क्रामकपा नेता सुधन प्रधान कहते हैं केंद्र और राज्य सरकारें जनता की भावनाओं से खिलवाड़ कर रही हैं। केंद्र अगर पृथक गोरखालैंड सीधे तरीके से नहीं देगा तो गोरखाओं को उंगुली टेढ़ी करनी भी आती है…

दार्जिलिंग। अलग राज्य के लिए संघर्षरत विभिन्न संगठनों की समिति गोरखालैंड आंदोलन समन्वय समिति (जीएमसीसी) ने अपनी विभिन्न मांगों के साथ गृहमंत्री राजनाथ सिंह के साथ एक बैठक की थी। दिल्ली में हुई बैठक में गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने प्रस्ताव रखा था कि वो गोरखालैंड पर तभी बात करेंगे जब अनिश्चितकालीन बंद स्थगित किया जाएगा और जो लोग पृथक राज्य के लिए आमरण अनशन कर रहे हैं, वो अपना अनशन तोड़ेंगे। शायद गृहमंत्री की अपील का ही असर है कि पहाड़ पर आमरण अनशन खत्म कर दिया गया है, मगर अनिश्चितकालीन बंद करने की कोई घोषणा नहीं की गई है।

गौरतलब है कि पृथक गोरखालैंड की मांग को लेकर गोजयुमो युवा मोर्चा के सदस्य 20 दिन से भी अधिक समय से आमरण अनशन पर बैठे हुए थे। पहाड़ के विभिन्न जगहों पर ये लोग आमरण अनशन कर रहे थे, कुछ अनशनकारियों की हालत लगातार खराब भी हो रही थी, डॉक्टर कह चुके थे कि किसी के साथ कभी भी कोई अनहोनी हो सकती है।

14 अगस्त को दार्जिलिंग में गोजमुमो विधायक अमर सिंह राई ने आमरण अनशन कर रहे आंदोलनकारियों का अनशन जूस पिलाकर खत्म कराया, तो कालिम्पोंग, कर्सियांग तथा मिरिक में भी आमरण अनशनकारियों ने अनशन तोड़ दिया है।

हालांकि अनशन वापस लिए जाने से जीएमसीसी के अंदर मतभेद शुरू होने की खबरें आ रही हैं। कहा जा रहा है कि आंदोलनकारी संगठनों में अगर मतभेद हुए तो इसका सीधा असर अलग राज्य की मांग पर पड़ेगा।

आमरण अनशन खत्म किए जाने और बेमियादी बंद कब तक जारी रहेगा? के जवाब में गोजमुमो सुप्रीमो विमल गुरुंग कहते हैं कि गोरखालैंड मूवमेंट को-ऑर्डिनेशन कमेटी (जीएमसीसी) ने गृहमंत्री राजनाथ सिंह से पृथक गोरखालैंड मुद्दे पर बातचीत की थी। बातचीत में राजनाथ सिंह जी ने बेमियादी बंद खत्म और युवा मोर्चा से आमरण अनशन खत्म करने की अपील की थी। गृहमंत्री की इस अपील का सम्मान का सम्मान करते हुए ही आंदोलनकारियों ने आमरण अनशन खत्म किया। इसका मतलब यह नहीं है कि हम गोरखालैंड की मांग से पीछे हट गए हैं। हमारा गोरखालैंड राज्य का सपना जरूर पूरा होगा।’

अनशनकारियों के भूख हड़ताल खत्म किए जाने का गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने स्वागत किया। साथ ही इस मुद्दे पर पहल लेते हुए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से कहा कि दार्जिलिंग में गतिरोध खत्म करने के लिए वे आंदोलनरत संगठनों बातचीत से बातचीत करें। साथ ही पर्वतीय भूभाग में जल्द से जल्द इंटरनेट और केबल चैनलों की बहाली समेत पिछले दो महीने से भी ज्यादा वक्त से लोग जिन परेशानियों का सामना कर रहे हैं उनके समाधान की तरफ कदम बढ़ायें। गौरतलब है कि पृथक राज्य की मांग के समर्थन में दार्जिलिंग में पिछले दो महीने से ज्यादा समय से अनिश्चितकालीन बंद चल रहा है, जिसे पहाड़ी भूभाग के आम लोगों का पूरा समर्थन है।

हालांकि आंदोलनकारियों द्वारा आमरण अनशन वापस लेने के मुद्दे पर क्रांतिकारी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी का रुख निराशाजनक रहा। उसका कहना है कि आम जनता में अनशन वापस लेने से निराशा है। क्रामकपा नेता सुधन प्रधान कहते हैं कि केंद्र और राज्य सरकारें जनता की भावनाओं से खिलवाड़ कर रही हैं। केंद्र अगर पृथक गोरखालैंड सीधे तरीके से नहीं देगा तो गोरखाओं को उंगुली टेढ़ी करनी भी आती है।’

क्रामकपा नेता की मानें तो चूंकि इस आंदोलन में गोरखा बुद्धिजीवियों की उपस्थिति नगण्य है इसलिए आज तक राज्य हासिल नहीं हो पाया है। नेता और बुद्धिजीवी अपने इगो को एक तरफ रख साथ मिलकर यह लड़ाई लड़ेंगे तो आंदोलन को मजबूती मिलेगी। केंद्र सरकार पर पृथक राज्य के लिए दबाव बढ़ाने हेतु जुलूस और सभाओं को और ज्यादा व्यापक पैमाने पर करने की जरूरत है।


जन पत्रकारिता को सहयोग दें / Support people journalism


Facebook Comment