फैक्ट फाइडिंग टीम के सदस्यों को सुबह से शाम तक यह कहते हुए पुलिस ने अपनी हिरासत में रखा कि उन्हें सुकमा एसपी और कलेक्टर की टीम से पूछताछ के बाद ही रिहा किया जाएगा…

छत्तीसगढ़। आदिवासी क्षेत्रों में बढ़ते पुलिसिया उत्पीड़न और शासन—प्रशासन का उनके प्रति रुख और वहां के हालातों की पड़ताल करने के लिए एक 18 सदस्यीय फैक्ट फाइडिंग टीम को कल 13 अगस्त की सुबह 9 बजे पुलिस ने अपनी अनौपचारिक हिरासत में ले लिया। हालांकि उनकी औपचारिक गिरफ्तारी नहीं की गई थी, मगर यह कहते हुए उन्हें दिनभर पुलिस ने थाने में बिठाये रखा गया कि हमारे आॅफिसर्स आपसे पूछताछ करेंगे, उसके बाद आपको छोड़ा जाएगा।

गौरतलब है कि 11 अगस्त को तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के सीएलसी सदस्यों सहित डेमोक्रेटिक राइट्स ऑर्गेनाइजेशन (सीडीआरओ) के 18 सदस्यों की एक फैक्ट फाइडिंग टीम छत्तीसगढ़ के लिए रवाना हुई थी। टीम में देश के अलग—अलग इलाकों के विभिन्न संगठनों से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता और मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं, जिनमें दिल्ली से गौतम नवलखा और सुनील कुमार शामिल हैं। 12 अगस्त को यह टीम नागानूर और पालानूर में थी, जबकि 13 अगस्त की सुबह सुकमा में बढ़ रही हिंसा की घटनाओं के तहत वहां का जायजा लेने के लिए टीम रवाना हो रही थी।

मगर कल 13 अगस्त को फैक्ट फाइडिंग टीम के सदस्यों को सुबह से शाम तक यह कहते हुए पुलिस ने अपनी हिरासत में रखा कि उन्हें सुकमा एसपी और कलेक्टर की टीम से पूछताछ के बाद ही रिहा किया जाएगा।

फैक्ट फाइडिंग टीम के सदस्य तीन वाहनों में सवार हो सुकमा के बुर्कापाल गांव तक पहुंचे थे कि सुकमा जेल के पास आकस्मिक जांच के नाम पर पुलिस ने उन्हें रोक लिया था। पुलिस ने जांच के नाम पर वाहनों के ड्राइवरों तक को अपनी हिरासत में ले लिया।

छत्तीसगढ़ सरकार नहीं चाहती कि आदिवासियों के बढ़ते शोषण और इस क्षेत्र में बढ़ती हिंसा की घटनाओं का सच सामने आए, इसी मकसद से टीम को थाने में दिनभर हिरासत में रखा कि वे डरकर वापस चले जाएं। पुलिस अधिकारियों ने टीम से कहा कि सुकमा के बिगड़े हालातों में यहां जाना सुरक्षित नहीं है। बिगड़े हालातों में हम आपको वहां जाने की इजाजत नहीं दे सकते। बिना परमिशन के कोई टीम जांच के लिए नहीं जा सकती है, क्योंकि इससे कानून व्यवस्था बिगड़ने का खतरा रहता है।

सामाजिक कार्यकर्ता और क्रांतिकारी जनकवि वरवर राव ने पुलिस द्वारा फैक्ट फाइडिंग टीम को इस तरह अनौपचारिक रूप से हिरासत में रखे जाने की घटना की निंदा करते हुए कहा था कि ‘छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में छत्तीसगढ़ पुलिस ने आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया था। मैं पुलिस की इस कायरतापूर्ण हरकत का विरोध करता हूं।’

आज टीम इसी मसले पर सुकमा में एक प्रेस कांफ्रेंस आयोजित करने जा रही है।

हालांकि छत्तीसगढ़ पुलिस ने सामाजिक कार्यकर्ताओं को नजरबंद किए जाने की खबर का विरोध करते हुए कहा था कि चूंकि यहां के हालात ठीक नहीं हैं इसलिए उन्हें सुकमा में पुलिस द्वारा आश्रय प्रदान किया गया था।


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