पुलिस स्टेशन पर हमले के लिए गोजमुमो को आरोपित किए जाने पर मोर्चा का कहना है कि हम पर गलत आरोप मढ़े जा रहे हैं। इस तरह की हरकतें वो लोग कर रहे हैं जो नहीं चाहते कि अलग गोरखालैंड बने…

दार्जिलिंग। दार्जिलिंग में चल रहे बेमियादी बंद के बीच पुलिस स्टेशन पर हमले की एक घटना सामने आई है। कल 19 अगस्त की रात कालिम्पोंग पुलिस स्टेशन पर ग्रेनेड फेंककर हमला किया गया, जिसमें एक पुलिसकर्मी की मौके पर ही मौत हो गई। हमले में एक अन्य बुरी तरह घायल हो गया। हमले में मारे गए 31 वर्षीया पुलिसकर्मी का नाम राकेश राउथ है।

पुलिस स्टेशन पर हुए हमले के लिए पुलिस ने गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के प्रमुख बिमल गुरूंग सहित तीन नेताओं पर केस दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि यह हमला गोजमुमो ने ही किया है। गौरतलब है कि अलग राज्य आंदोलन में गोजमुमो प्रमुख भूमिका निभा रहा है।

पुलिस स्टेशन पर हमले के लिए गोजमुमो को आरोपित किए जाने पर मोर्चा का कहना है कि हम पर गलत आरोप मढ़े जा रहे हैं। इस तरह की हरकतें वो लोग कर रहे हैं जो नहीं चाहते कि अलग गोरखालैंड बने। हमारे आंदोलन को भटकाने के लिए इस तरह की कायरतापूर्ण हरकतें की जा रही हैं।

इस घटना पर पुलिस का कहना है कि बेहद उच्च तीव्रता वाले ग्रेनेड का पुलिस स्टेशन पर हमले के लिए प्रयोग किया गया था। हालांकि पुलिस स्टेशन पर आंदोलनकारियों द्वारा पहले भी हमले की वारदातें हो चुकी हैं, मगर पृथक गोरखालैंड की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन में पहली बार इस तरह का कदम उठाया गया है, यानी पुलिस पर हमले के लिए ग्रेनेड का इस्तेमाल किया गया है।

19 अगस्त की रात तकरीबन 11 बजे के बासपास कुछ अज्ञात हमलावरों ने कालिम्पोंग स्टेशन पर ग्रेनेड फेंककर हमला किया। दार्जिलिंग के इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस मनोज वर्मा ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि ‘ हमले में एक पुलिसवाले की मौत हो गई है, जबकि होमगार्ड का एक जवान बुरी तरह जख्मी हो गया है। हमलावरों द्वारा बहुत उच्च तीव्रता के ग्रेनेड का इस्तेमाल किया गया था।’

पुलिस स्टेशन पर हुए हमले के बाद पुलिस ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी है। इस हमले में संलिप्त दोषियों का पता लगाने के लिए पुलिस ने व्यापक स्तर पर सर्च आॅपरेशन शुरू कर दिया है।

पृथक गोरखालैंड की मांग को लेकर ग्रेनेड से हमला किए जाने की दार्जिलिंग यह दूसरी घटना है। कुछ दिन पहले चौक बाजार इलाके में एक घर पर भी ग्रेनेड फेंका गया था। हालांकि उस हमले में किसी की जान नहीं गई थी। गौर करने वाली बात यह है कि जिस घर पर यह हमला हुआ, वह पुलिस स्टेशन से मात्र दो-तीन सौ मीटर की दूरी पर था।

गौरतलब है कि इससे पहले जो हिंसक घटनाएं हुई थीं उनमें गोरखालैंड समर्थकों ने पुलिस स्टेशनों, सरकारी गेस्ट हाउसों, सरकारी कार्यालयों और रेलवे स्टेशनों पर आगजनी की घटनाओं को अंजाम दिया था, मगर किसी भी घटना में ग्रेनेड जैसी खतरनाक चीज का इस्तेमाल नहीं किया गया था।


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