Last Update On : 25 10 2018 10:03:54 PM

भाजपाई मुख्यमंत्री मनोहर खट्टर ने रोडवेज कर्मचारियों को अपनी औकात में रहने की नसीहत देते हुए कहा, यूनियन के लोग सिर्फ कर्मचारियों के प्रतिनिधि हैं, जबकि सरकार है पूरे प्रदेश की जनता की प्रतिनिधि…

सुशील मानव की रिपोर्ट

720 निजी बसों और किलोमीटर स्कीम के आधार पर बसे चलाने के विरोध में पिछले 9 दिन से चल रही हरियाणा रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल बुधवार 24 अक्टूबर को भी जारी रही।

गौरतलब है कि तालमेल कमेटी ने 25 अक्टूबर तक हड़ताल घोषित की हुई है। वहीं अब तक आंदोलनकारियों का सख्ती से दमन करती आ रही हरियाणा सरकार ने अपनी नीति को बेअसर होता देख पिछले दिनों इसमें थोड़ा सा बदलाव किया। जब सख्ती और दमन से भी बात नहीं बनी तो हरियाणा सरकार ने वार्ता का रास्ता अपनाया। पिछले तीन दिन में दो बार बातचीत की।

हरियाणा निवास पर परिवहन मंत्री कृष्ण लाल पंवार और रोडवेज यूनियन के बीच दोबारा बातचीत हुई। हरियाणा रोडवेज यूनियन की ओर से बातचीत में हरियाणा रोडवेज के नए महानिदेशक रमेश चंद्र बिदान, हाल ही में बदले गए पंकज अग्रवाल, रोडवेज कर्मचारी तालमेल कमेटी की ओर से वीरेंद्र धनखड़, हरिनारायण शर्मा, इंद्र सिंह बधाना,दलवीर सिंह किरबारा, अनूप सहरावत, जयभगवान कादियान और पहल सिंह तंवर समेत कुल 14 कर्मचारी नेता शामिल रहे।

 

हरियाणा के परिवहन मंत्री कृष्ण लाल पंवार कंट्रैक्ट पर 510 बसें चलाने की जिद पर अड़े रहे, जबकि रोडवेड कर्मचारी तालमेल कमेटी ने टंडर रद्द करने की मांग से पीछे हटने को कतई तैयार न हुए। अंततः ढाई घंटे तक चली वार्ता विफल हो गई।

बता दें कि पिछले 10 दिनों से हरियाणा सरकार ने अपने जनविरोधी फैसले के खिलाफ चल रहे रोडवेज कर्मचारियों की जायज व शांतिपूर्वक आंदोलन को कुचलने के लिए दमनकारी तानाशाही नीति अपनाए हुए है। खट्टर सरकार ने सख्त कार्रवाई करते हुए मंगलवार 23 अक्टूबर को भी प्रोबेशन पीरियड पर चल रहे 6 और ड्राइवरों को बर्खास्त कर दिया था, जबकि 293 ड्राईवरों को पहले ही आंदोलन में शामिल होने के चलते सरकार द्वारा बर्खास्त किया जा चुका है।

वहीं, प्रोबेशन पर लगे 309 नए ड्राइवर कंडक्टरों ने बुधवार 24 अक्टूबर को नौकरी ज्वॉइन कर ली, जिनके सहारे सरकार ने बुधवार तक रोड पर दौड़ने वाली रोडवेज बसों की संख्या 1815 तक पहुंचने का दावा किया। इसके अलावा सहकारी परिवहन समितियों की 1059 बसों के चलने का भी दावा किया गया।

उधर सहकारी बस मालिकों ने पूर्व घोषित हड़ताल से पलटी मारते हुए अपनी बसें सड़कों पर उतार दी है, जबकि दूसरी ओर सरकार हरियाणा रोडवेज कर्मचारियों पर एस्मा जैसे कानूनों को लागू करके निलंबन, बर्खास्तगी, गिरफ्तारी व जेल का डर दिखाकर आंदोलन को दबाने का प्रयास कर रही है।

हरियाणा रोडवेज के हित में वेतन और बोनस देने को भी तैयार हैं रोडवेजकर्मी
वहीं रोडवेज तालमेल कमेटी के पदाधिकारियों का कहना है कि हरियाणा सरकार निजी बसों की जगह रोडवेज के लिए नई बसें खरीदे। रोडवेज के लिए नई बसें खरीदने के लिए वो अपना एक महीने का वेतन और दो साल का बोनस देने को तैयार हैं।

