Last Update On : 10 06 2018 01:54:01 PM

एमबीबीएस छात्रों और अस्पताल कर्मचारियों के बीच हुए विवाद के बाद कर्मचारियों के विरोध से चरमरा गई है चिकित्सा व्यवस्था, अस्पताल कर्मचारियों की मांग की आरोपी छात्रों पर कार्रवाई होने के बाद ही सुचारू रूप से करेंगे काम…

जनज्वार। उत्तर प्रदेश के एकलौते चिकित्सा चिकित्सा विश्वविद्यालय किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में मचा बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। छात्रों और अस्पताल कर्मचारियों के बीच पहले से यहां मचे बवाल का असर मरीजों के इलाज पर पड़ रहा है। अब यहां चिकित्सकों की लापरवाही के चलते 3 नवजात बच्चों मौत का मामला सामने आया है।

जानकारी के मुताबिक कल 9 जून को केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर के डॉक्टरों की लापरवाही के चलते तीन बच्चों की मौत हो गई। इनमें से 3 महीने के एक नवजात बच्चे की मां का आरोप है कि गंभीर रूप से बीमार मेरे बच्चे के साथ डॉक्टरों ने एक ही आॅक्सीजन सिलिंडर से चार बच्चों की नली जोड़ी थी, जिस कारण बच्चे को पर्याप्त आॅक्सीजन नहीं मिल पाई और उसकी और अन्य दो बच्चों की मौत हो गई। उनमें से सिर्फ एक बच्चा जिंदा बचा, जिसका इलाज चल रहा है। जबकि अस्पताल प्रशासन यह कहकर अपना बचाव करने में लगा है कि सिर्फ 1 बच्चे की मौत हुई है। वह भी डॉक्टरों की लापवाही नहीं बल्कि निमोनिया के चलते हुई है, बाकी 3 का इलाज चल रहा है।

मीडिया में आई जानकारी के मुताबिक रायबरेली के मोहम्मद रसीद ने अपने 3 महीने के बच्चे सैफ को 8 जून को ट्रॉमा सेंटर के पीडियाट्रिक इंटेसिव केयर यूनिट में भर्ती कराया था। भर्ती के दूसरे दिन कल 9 जून की दोपहर बच्चों को एम्बुलेंस से वॉर्ड में शिफ्ट किया जा रहा था तो इसी दौरान नवजात की तबीयत और ज्यादा बिगड़ गई। दोबारा उसे ट्रॉमा तक लाया गया, मगर उसे बचाया नहीं जा सका।

मृतक बच्चे की मां ने आरोप लगाया कि उनके बेटे की मौत डॉक्टरी लापरवाही का परिणाम है। वह कहती हैं सैफ के साथ तीन अन्य बच्चों को भी वॉर्ड में शिफ्ट किया जा रहा था। इस दौरान जब उन्होंने सिंगल स्ट्रेचर पर एक ही आॅक्सीजन सिलिंडर से चारों बच्चों की नली जोड़ने से मना किया तो वॉर्ड बॉय ने उनको डांट दिया। इस लापरवाही के चलते बच्चों को ठीक से आॅक्सीजन सप्लाई नहीं हो पाई और 4 में से 3 की मौत हो गई।

मीडिया को-आॅर्डिनेटर डॉक्टर सुधीर सिंह के मुताबिक चार बच्चों में से एक की मौत कार्डिएक अरेस्ट के चलते हुई है। बाकी, तीनों बच्चों को पीआईसीयू में भर्ती किया गया है। केजीएमयू विवाद की वजह से सही वक्त पर इलाज नहीं हो पाने के चलते दो मरीज पहले ही मर चुके हैं।

क्या है मामला
केजीएमयू के कैश काउंटर पर 5 जून को एमबीबीएस द्वितीय वर्ष का छात्र किसी मरीज की रसीद लेने गया था, इसी दौरान कैश काउंटर पर मौजूद कर्मचारियों से उसकी बहस हो गई और बात मारपीट तक पहुंच गई। 6 जून की सुबह करीब 11 बजे कुछ छात्र सीएमएस ऑफिस पहुंचे।

पीआरओ आॅफिस के बगल में स्थित सैंपल कलेक्शन सेंटर नंबर छह के कर्मचारियों से छात्र उस कर्मचारी के बारे में पूछने लगे, जिससे पहले दिन छात्र की झड़प हुई थी। जब कलेक्शन सेंटर के कर्मचारियों ने संबंधित कमचारी के बारे में नहीं बताया तो छात्रों ने उनके साथ मारपीट की। आरोप है कि छात्रों ने जियाउद्दीन उर्फ पप्पू और लैब असिस्टेंट किरन के साथ अभद्रता और मारपीट की।

इसी बात से गुस्साए कर्मचारियों ने विरोधस्वरूप काम ठप्प करने की धमकी दी और कहा कि 8 जून की सुबह 10 बजे तक केजीएमयू प्रशासन ने आरोपी छात्र के खिलाफ कार्रवाई नहीं की तो सभी विभागों में काम बंद कर दिया जाएगा। आरोपी छात्र पर कार्रवाई न होने पर कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन किया, जिससे अस्पताल की व्यवस्था चरमरा गई। छात्रों और कर्मचारियों के बीच हुए इस विवाद का खामियाजा मरीजों और उनके तीमारदारों को भुगतना पड़ रहा है।

यहां तक की ट्रॉमा सेंटर में गंभीर हालत में आए मरीजों की भी किसी तरह की सहायता करने से अस्पताल कर्मचारियों ने मना कर दिया। इसी दौरान 2 मरीजों की मौत भी हो गई और कई लोग गंभीर रूप से बीमार अपने मरीजों को महंगे प्राइवेट अस्पतालों में भर्ती कराने को मजबूर हुए।

अभी भी यहां विवाद थमा नहीं है, जिसके चलते मरीजों और उनके परिजन खासा परेशान हैं। चिकित्सा व्यवस्था चरमरा गई है।