते थे। ऐसे काम से कम एक साधु बाबा काली कमली के पास रहा करते थे। आश्चर्य नहीं कि 2011 के बाद मातृ सदन के एक औऱ सच्चे गंगा पुत्र की सरेआम इस भारतीय समाज सरकार ने हत्या की है।

आईपीसी 302 हरिशंकर परसाई जी का व्यंग्य “एक गोभक्त से भेंट” याद है। दुबारा पढ़िये। कैसे हम भारतीय लोगों को ढोंगियों का विश्व गुरु खिताब मिलना ही चाहिए। गाय, गंगा स्त्री जिसे हम पूजते हैं उसी की दुर्दशा कर डालते हैं। परसाई जी कहते हैं कि गाय आरएसएस के लिए एक राजनीतिक पशु है जिससे वोट झड़ते हैं।

मातृ सदन (हरिद्वार ऋषिकेश का एक मात्र धार्मिक आश्रम) ने साबित किया है कि गंगा अरबों रुपए की वर्षा करने वाली “पवित्र” नदी है। अग़र गाय को देखें तो आरएसएस प्रमुख ही नहीं बालयान के रूप मे दो लोग पशु चिकित्सा डिग्री धारकों के हेतु कुछ भी नहीं हुआ। लिप सर्विस भी नहीं।

विदेशी खासकर होलस्तान फ्रेसन गाय तीन बार से ज़्यादा नहीं ब्याती। नर गोपशु दूसरी समस्या है। दोनों का हल है कि बढ़िया नस्ल की देसी गाय का जर्मप्लाज्म ए आई जे माध्यम से फैलाया जाये। दूसरा एनडीआरआई, करनाल में केवल मादा वाला वीर्य अलग करने की सुविधा कई सालों से मौजूद है, पर मल्टीनेशनल कंपनी की दवाएं ज़्यादा महत्त्व की हैं। किसान बरबाद करो, सस्ता मारूति का मज़दूर बनाओ। करोड़ों की संख्या में अपने ही कन्याओं के गर्भगृह में ही हत्या रे समाज को देखना है? तिस पर साल में दो बार नवरात्रि का ढ़ोंग। उफ। कितना घृणित समाज है विश्व गुरुओं का।

जहां एम्स में सानन्द सरस्वती यानी जीडी अग्रवाल की ह्त्या हुई है, हत्यारे वही थे जिन्होंने इस देश के एक सच्चे हिंदू गांधी को मारा था। क्या संयोग है कि जीडी अग्रवाल की मौत वहीं हुई, जहां गांधी जी की शिष्या मीरा बेन का आश्रम हुआ करता था, मुश्किल से सौ मीटर दूर।

भाजपा कांग्रेस के राजनीतिक गिद्धों ने लाश पर मंडराना शुरू कर दिया है। गंगा यमुना नदी को बर्बाद करने वाले श्री श्री जैसे संत बदस्तूर मानव मल, साबुन, कैमिकल युक्त पानी, आश्रम रूपी फाइव स्टार होटल से फेंकना जारी रखेंगे। सुबह शाम भारतीय, विदेशी मालदार भक्त “गंगा आरती” को एन्जॉय करते रहेंगे। आप अगर नहीं जा पा रहे तो यू ट्यूब हाज़िर है हुजूर!