रोडवेज कर्मचारियों का ये भी कहना है कि प्रदेश में स्त्रियों की सुरक्षा को लेकर हालात वैसे ही इतने बदतर हैं 720 निजी बसों के जरिए रोडवेज का निजीकरण करके सरकार औरतों की सुरक्षा को और खतरे में डालने जा रही है।

सर्व कर्मचारी संघ की राज्य इकाई के अध्यक्ष धर्मबीर फोगाट ने कहा, ‘700 निजी बसों को लाने के कदम के जरिये, राज्य सरकार रोडवेज के पूर्ण निजीकरण के लिए दरवाजों को खोलना चाहती है। हम पूछ रहे हैं कि इस नीति से किसका फायदा होगा। इसके लिए सरकार के अलावा लोगों या अन्य किसी ओर से कोई मांग नहीं है।’

हरियाणा रोडवेज कर्मचारियों के समर्थन में आये दूसरे सरकारी विभागों कर्मचारी और यूनियनें
रोडवेज विभाग के मुख्यालय के कर्मचारी, सिविल सचिवालय और विधि एवं परामर्शी विभाग के कर्मचारी संगठन भी रोडवेज कर्मचारियों के समर्थन में आ गए हैं।

इसके अलावा सीटू, सर्व कर्मचारी संघ, रिटायर्ड कर्मचारी संघ एवं उनके सभी घटक संगठन, नगर पालिका कर्मचारी संघ हरियाणा ए.एच.पी.सी वर्कर्स यूनियन, मैकेनिकल वर्कर यूनियन 41, राजकीय अध्यापक संघ, हेमसा, ए.पी.एस.डब्ल्यू एसोसिएशन आशा वर्कर, आंगनबाड़ी, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी यूनियन और सभी निगम बोर्ड. कार्पोरेशन और विश्वविद्यालयों के संगठनों और जन संघर्ष मंच हरियाणा ने खुलकर रोडवेज कर्मचारियों के आंदोलन का समर्थन किया है।

बेशर्मी पर आमादा हरियाणा सरकार
कल हुए सरकार और रोडवेज यूनियन की वार्ता में परिवहन मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने घोटालों के आरोप की जांच कराने की बात तो कही, लेकिन 510 बसों का टेंडर वापिस लेने से साफ मना कर दिया। साथ ही ये भी आश्वासन दिया कि जाँच पूरी होने तक बाकी कि 190 बसों का टेंडर नहीं जारी किया जाएगा। सवाल तो उठता है कि जब टेंडर किसी भी कीमत पर रद्द नहीं करना है, जारी ही रखना है तो सरकार जांच क्या करायेगी।

मुख्यमंत्री मनोहर खट्टर ने कर्मचारियों को अपनी हद (औकात) में रहने की नसीहत देते हुए कहा कि यूनियन के लोग सिर्फ कर्मचारियों के प्रतिनिधि हैं, जबकि सरकार पूरे प्रदेश की जनता की प्रतिनिधि है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि रोडवेज कर्मचारी यूनियन के नेताओं को कर्मचारियों से संबंधित मुद्दों को उठाने का अधिकार है, लेकिन राज्य की नीतियों से संबंधित निर्णयों में हस्तक्षेप करने का उन्हें अधिकार नहीं है। खट्टर ने कहा कि 700 निजी बसों को लाये जाने का निर्णय एक नीतिगत मामला है।

उन्होंने कहा कि, ‘जहां तक कर्मचारियों के मुद्दों का सवाल है, वे इन्हें उठा सकते हैं, लेकिन उन्हें सरकार के नीतिगत मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।’

फूंका गया मुख्यमंत्री का पुतला
इससे पहले अपनी जायज मांगों को अनसुना करने, रोडवेज का निजीकरण करने और आंदोलनरत हरियाणा रोडवेज के कर्मचारियों के खिलाफ सरकार की दमनकारी कार्रवाई के विरोध में हरियाणा रोडवेज कर्मचारी तालमेल कमेटी और जन संघर्ष मंच हरियाणा की ओर से शुक्रवार को दशहरे के दिन मुख्यमंत्री का पुतला फूंककर अपने गिरफ्तार साथियों की रिहाई की मांग की गई। मुख्यमंत्री के अलावा परिवहन मंत्री कृष्ण पंवार और अतिरिक्त मुख्य सचिव धनपत सिंह का पुतला फूँककर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की गई।

