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जेएनयू प्रशासन के फैसले को कन्हैया कुमार और साथियों ने दी थी कोर्ट में चुनौती, उसी पर फैसला देते हुए कहा दिल्ली हाईकोर्ट ने जेएनयू कार्यालय का आदेश अनगिनत बिंदुओं पर टिकने योग्य ही नहीं…

दिल्ली। जेएनयू के पूर्व छात्र अध्यक्ष कन्हैया कुमार के खिलाफ जेएनयू प्राधिकार द्वारा लगाए जुर्माने को दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज करते हुए कहा कि जेएनयू प्रशासन की यह कार्रवाई तर्कहीन थी। गौरतलब है कि दिल्ली हाईकोर्ट ने भारत विरोधी कथित नारेबाजी की एक घटना के सिलसिले में यह फैसला दिया है।

गौरतलब है कि जेएनयू के अपीलीय प्राधिकार द्वारा विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार के खिलाफ लगाए जुर्माने के आदेश को निरस्त कर करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल ने कहा कि जेएनयू कार्यालय का आदेश अनगिनत बिंदुओं पर टिकने योग्य ही नहीं है। कोर्ट के इस कथन के बाद जेएनयू के वकील ने कोर्ट से दलील दी कि वह इस फैसले को वापस ले रहे हैं।

घटनाक्रम के मुताबिक विश्वविद्यालय परिसर ने मामला दर्ज किया था कि 2016 में अफजल गुरू को फांसी देने के खिलाफ जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित एक कार्यक्रम में कन्हैया कुमार और उनके साथियों ने भारत विरोधी नारे लगाए गए थे। इसी घटना के बाद जेएनयू प्रशासन ने कन्हैया कुमार को अनुशासनहीनता का दोषी ठहराते हुए उन पर 10 हजार रुपए का दंड भी लगाया था।

दिल्ली हाईकोर्ट ने यह मामला अपीलीय प्राधिकार को सौंपते हुए इस पर नये सिरे से कानून के मुताबिक कार्यवाही शुरू करने का आदेश दिया है।

जेएनयू प्रशासन के कन्हैया कुमार पर 10 हजार रुपए का दंड लगाने के फैसले के बाद कन्हैया कुमार ने मुख्य प्रॉक्टर के जरिए जारी किए गए इस फैसले को कोर्ट में चुनौती देते हुए उसे रद्द करने की मांग की थी।

13 दिसंबर 2001 को हुए आतंकवादी हमले के मामले में फांसी पर लटकाए गए अफजल गुरु की तीसरी बरसी पर विश्वविद्यालय में नौ फरवरी 2016 को एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था, विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा था कि इस कार्यक्रम में कन्हैया कुमार और उनके 13 साथियों ने भारत विरोधी नारे लगाए थे।


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