Last Update On : 19 09 2018 10:42:24 AM

दंतेवाड़ा का पूरा पुलिस प्रशासन केस को दबाने व बदनामी से बचने के लिये लगा है झोलमोल करने में, युवती के आसपास चौबीसों घंटे है पुलिस का पहरा…

लिंगाराम कोडोपी की रिपोर्ट

छत्तीसगढ़ राज्य के दंतेवाड़ा जिला ग्राम पंचायत समेली के पांडू पारा की जिस नाबालिग युवती का 14 सितंबर को बलात्कार हुआ था उसको कल 18 सितंबर को होश आया है। युवती ने होश में आते ही पुष्टि की है कि उसके साथ बलात्कार हुआ है।

युवती के मुताबिक उसके साथ इस तरह का घिनौना कृत्य करने वाले CRPF के जवान हैं। गौरतलब है कि ग्राम पालनार और ग्राम समेली इन दोनों पंचायत के बीच की दूरी 9 किलोमीटर है। दोनों गांव में CRPF कैम्प हैं।

हर दिन सुरक्षा के नाम पर कैम्पों से CRPF के जवान निकलते हैं। ये आदिवासियों की सुरक्षा करते हैं या सड़क की सुरक्षा करते हैं यह बात तो CRPF के जवान ही बता सकते हैं। रायपुर में बैठे CRPF के एडीजे एके सिंह, डीआईजी, आईजी व अन्य अधिकारियों से कौन पूछेगा कि सुरक्षा के नाम पर आदिवासी महिलाओं का बलात्कार, पुरुषों की हत्या क्यों हो रही है? लगता है सीआरपीएफ के जवान दारू पीकर सुरक्षा करते हैं। वैसे भी CRPF के जवानों को भारी मात्रा में राज्य और केंद्र सरकार शराब मुहैया कराती हैं।

केपीएस गिल ने जिस तरह पत्रकारों के माध्यम से छत्तीसगढ़ राज्य के मुख्यमंत्री की पोल खोली “वेतन लो चुपचाप मौज मस्ती करो”, केपीएस गिल शायद ईमानदार पुलिस अफसर हैं। ईमानदारी की वजह से उन्होंने रमन सिंह का ऑफर ठुकरा दिया, क्योंकि खुद के ऐशोआराम के लिए मासूम आदिवासियों की नक्सल के नाम पर हत्या नहीं करवाना चाहते थे। ऑफर को स्वीकार कर लिये होते तो आज छत्तीसगढ़ राज्य के बस्तर संभाग के आदिवासियों का क्या होता आप सोचिये?

यह कोई पहली घटना नहीं है। 2017 में कैशलेस कहे जाने वाले ग्राम पालनार के आदिवासी छात्रावास में 17 बच्चों के साथ CRPF और दंतेवाड़ा जिला प्रशासन के आला अधिकारियों के बीच रक्षाबंधन के नाम पर छेड़खानी का मामला सामने आया था।

डॉक्टरों के हवाले से पता चला कि बलात्कार हुआ भी होगा तो चौबीस घंटे के अंदर पता चल जाता, लेकिन 60 घण्टे बाद पता लगाना थोड़ा मुश्किल है। हम यकीन के साथ युवती के साथ बलात्कार हुआ है, कह सकते हैं क्योंकि युवती उठ—बैठ नहीं पा रही है। कमर में दर्द, हाथों व गुप्तांग में भी दर्द बता रही है। डॉक्टर तो कह रहे हैं कि खून सही है, एनीमिया जैसी कोई बीमारी नहीं है।

दंतेवाड़ा का पूरा पुलिस प्रशासन केस को दबाने व बदनामी से बचने के लिये झोलमोल करने में लगा हुआ है। युवती के आसपास 24 घण्टे पुलिस का पहरा है। पहरा होने के बावजूद हमारे पास युवती की कही बातों का आडियो टेप है। सब युवती को झूठा साबित करने पर तुले हुए हैं।

जिला दंतेवाड़ा, छत्तीसगढ़ राज्य के ग्राम समेली, पांडूपारा की अस्पताल में भर्ती इस आदिवासी युवती का सीआरपीएफ द्वारा बलात्कार की बात परिजन शुरुआत से ही कह रहे थे, जिसका शुरुआत में कुआकोण्डा अस्पताल में इलाज चल रहा था, बाद में हालत देखते हुए दंतेवाड़ा रेफर कर दिया गया।

यह घटना 14/9/18 की है, जब युवती हल जोत कर खाना खाने के बाद बण्डा लेकर घर से आधा किलोमीटर दूर लकड़ियां लेने जंगल गयी हुई थी। युवती जब शुक्रवार 14 सितंबर को शाम को घर नहीं पहुँची तो परिजनों को लगा कि युवती घर नहीं पहुंची हैं, तो गाँव के अन्य ग्रामीणों को बताया तब गाँव के ग्रामीण युवती को ढूढ़ने निकले शनिवार सुबह से शाम तक जंगल का छान मारा, वह नहीं मिली। 16 की सुबह पांच बजे से गांवों के ग्रामीणों ने ढूढ़ना शुरू किया तो सुबह सात बजे जंगल में बेहोशी की हालत में मिली। गांव के ग्रामीणों ने युवती को उठा कर अस्पताल ले आये।

सूत्रों के अनुसार 14/9/18 को ग्राम पालनार में साप्ताहिक बाजार लगता है। ग्राम समेली और ग्राम पालनार के CRPF केम्फ के जवान सड़क की सुरक्षा के नाम पर निकलते हैं और शाम तक सड़क किनारे जंगलों में रहते हैं।

गाँव के ग्रामीणों का यह भी कहना है कि 14/9/18, शुक्रवार को जिस जंगल में घटना हुई है, उस जंगल के आसपास CRPF के जवानों को घूमते हुए गांव के ग्रामीणों ने देखा है। घटनास्थल पर जूतों के निशान हैं, जूते पहनकर आदिवासी जंगल में नहीं घूमते हैं। युवती 16 वर्ष की है, माँ और पिता का कहना है। जिस जगह पे घटना हुई है उस जगह पर टूटी हुई चूड़ियों के टुकड़े भी मिले हैं।

शुरुआत में नाबालिग लड़की की हालत देखकर डॉक्टर कह रहे थे कि युवती की मृत्यु हो सकती है। पीड़ित युवती के साथ परिजन है। वहां बस्तर की सामाजिक कार्यकर्ता सोनी सोरी, गांव के सरपंच संजय कुंजाम, आम आदमी पार्टी के दंतेवाड़ा प्रत्याशी बल्लू भवानी, भूतपूर्व विधायक सीपीआई के नंदा राम सोरी, कटेकल्याण के ब्लाक अध्यक्ष चमन लाल कुंजाम, राष्ट्रीय कांग्रेस जिला दन्तेवाड़ा की विधायक देवती कर्मा के बेटे बन्टी कर्मा भी घटना की जायजा लेने जिला अस्पताल पहुंचे थे।

इस घटना से पहले इस इलाके में पहले भी CRPF के जवानों द्वारा आदिवासी छात्राओं के साथ छेड़खानी का मामला सामने आया था।

(पत्रकार लिंगाराम कोडोपी बस्तर में रहते हैं और आदिवासी उत्पीड़न के खिलाफ लगातार लिखते हैं। यह रिपोर्ट उनके एफबी पोस्ट को संपादित कर ली गई है)