720 निजी बसों के पीछे का खेल
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक बताते हैं कि 720 बस परमिट की महज 6 पार्टियों में बंदरबांट करनी है। इसकी व्यूह रचना मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव राजेश खुल्लर, परिवहन विभाग के एसीएस धनपत सिंह ने परिवहन मंत्री कृष्ण लाल पंवार के साथ मिलकर रची है। वहीं, ट्रांसपोर्टर की ओर से बहादुरगढ़ निवासी वही व्यक्ति मुख्य भूमिका में है, जिसे 200 बस परमिट मिलने हैं।

बहादुरगढ़ निवासी इस व्यक्ति की खुल्लर, धनपत व मंत्री से बार-बार मुलाकातें हुई हैं। इन कथित मुलाकातों में वह गोपनीय मुलाकात भी हो चुकी हैं, जो किसी भी टेंडर को फाइनल करने से पहले अत्यंत जरूरी होती हैं। प्रदेश सरकार के एक सीनियर अधिकारी के अनुसार मुख्यमंत्री को अगर अपनी कर्मचारी विरोधी छवि को सुधारना है तो उन्हें खुल्लर, धनपत, परिवहन मंत्री व बहादुरगढ़ निवासी शख्स के संबंधों की जांच करानी होगी।

गोपनीय तरीके से इन सभी के मोबाइल की लोकेशन चेक कराएं। इससे खुद ही पता चल जाएगा कि इनकी कितनी बार, किन जगहों पर मुलाकात हो चुकी हैं। ये मुलाकातें कितनी-कितनी लंबी हुई हैं। फिर यह पता लगाना भी आसान हो जाएगा कि इस शख्स से बार-बार मिलने में इन तीनों की इतनी अधिक दिलचस्पी क्यों रही है।

हरियाणा रोडवेज तालमेल कमेटी ने जनता के सामने रखी रोडवेज की असलियत
भाजपा सरकार आने के बाद से पिछले चार साल में सिर्फ एक बार मार्च 2015 में 62 नई बसें लाई गई थी, जबकि हर साल सैंकड़ों बसे खटारा होकर बाहर हो जाती हैं। पिछले चार साल में वर्कशॉप में एक भी भर्ती नहीं हुई।

सरकार रोडवेज के घाटे का ढिढोंरा पीट रही है, जबकि सच्चाई ये है कि सरकारी बसें 45 श्रेणियों में जैसे कि विद्याथियों, बुजुर्गों, स्वतंत्रता सेनानियों, रक्षाबंधन आदि पर महिलाओं को मुफ्त या सस्ते दामों पर यात्रा प्रदान करती है। इन पर सालाना 662 करोड़ रुपए रोडवेज विभाग खर्च करती है, जिसकी सरकार की ओर से कोई भरपाई नहीं की जाती।

अगर सरकार इस रकम को वहन करे तो रोडवेज विभाग भी मुनाफे में रहेगा। लेकिन नहीं, हरियाणा सरकार घाटे का रोना रोने के बहाने रोडवेज का निजीकरण करके हरियाणा की जनता को उपरोक्त सुविधाओं से वंचित कर रही है।

सरकार निजी बसों से 12000 रुपए महीने का ‘यात्री कर’ लेती है। जबकि यही सरकार रोडवेज विभाग की सरकारी बसें 36000 रुपए महीने की ‘यात्री कर’ सरकार को देती है। इसके अलावा रोडवेज की बसों से भारी भरकम टोल टैक्स वसूला जाता है। इसके अलावा सरकार डीजल पर वैट कम करके भी इसकी भरपाई कर सकती है।

विभाग को निजी बसों को लगभग 55 रुपए प्रति किलोमीटर की दर से भुगतान करना होगा। जबकि रोडवेड बस खुद 46 रुपये प्रति किमी के खर्च दर पर चल रही हैं।

हमारी मांग है कि हरियाणा प्रदेश में जनका की जरूरतों को पूरी करने के लिए विभाग में 14000 नई बसें लाई जाएं। इससे 84000 नोजवानों को रोजगार मिलेगा। और सरकारी बसें हर गाँव तक जा सकेंगी।

सरकार पैसे का बहाना बना रही है जबकि सभी जानते हैं कि प्राइवेट बस मालिक बी बैंकों से लोन लेकर ही बसें खरीदते हैं। कई निजी कारोबारी तो बैंको का पैसा लेकर भाग भी चुके हैं। अगर हरियाणा सरकार बैंके को गारंटी दे तो नई बसों के लिए हरियाणा रोडवेज को बैंकों से आसानी से लोग मिल सकता है।